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अनोखा बच्चाः इसे ऐसी बीमारी, शरीर को जो देखता, बस देखता ही रह जाता
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 30 Nov 2017 05:14 PM IST
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osteoporosis patient
देश में एक ऐसा दुर्लभ केस सामने आया है, देखकर डॉक्टर्स भी हैरान हैं। एक ऐसा बच्चा मिला है, जिसे ऐसी बीमारी कि इसके शरीर को जो देखता है, बस देखता ही रह जाता।
हड्डियों की दर्द
पीजीआई चंडीगढ़ में आस्टियोपोरोसिस का एक दुर्लभ केस सामने आया है। चंडीगढ़ का रहने वाला एक 15 वर्षीय किशोर आस्टियोपोरोसिस से पीड़ित है। उसका इलाज पीजीआई में चल रहा है। डाक्टरों का दावा है कि 45 साल से कम उम्र के लोगों में आस्टियोपोरोसिस की बीमारी बहुत दुर्लभ होती है। इस उम्र के पूरे देश में तीन से चार केस होंगे। हालांकि इसके कारणों का तो पता नहीं चल पाया है। मगर इलाज से बच्चे में काफी सुधार है।
हड्डियों की दर्द
इस केस को पीजीआई की डा. अभिलाषा गर्ग आस्टियोपोरोसिस की कांफ्रेंस में प्रस्तुत करेंगी। वहीं केस के बारे में डा. अभिलाषा ने बताया कि साल 2012 में जब बलजिंदर 12 साल का था तो उसके बाजू में फ्रैक्चर हो गया। अगले ही साल हाथ में। उसके बाद उसके बैक में दर्द शुरू हो गया। परिजन उसे आरथोपीडिक्स डिपार्टमेंट में लेकर आए। कई जांच के बाद उसे पीजीआई के इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट में रेफर कर दिया गया।
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doctor
डिपार्टमेंट में भी कई जांच हुई तो पता चला कि उसे आस्टियोपोरोसिस है। साल 2015 तक कैल्शियम, विटामिन डी और बिस्फास्पोमेट की दवा चली। हालांकि इसके साइड इफेक्ट भी थे। बाद में उन्हें ग्रोथ हार्मोन की थैरेपी दी गई। इससे काफी बदलाव है। अभी इलाज में लंबा वक्त लगेगा। डाक्टरों के मुताबिक, आस्टियोपोरोसिस से पीड़ित होने के बाद बलजिंदर दूसरों बच्चों के साथ खेल नहीं पाता था। स्कूल बैग उठाने में असमर्थ रहता था।
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Doctor
- फोटो : डेमो
बलजिंदर स्कूल में होने वाली प्रार्थना के वक्त वह ज्यादा देर तक खड़ा नहीं हो पाता था। भीड़भाड़ वाली जगहों में जाने में उसे मुश्किल होती थी। जब वह सिर धोता था तो इससे भी उसके सिर पर दर्द होता था। उसे एक बार नहीं, बल्कि कई बार फ्रैक्चर हुआ। इंडोक्राइनोलाजी डिपार्टमेंट के एचओडी डा. अनिल भंसाली ने बताया कि बच्चों में आस्टियोपोरोसिस के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इन बच्चों की फैमिली हिस्ट्री भी नहीं मिली है।