कोरोना काल के दौरान कई लोगों की नौकरी गई है। कई लोगों को अपने प्रोविडेंट फंड (पीएफ) का पैसा भी निकालना पड़ा है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें अपने पीएफ अकाउंट को लेकर खास जानकारी नहीं है, जैसे- पीएफ अकाउंट का बैलेंस चेक करना आदि। पीएफ बैलेंस पता करने के कई तरीके हैं जो कि ईपीएफ की आधिकारिक वेबसाइट पर बताए गए हैं। अगर ग्राहक अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) नंबर भूल गए हैं तो भी चिंता की बात नहीं है। यदि आप भी अपना UAN नंबर भूल गए हैं तो आइए जानते हैं, आप कैसे पीएफ बैलेंस की जानकारी हासिल कर सकते हैं।
काम की खबर: भूल गए हैं UAN नंबर? तो एक मिस्ड कॉल या SMS से चेक करें पीएफ का बैलेंस
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मिस्ड कॉल से पता करें पीएफ बैलेंस-
वैसे तो पीएफ बैलेंस पता करने के कई तरीके हैं जो कि ईपीएफ की आधिकारिक वेबसाइट पर बताए गए हैं लेकिन सबसे आसान तरीका मिस्ड कॉल वाला है। आप सिर्फ एक मिस्ड कॉल करके आप पीएफ बैलेंस जान सकते हैं। इसके लिए आपको अपने पीएफ अकाउंट में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 011-22901406 पर मिस्ड कॉल करना होगा। इसके बाद आपके पास एक मैसेज आएगा जिसमें आपको अपने अकाउंट में मौजूद पीएफ के पैसे की जानकारी मिल जाएगी।
आप SMS से भी पीएफ बैलेंस जान सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे-
इसके अलावा आप एक मैसेज करके भी पीएफ बैलेंस जान सकते हैं। हालांकि इन दोनों सेवाओं के लिए आपका यूएएन (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) एक्टिव होना चाहिए। यदि आप एसएमएस के जरिए पीएफ बैलेंस जानना चाहते हैं तो EPFOHO UAN टाइप करके 7738299899 पर भेज दें। इस सेवा का लाभ आप हिन्दी, अंग्रेजी, पंजाबी समेत 10 भाषाओं में उठा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि आप हिन्दी में आप बैलेंस जानना चाहते हैं तो EPFOHO UAN HIN टाइप करके 7738299899 पर मैसेज कर दें।
अलग-अलग भाषाओं के लिए अलग-अलग कोड हैं जो निम्नलिखित हैं-
2. हिंदी- HIN
3.पंजाबी - PUN
4. गुजराती - GUJ
5. मराठी - MAR
6. कन्नड़ - KAN
7. तेलुगु - TEL
8. तमिल - TAM
9. मलयालम - MAL
10. बंगाली - BEN
भविष्य निधि बैलेंस को चार अलग-अलग तरीकों से पता किया जा सकता है। ईपीएफओ पोर्टल पर, उमंग एप से, मिस्ड कॉल से और एसएमएस सेवा के माध्यम से। मालूम हो कि श्रम मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि पर 2020-21 के लिए 8.5 फीसदी ब्याज देने का फैसला किया है।
किस साल कितना मिला ब्याज?
2013-14 8.75 फीसदी
2014-15 8.75 फीसदी
2015-16 8.80 फीसदी
2016-17 8.65 फीसदी
2017-18 8.55 फीसदी
2018-19 8.65 फीसदी
2019-20 8.50 फीसदी