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B'Day Special: मियांदाद के साथ विवाद से किरण मोरे हुए दुनियाभर में लोकप्रिय

Sun, 04 Sep 2016 03:56 PM IST
Updated Sun, 04 Sep 2016 03:56 PM IST
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Kiran More: clash with Miyandad gave stardom
किरण मोरे - फोटो : getty
सैयद किरवानी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद किरण मोरे भारतीय क्रिकेट टीम का अभिन्न हिस्सा बने। मोरे को पहली बार टेस्ट टीम में साल 1982-83 में जगह मिली थी। उस वक्त किरवानी के घायल होने के कारण उन्हें वेस्टइंडीज जाने का मौका मिला था, लेकिन उस दौरे में वह एक भी मैच नहीं खेल पाए थे। 


इसके बाद मोरे को साल 1986 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित वर्ल्ड सुपर सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया गई भारतीय टीम को शामिल किया गया, इसी दौरे पर चोट लगने के कारण सैयद किरवानी का अंतरराष्ट्रीय करियर अचानक समाप्त हो गया और मोरे को भारतीय टीम में जगह मिल गई। इसके बाद साल 1993 तक मोरे भारतीय टेस्ट टीम का अभिन्न अंग बने रहे।


 
Kiran More: clash with Miyandad gave stardom
किरण मोरे - फोटो : getty
मोरे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 49 टेस्ट और 94 वन-डे मैच खेले। टेस्ट मैचों में मोरे ने 25.7 की औसत से 1285 रन और वन-डे में 13 की औसत से 563 रन बनाए। विकेटकीपिंग के दौरान मोरे ने टेस्ट में 110 कैच और 20 स्टंपिग के साथ विकेट के पीछे 130 शिकार किए। वहीं वन-डे में उन्होंने 63 कैच और 27 स्टंपिग के साथ कुल 90 शिकार किए। वह टेस्ट में विकेट कीपर के रूप में उस दौर में पहली पसंद थे, लेकिन वन-डे में कई खिलाड़ी बेहतर बल्लेबाजी के कारण उनकी जगह झपट लिया करते थे।
Kiran More: clash with Miyandad gave stardom
ग्राह्म गूच - फोटो : getty
मोरे को साल 1989-90 में न्यूजीलैंड दौरे में भारतीय टीम का उपकप्तान बनाया गया था, लेकिन इंग्लैंड दौरे के लिए उनकी जगह रवि शास्त्री को उपकप्तान बना दिया गया। उसी दौरे के लॉर्ड्स टेस्ट में मोरे ने इंग्लैंड के कप्तान ग्राह्म गूच का कैच छोड़ दिया था। इसके बाद गूच ने तिहरा शतक जड़ दिया और 333 रन बनाए। इस कारण मोरे की बहुत आलोचना हुई थी।


 
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Kiran More: clash with Miyandad gave stardom
किरण मोरे - फोटो : file photo
मोरे के क्रिकेट करियर की सबसे प्रमुख घटना 1992 के क्रिकेट विश्व कप में पाकिस्तानी खिलाड़ी जावेद मियांदाद के साथ उनकी भिडंत है। इस घटना में सिडनी में हुए मैच में मियांदाद ने मिड ऑफ पर शॉट लगाया। वापसी के थ्रो पर मोरे ने बेल्स उड़ायी, तो मियांदाद आपा खो बैठे और फ्रॉग जंप लगाकर दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को चकित कर दिया, लेकिन इसके बाद बारी मोरे की थी, जैसे ही मियांदाद आउट हुए, तो मोरे ने मियांदाद को उनके ही अंदाज में उछलकर जवाब दिया था। इस घटना ने उन्हें दुनियाभर में पहचान और भारत में स्टार का रुतबा दिलाया। आज भी भारत-पाक क्रिकेट की यह सबसे रोचक घटना है। 
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किरण मोरे - फोटो : getty
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद मोरे ने क्रिकेट प्रशासन की ओर रुख किया। साल 2002 से 2006 के बीच भारत के मुख्य चयनकर्ता रहे थे। यह दौर सौरव गांगुली की कप्तानी का था, जिसमें भारतीय टीम ने सफलता की नई ऊंचाईयों को छुआ। लेकिन ग्रेग चैपल को इसी दौर में कोच भी नियुक्त किया गया जो कि बाद में विवादास्पद भी रहा।

 
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