{"_id":"5a436e604f1c1b0d788b5406","slug":"malayalam-writer-g-sankara-kurup-better-known-as-mahakavi-g","type":"story","status":"publish","title_hn":"'ज्ञान के विस्तार से ही कल्पना और अनुभूति का विस्तार होता है'","category":{"title":"Literature","title_hn":"साहित्य","slug":"literature"}}
'ज्ञान के विस्तार से ही कल्पना और अनुभूति का विस्तार होता है'
जी शंकर कुरुप, मलयाली कवि
Updated Wed, 27 Dec 2017 03:26 PM IST
विज्ञापन
जी शंकर कुरुप
ब्रह्मांड की तुलना में मनुष्य नवजात प्राणी है। यह शायद इसलिए कि वह प्रकृति की सबसे कम उम्र की संतान है, जिसके पास आश्चर्य की एक भावना है, जो उसके जीवन में व्याप्त बचपन की विशेषता है। रूप, ध्वनि, स्वाद, गंध और स्पर्श-सभी उसकी भावनाओं को उत्तेजित करते हैं। दिल और आत्मा की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मनुष्यों के पास प्रेरणादायक व रोमांचक कहानियां हैं। किस्सागोई की यह क्षमता कभी मंद नहीं पड़ी है।
विज्ञापन
बाहरी ब्रह्मांड को इंद्रियों के माध्यम से जाना जाता है, जो आश्चर्य और जिज्ञासा की भावना जगाता है। मेरी समझ से कल्पना और अनुभूति के क्षितिज का भी विस्तार तभी होता है, जब ज्ञान का विस्तार होता है। आश्चर्य की भावना असीम रूप से बढ़ती है। मुझे बरसात के मौसम में बचपन के कुछ अनुभव अब भी सहज रूप से याद हैं। बिजली जब चमकती थी, तो उसका प्रकाश बादल के एक टुकड़े से दूसरे टुकड़े की तरफ निकल जाता था।
विज्ञापन
अपने घर के बरामदे से बिजली को चमकते हुए देखकर मैं खुशी में खूब नाचता था, अगर वहां आसपास कोई नहीं होता था तो। आज मैं जानता हूं कि बिजली क्या चीज है। हालांकि अब वह हमारे घर की एक सदस्य बन गई है, लेकिन उसके बारे में मेरी हैरानी और बढ़ी ही है। इसी तरह की हैरानी मुझे मनुष्यों की क्षमता को लेकर होती है, जिसने इस आसमानी अप्सरा पर विजय प्राप्त कर उसे धरती पर उतारा। वास्तव में वैज्ञानिक ज्ञान काव्यात्मक कल्पना के पंख को सच की ताकत प्रदान करता है, जिससे कविता एक नई ताकत हासिल करती है।
विज्ञापन
-ज्ञानपीठ से सम्मानित मलयालम कवि