देशभर में दीपावली धूमधाम से मनाई जा रही है। दिवाली और क्रिकेट का साथ भी पुराना है। बीते कई दिवाली के दौरान या दिवाली के दिन ही भारतीय क्रिकेट टीम विपक्षियों से लोहा लेती आई है, लेकिन अब ऐसा नहीं होता। बीसीसीआई और उसके आधिकारिक प्रसारणकर्ता स्टार स्पोर्ट्स का मानना है कि इस दौरान अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं।
आज साल 2020 की दिवाली पर भारतीय टीम के एक ऐसे ही यादगार मैच की बात करते हैं जब कपिल देव के लड़ाकों ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर देशवासियों को दीपावली का तोहफा दिया था। 1987 वर्ल्डकप में 15वां मैच भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दिवाली वाले दिन खेला गया। इतिहास के पन्नों को खंगालने पर पाएंगे कि पहले तीनों विश्व कप इंग्लैंड में खेले गए। इस संस्करण को रिलायंस विश्व कप का नाम दिया गया।
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1987 वर्ल्ड कप
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दिल्ली के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम में टॉस गंवाकर भारत ने पहले खेलते हुए छह विकेट के नुकसान पर 289 रन बनाए। कप्तान कपिल देव और रवि शास्त्री को छोड़कर सभी बल्लेबाजों ने अच्छा स्कोर किया। सलामी बल्लेबाज श्रीकांत और सुनील गावस्कर ने क्रमश: 26 और 61 रन बनाए। तीसरे क्रम पर आए नवजोत सिद्धू (51), चौथे नंबर के दिलीप वेंगसरकर (63) और मोहम्मद अजहरुद्दीन (54 नाबाद) ने अर्धशतकीय पारी खेली।
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सांकेतिक तस्वीर
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कंगारुओं के लिए यह लक्ष्य आसान था, लेकिन इसे मुश्किल बना दिया अजहर ने। बल्लेबाजी से दम दिखाने के बाद अजहर ने अपनी जादुई गेंदबाजी से मैच पलट दिया। शानदार शुरुआत के बावजूद ऑस्ट्रेलिया को हार मिली। लगातार अंतराल पर भारतीय गेंदबाज विकेट निकालते गए। मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 3.5 ओवर में 19 रन देकर तीन विकेट तो मनिंदर सिंह ने 10 ओवर में 34 रन खर्च कर इतने ही बल्लेबाजों को निपटाया।
इस शानदार जीत के जश्न में पूरा देश डूबा हुआ था। आसमां आतिशबाजी से रंगीन हो उठा, लेकिन 56 रन की इस जीत के बावजूद गतविजेता भारत अपना टाइटल नहीं बचा सका। भारत ने सेमीफाइनल में जरूर जगह बनाई और उसका सामना इंग्लैंड से हुआ। सेमीफाइनल में हारकर उसका वर्ल्ड कप 1987 का सफर खत्म हुआ। बाद में यह खिताब फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराकर जीता और दुनिया को नया चैंपियन मिला।