देश में 1 अप्रैल से दो दिन तक चलने वाला एक ऐसा आयोजन हो रहा है जो अपने आप में दुनिया में होने वाला सबसे बड़ा आयोजन है। हम बात कर रहे हैं स्मार्ट इंडिया हैकथॉन की। जिसमें देशभर के करीब 10 हजार से ज्यादा छात्र हिस्सा ले रहे हैं। इसके लिए देशभर में जगह-जगह 26 सेंटर बनाए गए हैं जिनमें से एक है नोएडा का जे.एस.एस. कॉलेज। जहां लगभग पूरे देश से विद्यार्थियों की 58 टीमें आई हैं। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन का उद्देश्य युवाओं और खास तौर से इंजीनियरिंग के छात्रों में नवाचार को प्रोत्साहन देने व नए विचारों को सामने लाना है। (सभी फोटोः लाल सिंह)
मोदी के आह्वान पर सरकार की समस्याओं को सुलझाने में 10 हजार से ज्यादा छात्र लगा रहे दिमाग
ये टीमें एआईसीटीई के लिये कार्य कर रही हैं। इसके तहत भारत सरकार के 29 मंत्रालयों व विभागों द्वारा चिन्हित सामाजिक महत्व की समस्याओं पर ध्यान दिया जाएगा। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन का आरंभिक बिंदु डिजिटल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया व मेक इन इंडिया है, जिसके लिए कुशल और अभिनव विचारों वाली श्रम शक्ति की आवश्यकता होती है।
डॉ. योगेंद्र सिंह ने बताया कि पूरे देश में लगभग 26 स्टूडेंट सेंटर आयोजित किये गए हैं जोकि लगभग 29 मंत्रालयों की समस्या का हल निकालेंगे। इस आयोजन में 10000 से अधिक प्रोग्रामर हिस्सा लेंगे, जिसके कारण यह दुनिया में अब तक का सबसे बड़ा हैकथॉन आयोजन बन गया है। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन का ग्रांड फिनाले देश के 26 विभिन्न स्थानों पर 1 अप्रैल को सुबह आठ बजे शुरू होगा और 2 अप्रैल को आठ बजे रात में समाप्त हो जाएगा।
यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन मेक इन इंडिया और स्मार्ट इंडिया से प्रेरित है। प्रत्येक स्थान को भारत सरकार के किसी न किसी विभाग या मंत्रालय के अधीन रखा गया है। फिनाले की तैयारी में लगभग 2110 सलाहकारों ने छात्रों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया। फिनाले के दौरान चुने हुए समूह 1 अप्रैल की सुबह से अगले 36 घंटे तक सक्रिय रहेंगे और प्रोग्रामिंग के जरिए समस्या संबंधी डिजिटल हल निकालेंगे ताकि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर या मोबाइल ऐप बनाए जाएं। तैयार होने वाले सॉफ्टवेयर का निर्णायक विश्लेषण संबंधित मंत्रालय और उद्योग जगत के विशेषज्ञ करेंगे।
इस दौरान विद्यार्थी काफी उत्साहित दिखे। कार्यक्रम में विद्यार्थी लगातार 36 घंटों तक यह कार्य करेंगे।
बेहतरीन तीन सोल्यूशन के लिए टीमों को क्रमश: एक लाख रुपये, 75 हजार रुपये और 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कृत सॉफ्टवेयर को मंत्रालय व विभाग अपने कामकाज संबंधी प्रणालियों में सुधार के लिए इस्तेमाल करेंगे।
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर इस अभियान के प्रमुख संरक्षक हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय एआईसीटीई के माध्यम से इस अभियान को चला रहा है।