{"_id":"5acb08014f1c1b5b6b8b47f1","slug":"the-doges-are-millionaires-in-this-village-at-gujarat","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"इन कुत्तों ने बॉलीवुड स्टार्स को भी छोड़ा पीछे, करोड़ों की संपत्ति के साथ जी रहे हैं आलीशान जिंदगी","category":{"title":"World of Wonders","title_hn":"ऐसा भी होता है","slug":"world-of-wonders"}}
इन कुत्तों ने बॉलीवुड स्टार्स को भी छोड़ा पीछे, करोड़ों की संपत्ति के साथ जी रहे हैं आलीशान जिंदगी
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 10 Apr 2018 09:22 AM IST
विज्ञापन
dogs
आपने बॉलीवुड फिल्म 'एंटरटेंमेंट' तो देखी ही होगी, जिसमें एक कुत्ता करोड़पति बन जाता है। यह तो हुई फिल्मी पर्दे की बात लेकिन अगर हम कहे असल जिंदगी में भी एक गांव ऐसा है जहां का हर एक कुत्ता करोड़पति है तो शायद आपको विश्वास नहीं होगा। चलिए बताते हैं इस गांव की सच्ची कहानी...
gujrat dogs village
आप सोच रहे होंगे कि दुनिया कितनी बदल रही है। इंसानों को छोड़कर जानवर करोड़पति बन रहे हैं। जी हां, यह कमाल हुआ है गुजरात के मेहसाणा में लेकिन उससे भी बड़ा कमाल यह हुआ कि 'एंटरटेंमेंट' नामक फिल्म में सिर्फ एक कुत्ता करोड़पति बनता है लेकिन यहां तो 70 कुत्ते हैं।
dogs
टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के करीब मेहसाणा के समीप पंचोट गांव 'करोड़पति कुत्तों के गांव' के नाम से फेमस है। यहां बाइपास से सटे 'मढ़ नी पती कुतरिया ट्रस्ट' के चर्चे दुनियाभर में हो रहे हैं। यही इन 70 करोड़पति कुत्तों का बसेरा है।बता दें इस ट्रस्ट के पास 21 बीघा जमीन है। जमीन की कीमत लगभग 3.5 करोड़ रुपए प्रति बीघा है। अब लगाइये हिसाब, हुआ न हर कुत्ता करोड़पति..?
विज्ञापन
विज्ञापन
dogs
इस लिहाज से यहां का लगभग हर कुत्ता 1 करोड़ रुपए का मालिक है। ट्रस्ट को छगनभाई पटेल नामक शख्स चलाते हैं। वह इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। छगनभाई इन कुत्तों की देखभाल करते हैं। इस परंपरा की शुरुआत अमीरों ने जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों को दान देकर की थी। जो आज तक चली आ रही है। यह जीवदया को दर्शाती है।
विज्ञापन
trust sevak
दरअसल, उन दिनों जमीन की कीमत ज्यादा नहीं हुआ करती थी। कुछ मामलों में लोगों ने टैक्स न चुका पाने की स्थिति में अपनी जमीनें ही दान कर दी। पटेल किसानों के एक समूह ने 70-80 साल पहले इस जमीन का रख-रखाव करना शुरू किया था। 70 साल पहले जमीन ट्रस्ट के पास गई लेकिन आज भी कागजों में उनके मालिकों का ही नाम दर्ज है।