अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए हम निवेश का कोई न कोई विकल्प खोजते रहते हैं। सरकारी योजनाओं से लेकर बैंकों की स्कीम तक, आज हमारे पास निवेश के कई विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में हम आज आपको सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) के बीच में अंतर बताने जा रहे हैं ताकि आप अपने पैसे सही जगह निवेश कर सकें।
एसआईपी से लोगों को होता है मुनाफा
पिछले कुछ सालों से लोगों की सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान में निवेश करने की रुचि काफी बढ़ी है। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों को इससे मोटा मुनाफा होता है। एसआईपी के माध्यम से आपके लिए अपनी जरूरतें पूरी करना आसान हो जाएगा और आपका भविष्य संवर जाएगा। दरअसल एसआईपी निर्धारित दिन आपकी पसंदीदा म्यूचुअल फंड स्कीम में पहले से तय राशि आपके बैंक खाते से लेकर निवेश कर देता है।
म्यूचुअल फंड में निवेश जारी रखता है एसआईपी
भले ही शेयर बाजार में तेजी हो या मंदी, एसआईपी म्यूचुअल फंड में निवेश जारी रखता है। एसआईपी में निवेश करने का लाभ यह होता है कि इसमें आपका पैसा अगल-अलग सेक्टर की तमाम कंपनियों में निवेश किया जाता है, जिससे आपको काफी मुनाफा होता है। बता दें कि एसआईपी सेबी और एएमएफआई द्वारा बनाए गए नियमों के तहत काम करता है।
सुनिश्चित रिटर्न की चाह रखने वालों के लिए RD बेहतर
वहीं जो निवेशक सुनिश्चित रिटर्न चाहते हैं और बिल्कुल भी जोखिम नहीं ले सकते हैं, उनके लिए आरडी एक अच्छा विकल्प है। इसमें एक साल के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निवेश किया जा सकता है। आरडी एक फिक्स्ड डिपॉजिट और डेट श्रेणी का निवेश है, जहां आपको हर महीने एक निश्चित रकम जमा करनी होती है।
किसी प्रकार का मार्केट रिस्क नहीं
इसके तहत निवेशक को एक निश्चित दर से ब्याज मिलता है। इसकी खीस बात यह है कि आरडी में निवेश से कोई जोखिम नहीं होता है। आरडी में किसी प्रकार का मार्केट रिस्क नहीं होता है। हालांकि आरडी पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगता है। इसे बैंक या डाकघर में खोला जा सकता है और निवेश की न्यूनतम राशि अलग-अलग बैंकों में अलग हो सकती है।