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शनि अमावस्या 2019: बन रहा दुर्लभ संयोग, इन उपायों से शनिदेव होंगे प्रसन्न, बनेंगे सारे बिगड़े काम

Sat, 05 Jan 2019 10:24 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 05 Jan 2019 10:24 AM IST
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Shani Amavasya 2019 Rare Coincidance Do This For Fortune
shani dev

आज शनिश्चरि अमावस्या पड़ रही है। हिंदू कैलेंडर में अमावस्या एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन चंद्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि इसे चंद्रमा दिवस या नया चंद्रमा दिवस भी कहा जाता है। इसे अमावसी भी कहा जाता है। यह हर महीने होता है। साल में 12 अमावस्या होती हैं। आज (शनिवार) से शुक्ल पक्ष की शुरुआत या चंद्र महीने में उज्ज्वल पखवाड़े की शुरुआत हो रही है। 

Shani Amavasya 2019 Rare Coincidance Do This For Fortune
astrology - फोटो : astrology

इस बार अमावस्या पर संयोग ही है कि सायंकाल 3.08 बजे तक गंडमूल बने रहेंगे। उसके बाद पैदा होने वाले बच्चे गंडमूल से मुक्त हो जाएंगे। शनिश्चरि अमावस्या पितृ कर्म की दृष्टि से व्यापक महत्व है। ज्योतिष के अनुसार मूल नक्षत्र का पड़ना शिशु दोष को जन्म देता है। 

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डेमो - फोटो : डेमो

जो बच्चे गंडमूल में पैदा होते हैं, उनके नामकरण से पूर्व मूल के अनेक संस्कार कराने पड़ते हैं। गंडमूल दोपहर बाद संपन्न हो जाएंगे। हिंदू संस्कृति और हिंदू धर्म में अमावस्या का बहुत महत्व होता है। यह महीने का सबसे अंधेरे वाले रात होती है। इस रात को वर्ष की सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली रात भी मानी जाती है। 

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ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य

मान्यताओं के अनुसार शनि अमावस्या के दिन शनिदेव का विधिवत पूजन करने से अवश्य लाभ मिलता है। ज्योतिषाचार्य गौरव आर्य ने बताया कि इस दिन जौ, चावल, काले तिल, खीर और नींबू को एक पत्तल पर रखकर दोपहर में पीपल के वृक्ष के नीचे रखकर पितृ दोष को समाप्त किया जा सकता है। 

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dana

शनि अमावस्या के दिन शनि को प्रसन्न करने के लिए उड़द, तेल, तिल, कुलथी, भैंस, लोहा, दक्षिणा और श्याम वस्त्र दान करें। शाम के समय पीपल वृक्ष के चारों ओर सात बार कच्चा सूत लपेटें। पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ज्ञात-अज्ञात अपराधों के लिए क्षमा मांगें। 

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