आईआईटी से पीएचडी करने वालों को यहीं पर फैकल्टी के रूप में अब तैनाती नहीं मिल सकेगी। कम से कम पांच साल का अनुभव ग्रहण करने के बाद ही आईआईटी में उसकी तैनाती हो सकेगी।
निदेशक के इस फैसले IIT से पीएचडी करने वालों को लगा बड़ा झटका
आईआईटी रुड़की के निदेशक की ओर से शिक्षा की गुणवत्ता और रैकिंग सुधारने के लिए यह पहल की गई है। इससे पहले आईआईटी रुड़की से पीएचडी करने वालों को फैकल्टी के रूप में यहीं तैनाती दी जाती थी। ऐसे में पीएचडी कर यहीं पर फैकल्टी नियुक्त होने की आस लगाए शोधार्थियों को झटका लग सकता है।
आईआईटी रुड़की में कई प्रोफेसर ऐसे हैं जिन्होंने यहीं से पीएचडी की उपाधि ली और फिर यहीं फैकल्टी के रूप में तैनाती हो गई, लेकिन अब यह संभव नहीं हो सकेगा। आईआईटी निदेशक एके चतुर्वेदी के अनुसार यहां से पीएचडी करने वालों को यहीं पर नियुक्ति नहीं दी जा सकेगी, चाहे वह कितना भी योग्य क्यों न हो।
इसके लिए उसे कम से कम पांच साल अन्य संस्थान से अनुभव ग्रहण करना होगा। इसके बाद योग्यता के आधार पर प्रक्रिया के तहत उसका चयन किया जा सकता है। उनका मानना है कि आईआईटी रुड़की से पीएचडी करने वाला व्यक्ति परिवार के सदस्य की तरह होता है।
ऐसे में उसकी यहीं पर तैनाती उचित नहीं है, हालांकि उन्होंने इसे सभी आईआईटी में पहले से चली आ रही व्यवस्था करार दिया, जबकि इसके विपरीत आईआईटी रुड़की में पहले यहीं से पीएचडी करने वालों को बतौर फैकल्टी नियुक्त किया जा चुका है। अब आईआईटी निदेशक की सख्ती के बाद इस पर रोक लगना तय माना जा रहा है, जिससे संस्थान से पीएचडी कर यहीं नियुक्ति की आस लगाने वालों को झटका लग सकता है।