अगर आप नौकरीपेशा हैं तो आपको मिलने वाली सैलरी में कई ऐसे विकल्प (भत्ते) शामिल होते हैं, जो टैक्स बोझ घटाने में मददगार होते हैं। इनमें कुछ विकल्पों पर पूरा टैक्स देना होता है, जबकि 10 ऐसे विकल्प हैं जो टैक्स छूट के दायरे में आते हैं। बैंक बाजार से मिली जानकारी के अनुसार, सही सैलरी स्ट्रक्चर वही है, जो खर्चे पूरे करने के साथ कुछ पैसे भी छोड़े। ऐसे में हर नौकरीपेशा को ध्यान देना चाहिए कि वह कंपनी से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उठा रहा है या नहीं।
- ईपीएफ : कर्मचारी प्रोविडेंट फंड
कर्मचारी की बेसिक सैलरी एवं भत्ते का 12% ईपीएफ में निवेश होता है। इतनी ही राशि कंपनी भी निवेश करती है। कर्मी के हिस्से के योगदान पर छूट मिलती है, जो 1.5 लाख तक है।
2- एलटीए : लीव ट्रैवेल अलाउंस
कर्मचारी देश में कहीं भी परिवार संग घूम सके, इसलिए कंपनियां लीव ट्रैवेल भत्ता देती हैं, जिस पर छूट मिलती है। ट्रेन, हवाई जहाज, पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर पर छूट मिलती है। 4 कैलेंडर वर्ष में दो बार सफर पर ही यह लाभ मिलता है।
3- एचआरए : हाउस रेंट अलाउंस
वेतन का यह हिस्सा कर्मचारी को मकान किराया भुगतान पर मिलता है। इस पर छूट के लिए जरूरी है कि यह कर्मचारी के वेतन का हिस्सा हो।
4- कार मेंटेनेंस अलाउंस
कार खर्च पर री-इंबर्समेंट क्लेम। ऑफिस के कुछ खास काम व कई निजी काम के लिए छूट।