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84 हजार में बिक रहा एक बोतल दूध, महंगाई में भारत का 'गुरु' है ये देश
amarujala.com, Presented by: राजेश सैनी
Updated Sat, 25 Nov 2017 09:32 AM IST
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बॉलीवुड की चर्चित फिल्म 'पीपली लाइव' अगर आपने देखी है तो आपको वो गाना जरूर याद होगा जो सीधा आपकी जिंदगी से जुड़ा है। गाने के बोल हैं 'महंगाई डायन खाए जात है।'
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इस गाने में महंगाई के विकराल रूप को 'डायन' बताया गया है। लेकिन क्या आप इसकी कल्पना भी कर सकते हैं कि महंगाई का कितना विकराल रूप हो सकता है ? जो हम आपको इस खबर के माध्यम से आप ऐसा नहीं कर पा रहे तो चलिए इस खबर के माध्यम से आपको महंगाई के विकराल रूप से रूबरू कराते हैं। ये मामला है वेनेजुएला का... जहां एक बोतल दूध के लिए लोग 84 हजार का भुगतान कर रहे हैं। सुनकर होश उड़ गए न...
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ये कोई अफवाह नहीं बल्कि हकीकत है। जी हां... यहां महंगाई का आलम ऐसा है कि लोग 'त्राहिमाम-त्राहिमाम' पुकार रहे हैं। इस महंगाई का सामना कर पाने में लोगों को रुलाई आ रही है। यहां के लोग जब कभी महीने की राशन लेने दुकान पर जाते हैं, तो नोटों को बोरे में भरकर ले जाते हैं। गरीब तबके के लोगों के लिए तो यहां एक वक्त के खाने का बंदोबस्त तक कर पाना मुश्किल हो गया है। हालात बद से बद्तर होते जा रहे हैं।
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अब जानिए वहां क्यों आई इतनी महंगाई
दरअसल, वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। यहां केंद्रीय बैंक के पास महज 10 अरब डॉलर बचे हैं बकी धन कर्ज चुकाने में खर्च हो गया है। जबकि अभी पूरा कर्ज चुक्ता नहीं हो पाया है। अर्थवयवस्था संकट में पड़ने के कारण यहां की मुद्रा 'बॉलिवर' की वैल्यू बहुत ज्यादा घट गई है। यहां एक डॉलर की वैल्यू 84000 बॉलिवर हो गई है। फिलहाल, इस देश को रूस, चीन और जापान का कर्ज भी चुकाना है।
दरअसल, वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। यहां केंद्रीय बैंक के पास महज 10 अरब डॉलर बचे हैं बकी धन कर्ज चुकाने में खर्च हो गया है। जबकि अभी पूरा कर्ज चुक्ता नहीं हो पाया है। अर्थवयवस्था संकट में पड़ने के कारण यहां की मुद्रा 'बॉलिवर' की वैल्यू बहुत ज्यादा घट गई है। यहां एक डॉलर की वैल्यू 84000 बॉलिवर हो गई है। फिलहाल, इस देश को रूस, चीन और जापान का कर्ज भी चुकाना है।
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सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक यहां के लोगों का अति महंगाई रुला दिया है। दुकानों में रोजमर्रा की चीजें नहीं मिल रही हैं और जहां मिल रही हैं, वहां महीने भर की राशन खरीदने के लिए लाखों बॉलिवर चाहिए। इसका सबसे तगड़ा असर उन लोगों पर पड़ा है, जो गरीब तबके से आते हैं। उन्हें मिलने वाला 2.2 लाख बॉलिवर का न्यूनतम वेतन भी एक महीने की राशन नहीं खरीद पा रहा है। उन्हें एक हफ्ते के लिए राशन खरीदने की खातिर ही 7 लाख 72 हजार से ज्यादा बॉलिवर खर्च करने पड़ रहे हैं।