दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों(डूसू) में राष्ट्रवाद को मुख्य मुद्दा बना चुनाव लड़ी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(एबीवीपी) ने तीन सीटों पर कब्जा करके डूसू में डंका बजाया है। हालांक एबीवीपी हैट्रिक करने से चूक गई। वहीं एनएसयूआई ने डूसू में एक सीट पर जीत हासिल कर दो वर्षों बाद अपना खाता खोला है। यह नतीजे वर्ष 2013 केनतीजों के समान ही रहे हैं जब एबीवीपी को तीन और एनएसयूआई को एक पद पर जीत हासिल हुई थी।
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- फोटो : अमर उजाला
इस साल अध्यक्ष पद पर एबीवीपी उम्मीदवार अंमित तंवर, उपाध्यक्ष पद पर प्रियंका छाबड़ी, और सचिव पद पर अंकित सिंह सांगवान ने जीत हासिल की है। जबकि एनएसयूआई से सहसचिव पद के उम्मीदवार मोहित गरड़ जीते। एक बार फिर से इन चुनावों में जातिगत समीकरण हावी रहे हैं। नतीजों को देखें तो दो जाट व दो गुर्जर ही चुनाव जीत पाए हैं। एबीवीपी ने इस जीत को राष्ट्रवाद की जीत बताया है। साथ ही कैंपस में अपनी मौजूदगी को भी जीत की वजह माना है।
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डूसू चुनाव में इस साल चारों पदों पर कुल 17 उम्मीदवार मैदान में थे। चुनाव के लिए शुक्रवार को सभी कॉलेजों और विभागों में मतदान किया गया। सुबह व शाम की पाली के कॉलेजों में काफी कम वोटिंग हुई। बीते चार सालों में सबसे कम वोटिंग होकर वोटिंग प्रतिशत 36.9 फीसदी पर सिमट कर रह गया।
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जिसके कारण पिछले साल के मुकाबले इस साल मतदान 6.4 फीसदी कम हुआ। डूसू चुनावों में पहली बार शामिल किए गए नोटा बटन को भी छात्रों ने खूब दबाया है। कुल 17,712 छात्रों को कोई उम्मीदवार पंसद नहीं आया इस कारण से उन्होंने नोटा का इस्तेमाल किया।
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पुलिस लाइन में मतगणना केन्द्र पर हुई वोटिंग के लिए केन्द्र के चारों तरफ बैरिकेटिंग की गई और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। मतगणना सुबह आठ बजे शुरू हुई थी। मतगणना के लिए सिर्फ उम्मीदवारों को ही केंद्र में प्रवेश दिया गया। लगभग 11.15 बजे चुनाव परिणाम घोषित किया गया। परिणाम घोषित होते ही मतगणना केंद्र पर ही एबीवीपी व एनएसयूआई समर्थकों का जश्न शुरू हो गया।