यूपीजीएमईई काउंसलिंगः डॉक्टरों की जिद ने अब तक ले ली दस और मरीजों की जान
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हालांकि कुलपति प्रो. रविकांत और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के सक्रिय होते ही, सेवाएं फिर से शुरू हुईं जरूर, लेकिन हड़ताल की सूचना के चलते 25 फीसदी मरीज भी इलाज के लिए नहीं पहुंचे। इस बीच चार और मरीजों ने दम तोड़ दिया।
बता दें हड़ताल के चलते छह मरीज इलाज न मिलने के कारण पहले ही दम तोड़ चुके हैं। चिकित्सा छात्रों और रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल से निपटने का केजीएमयू का दावा फेल हो गया। सोमवार से ही बाधित सेवाओं को ढर्रे पर लाने की कोशिशें केजीएमयू प्रशासन ने की, लेकिन मरीजों को राहत नहीं मिली।
सही देखभाल न होने से सड़क दुर्घटना में घायल गोंडा निवासी तंजीम अहमद (22) की मौत हो गई। परिवारीजन उसे लेकर सोमवार रात दो बजे ट्रॉमा सेंटर आए थे। कैजुअलिटी में मौजूद लोगों ने डॉक्टरों की हड़ताल बताकर उसे वापस जाने की सलाह दी।
परिवारीजनों ने उनसे इलाज की गुहार लगाई लेकिन एक घंटे बाद तंजीम की मौत हो गई। इसी तरह शाहजहांपुर निवासी राजेश्वर (40), बहराइच निवासी जोधे (25) की सिर की चोट के कारण मौत हो गई। इसी तरह बिहार से आई नेहा की भी बिना इलाज के मौत हो गई। हालत ये थी कि केजीएमयू में रोजाना 4 से 5 हजार की ओपीडी और 300 से अधिक मरीजों से खचाखचा भरे रहने वाले ट्रॉमा सेंटर में मरीज ही नहीं पहुंचे।