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यूपीजीएमईई काउंसलिंगः डॉक्टरों की जिद ने अब तक ले ली दस और मरीजों की जान

Wed, 01 Jun 2016 03:32 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Wed, 01 Jun 2016 03:32 PM IST
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doctors strike against uppgmee re-counselling
यूपीपीजीएमईई काउंसलिंग - फोटो : amar ujala
 यूपीपीजीएमईई-2016 काउंसलिंग तो खत्म हो गई, लेकिन उसका असर केजीएमयू पर मंगलवार को रहा। चिकित्सा छात्रों के समर्थन में रेजीडेंट डॉक्टर भी आए गए और उन्होंने इमरजेंसी व ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर दिया। ओपीडी और मरीजों की भर्ती बंद करने का प्रयास किया गया। 

 
doctors strike against uppgmee re-counselling
यूपीपीजीएमईई काउंसलिंग - फोटो : amar ujala

हालांकि कुलपति प्रो. रविकांत और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के सक्रिय होते ही, सेवाएं फिर से शुरू हुईं जरूर, लेकिन हड़ताल की सूचना के चलते 25 फीसदी मरीज भी इलाज के लिए नहीं पहुंचे। इस बीच चार और मरीजों ने दम तोड़ दिया। 

doctors strike against uppgmee re-counselling
यूपीपीजीएमईई काउंसलिंग - फोटो : amar ujala

बता दें हड़ताल के चलते छह मरीज इलाज न मिलने के कारण पहले ही दम तोड़ चुके हैं। चिकित्सा छात्रों और रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से निपटने का केजीएमयू का दावा फेल हो गया। सोमवार से ही बाधित सेवाओं को ढर्रे पर लाने की कोशिशें केजीएमयू प्रशासन ने की, लेकिन मरीजों को राहत नहीं मिली। 

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यूपीपीजीएमईई काउंसलिंग - फोटो : amar ujala

सही देखभाल न होने से सड़क दुर्घटना में घायल गोंडा निवासी तंजीम अहमद (22) की मौत हो गई। परिवारीजन उसे लेकर सोमवार रात दो बजे ट्रॉमा सेंटर आए थे। कैजुअलिटी में मौजूद लोगों ने डॉक्टरों की हड़ताल बताकर उसे वापस जाने की सलाह दी। 

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यूपीपीजीएमईई काउंसलिंग - फोटो : amar ujala

परिवारीजनों ने उनसे इलाज की गुहार लगाई लेकिन एक घंटे बाद तंजीम की मौत हो गई। इसी तरह शाहजहांपुर निवासी राजेश्वर (40), बहराइच निवासी जोधे (25) की सिर की चोट के कारण मौत हो गई। इसी तरह बिहार से आई नेहा की भी बिना इलाज के मौत हो गई। हालत ये थी कि केजीएमयू में रोजाना 4 से 5 हजार की ओपीडी और 300 से अधिक मरीजों से खचाखचा भरे रहने वाले ट्रॉमा सेंटर में मरीज ही नहीं पहुंचे।

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