तकनीकी शिक्षा का हब माने जाने वाले ग्रेटर नोएडा के कॉलेजों में पिछले कुछ वर्षों में बीटेक-एमटेक की कोर ब्रांच से हटकर सीएस,आईटी जैसी ब्रांच की ओर विद्यार्थियों का रुझान बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो बाजार के बदलते परिवेश और मांग के अनुसार विद्यार्थियों की रुचि में लगातार बदलाव आ रहा है।
‘नब्बे फीसदी विद्यार्थियों की पहली पसंद है कंप्यूटर साइंस’
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प्लेसमेंट के आकर्षण में प्रबंधन क्षेत्र और फॉर्मास्यूटिकल सेक्टर में अभी भी विद्यार्थियों की रुचि बनी हुई है। हालांकि बीसीए-एमसीए कोर्स विद्यार्थियों की बांट जोहते रहते हैं। दुनियाभर के बदलते बाजार और सर्विस सेक्टर की मांग के अनुरूप प्रभाव ग्रेटर नोएडा के कॉलेजों में पड़ रहा है। ग्रेटर नोएडा में 48 तकनीकी कॉलेज हैं, जिनमें स्नातक और परास्नातक कोर्स चलाए जा रहे हैं।
बीटेक में भरती हैं लगभग 60 फीसदी सीटें
48 कॉलेजों में बीटेक-एमटेक में करीब 18 हजार सीटें हैं। पहली कतार वाले पांच से छह कॉलेजों के लगभग सभी ब्रांच की सीटें फुल हो जाती हैं। जबकि ज्यादातर कॉलेज में बीटेेक की करीब 60 फीसदी सीटों पर ही दाखिला हो पता है। लगभग 40 फीसदी सीटें खाली रह जाती हैं। वहीं शहर के कॉलेजों में एमबीए-एमसीए की लगभग 15 हजार तक सीटें हैं। अन्य सेक्टर में जहां तेजी से बदलाव होता जा रहा है, वहीं मैनेजमेंट सेक्टर की ग्रोथ से आकर्षण बरकरार है। बीबीए-एमबीए में पचास फीसदी से अधिक सीटें भर जाती हैं।
फॅार्मा सेक्टर में प्लेसमेंट से बेहतर रुझान
बीफॉर्मा-एमफॉर्मा में करीब दस कॉलेजों में करीब पांच हजार सीटें हैं। बड़ी संख्या में दवा कंपनियों द्वारा पिछले कुछ वर्षों में बूम आने पर इस सेक्टर में प्लेसमेंट जबरदस्त हो रहा है। फॉर्मास्यूटिकल सेक्टर में मिलते अच्छे प्लेसमेंट से प्रभावित होकर 80 से 90 फीसदी तक सीटें भर जाती हैं।
बीसीए-एमसीए को ढूंढे नहीं मिलते छात्र
शहर के सभी कॉलेजों में बीबीए-एमबीए में करीब तीन हजार सीटें हैं। डिप्लोमा कोर्स की अपेक्षा छात्र बीटेक-एमटेक की डिग्री लेना अधिक पसंद करते हैं। ऐसे में इस सेक्टर की सबसे ज्यादा खराब हालत हैं। यहां करीब 25 से 30 फीसदी सीट ही भर पाती हैं। पिछले पांच वर्षों में आधा दर्जन कॉलेजों ने तो कोर्स भी बंद कर दिया है।
मुक्ता के मैनेजर एचआर, वरमीर की मानें तो अच्छे प्लेसमेंट के चलते विद्यार्थियों की पहली पसंद सीएस और आईटी ही हैं। भले ही अमेरिका में एच1वीजा की दिक्कत बढ़ी है पर प्रत्येक कार्य में कंप्यूटरीकृत के कारण इसकी मांग बरकरार रहेगी। वैसे दो से तीन वर्षों मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल सेक्टर में प्लेसमेंट बढ़ने की उम्मीद है।