जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) चुनाव में रिकॉर्ड 68 फीसदी मतदान हुआ है। छात्रसंघ चुनाव के इतिहास में वर्ष 2007 के बाद सर्वाधिक विद्यार्थियों ने अपने मत का प्रयोग किया है। वर्ष 2007 में 68.43 फीसदी मतदान हुआ था। सुबह दस से शाम साढ़े पांच बजे तक मतदान के बाद शुक्रवार रात दस बजे से मतगणना शुरू हो गई। चुनाव के नतीजे शनिवार आधी रात या फिर रविवार सुबह आने की संभावना है।
जेएनयू में टूटा 11 साल का रिकॉर्ड 68 फीसदी हुआ मतदान, रविवार को आएगा परिणाम
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जेएनयू चुनाव समिति के आयुक्त हिमांशु कुलश्रेष्ठ के मुताबिक, स्कूल ऑफ इनवायरमेंटल स्टडीज (एसईएस), स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस), स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज, लिट्रेचर एंड कल्चर स्टडीज (एसएलएलसी) और स्कूल ऑफ सोशल साइंस (एसएसएस) में मतदान केंद्र बनाए गए थे।। कैंपस में मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। देर रात मतगणना शुरू हो गई। शनिवार से काउंसलर्स और उसके बाद सेंट्रल पैनल के चुने गए प्रत्याशियों के नाम सामने आएंगे।
सुबह दस से एक बजे तक करीब 40 फीसदी मतदान हुआ। दुपहर ढाई से साढ़े पांच बजे तक 28 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले। मतदान की शुरुआत में केंद्रों के बाहर लंबी लाइनें लग गईं। 11 बजे तक इसमें कमी आ गई। उसके बाद दोपहर साढ़े 12 बजे के करीब फिर मतदाताओं की लंबी लाइन लग गईं। शाम चार बजे के बाद भी खासा मतदान हुआ।
नीले और लाल झंडे के बीच तिरंगा
मतदान केंद्रों के बाहर नीले और लाल झंडे के बीच एबीवीपी कार्यकर्ता तिरंगा लेकर मतदाताओं को जागरूक करते दिखे। बापसा नीले झंडे के साथ तो वामपंथी एकता पैनल (आइसा, एआईएसएफ, एसएफआई, डीएसफ) लाल झंडे के साथ ढपली पर अपने प्रत्याशियों के नाम पर आधारित तैयार गाने के बोल से मतदाताओं से वोट मांगते दिखे। एबीवीपी तिरंगे के साथ देशभक्ति का रंग भरता रहा। उधर, राजद प्रत्याशी ने लालटेन के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कैंपस में दिनभर मतदान के दौरान हार-जीत के कयास लगाए जाते रहे। सीधा मुकाबला लेफ्ट और बापसा के बीच है। एबीवीपी के सेंट्रल से काउंसलर पद पर जीत के कयास लग रहे हैं।
मिनी भारत की दिखी झलक
जेएनयू में देश के हर कोने से छात्र पढने आते हैं। इसी के चलते छात्र संगठनों ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, बिहार, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, केरल, असम, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश व दिल्ली से उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। मतदान के दौरान देश के हर कोने से जुड़े प्रत्याशी अपने इलाके के मतदाताओं से वोट की अपील करते दिखे। इससे जेएनयू कैंपस में मिनी इंडिया की झलक दिखी।