आखिरकार टीम इंडिया के पूर्व डायरेक्टर रवि शास्त्री भारतीय क्रिकेट टीम के कोच पद की दौड़ में एक बार फिर कूद गए हैं। पिछली बार शास्त्री इस दौड़ में अनिल कुंबले से पिछड़ गए थे। लेकिन इस बार वह अन्य आवेदकों की तुलना में कोच बनने के सबसे बड़े दावेदार दिख रहे हैं। कोच बनने के लिए उनकी टक्कर मुख्य रूप से टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग और आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के कोच टॉम मू़डी से है। ऐसे में सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएल लक्ष्मण की सदस्यता वाली बीसीसीआई की क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी के लिए लगातार दूसरी बार शास्त्री के कोच बनने के दावे को खारिज करना आसान नहीं होगा। इसके लिए उन्हें कोई पुख्ता कारण बताना होगा। ऐसे भी माना जाता है कि शास्त्री और गांगुली के बीच संबंध अच्छे नहीं हैं। बावजूद इसके उनकी दावेदारी इन पांच वजहों से सबसे मजबूत मानी जा रही है।
विराट को पसंद है शास्त्री का साथ, जानिए कैसे पिछड़ रहें है वीरेंद्र सहवाग
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विराट को पसंद है शास्त्री का साथ, जानिए कैसे पिछड़ रहें है वीरेंद्र सहवाग
शास्त्री हैं विराट की पहली पसंद
रवि शास्त्री कप्तान विराट कोहली की कोच के रूप में पहली पसंद हैं। विराट चैंपियंस ट्रॉफी के पहले से ही शास्त्री को कोच बनाने की पैरवी कर रहे हैं। चैंपियंस ट्रॉफी से पहले यह खबर आई थी कि टीम के लंदन रवाना होने से पहले विराट ने सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण से टीम इंडिया का कोच बनाने की पैरवी की थी। हालांकि तब तक शास्त्री ने कोच पद के लिए आवेदन दाखिल नहीं किया था। हालांकि बाद में ऐसा लगा कि विराट की जिद के आगे बीसीसीआई झुक गया और उसने आवेदन की तारीख बढ़ा दी जिससे कि शास्त्री अपना दावा पेश कर सकें। लेकिन यह भी माना जा रहा है कि सौरव गांगुली के साथ उनके संबंध अच्छे नहीं हैं। पिछली बार उन्हें कोच न चुने जाने के बाद उन्होंने एक इंटरव्यू में गांगुली को जिम्मेदार ठहराया था।
विराट को पसंद है शास्त्री का साथ, जानिए कैसे पिछड़ रहें है वीरेंद्र सहवाग
2015 विश्वकप के सेमीफाइनल में हार के बाद डंकन फ्लेचर ने कोच पद से इस्तीफा दे दिया था। उस दौरान शास्त्री टीम इंडिया के डायरेक्टर थे। फ्लेचर के जाने के बाद सारी जिम्मेदारी शास्त्री के कंधों पर आ गई थी। उनके डायरेक्टर रहते टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया और 2016 टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल तक पहुंची थी।
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शास्त्री के साथ सबसे बड़ा एडवांटेज यह है कि वह टीम इंडिया के सेटअप से भली-भांति परिचित हैं। 2015 विश्वकप से लेकर अबतक टीम में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में उनका टीम के खिलाड़ियों के साथ सेटल होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। ऐसे भी विश्वकप के लिए 2 साल से भी कम का समय बचा है। नए कोच का कार्यकाल 2 साल का होगा जो विश्वकप के बाद समाप्त होगा। ऐसे में शास्त्री का कोच बनना टीम के लिए फायदेमंद होगा।
विराट को पसंद है शास्त्री का साथ, जानिए कैसे पिछड़ रहें है वीरेंद्र सहवाग
शास्त्री टीम इंडिया का डायरेक्टर रहने से पहले बतौर कॉमेंन्ट्रेटर भी टीम के साथ ट्रैवल करते रहे हैं। वो टीम के प्रदर्शन पर बारीक नजर रखते हैं। ऐसे में उन्हें टीम के अधिकांश खिलाड़ियों की कमजोरियों और मजूबत पक्ष के बारे में अच्छी जानकारी है। खिलाड़ियों के कमजोर पहलुओं पर काम करने में उन्हें ज्यादा समय नहीं लगेगा। ऐसे में वह टीम के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होंगे।