ऐसी मान्यता है कि जब तक शिव जी के प्रिय वाहन नंदी अनुमति नहीं देते, भोले बाबा के दर्शन नहीं मिलते। यही वजह है कि शिव मंदिर बड़ा हो या छोटा, हर जगह गर्भगृह के बाहर नंदी की प्रतिमा होती ही है। भारत में एक अनोखा मंदिर ऐसा है जहां साल दर साल नंदी की प्रतिमा बढ़ती जा रही है। खुद पुरातत्व विभाग ने इस बात की पुष्टि की है। आलम यह है कि एक-एक कर मंदिर के खंभों को हटाना पड़ रहा है।
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इस शिव मंदिर में धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है नंदी की प्रतिमा, आखिर क्या है रहस्य?
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 22 Aug 2018 04:08 PM IST
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Yaganti Uma Maheswara Temple
Yaganti Uma Maheswara Temple
वैज्ञानिकों ने भी की पुष्टि
जो लोग सालों से यहां दर्शन करने आ रहे हैं, उनका कहना है कि पहले यहां परिक्रमा करना आसान था। अब मूर्ति के विस्तार की वजह से शिव-पार्वती के इस मंंदिर में जगह कम पड़ रही है वैज्ञानिकों का कहना है कि हर 20 साल पर नंदी की मूर्ति एक इंच तक बढ़ती जा रही है। उनका मानना है कि मूर्ति जिस पत्थर से बनी है, उसकी प्रवृति विस्तार वाली है। कहा जाता है कि एक श्राप की वजह से इस मंदिर में कौए नजर नहीं आते।
जो लोग सालों से यहां दर्शन करने आ रहे हैं, उनका कहना है कि पहले यहां परिक्रमा करना आसान था। अब मूर्ति के विस्तार की वजह से शिव-पार्वती के इस मंंदिर में जगह कम पड़ रही है वैज्ञानिकों का कहना है कि हर 20 साल पर नंदी की मूर्ति एक इंच तक बढ़ती जा रही है। उनका मानना है कि मूर्ति जिस पत्थर से बनी है, उसकी प्रवृति विस्तार वाली है। कहा जाता है कि एक श्राप की वजह से इस मंदिर में कौए नजर नहीं आते।
Yaganti Uma Maheswara Temple
क्या है मंदिर की स्थापना की कहानी?
इस शिव मंदिर की स्थापना अगसत्य ऋषि ने की थी। हालांकि, वह यहां भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर बनवाना चाहते थे मगर स्थापना के दौरान मूर्ति का अंगूठा टूट गया। मूर्ति खंडित होने की वजह से मंदिर की स्थापना भी रुक गई। फिर ऋषि ने भगवान शिव की अराधना की जिसके बाद प्रसन्न होकर भोलेनाथ प्रकट हुए और उन्होंने कहा कि चूंकि यह स्थान कैलाश जैसा दिखता है, इसलिए यहां उनका मंदिर बनाना उचित है।
इस शिव मंदिर की स्थापना अगसत्य ऋषि ने की थी। हालांकि, वह यहां भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर बनवाना चाहते थे मगर स्थापना के दौरान मूर्ति का अंगूठा टूट गया। मूर्ति खंडित होने की वजह से मंदिर की स्थापना भी रुक गई। फिर ऋषि ने भगवान शिव की अराधना की जिसके बाद प्रसन्न होकर भोलेनाथ प्रकट हुए और उन्होंने कहा कि चूंकि यह स्थान कैलाश जैसा दिखता है, इसलिए यहां उनका मंदिर बनाना उचित है।
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दाने के लिये जंग
क्यों मंदिर में नहीं दिखते कौए?
ऐसी मान्यता है कि जब अगसत्य ऋषि तप कर रहे थे, तब कौए उन्हें परेशान कर रहे थे। नाराज होकर ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि वे यहां कभी नहीं आ सकेंगे। कौए शनि देव का वाहन है। कहा जाता है कि इस जगह शनि देव का वास नहीं होता।
ऐसी मान्यता है कि जब अगसत्य ऋषि तप कर रहे थे, तब कौए उन्हें परेशान कर रहे थे। नाराज होकर ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि वे यहां कभी नहीं आ सकेंगे। कौए शनि देव का वाहन है। कहा जाता है कि इस जगह शनि देव का वास नहीं होता।
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Yaganti Uma Maheswara Temple
मंदिर के पास दो गुफाएं हैं
उमा-पार्वती का यह अनोखा मंदिर आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में यांगती में स्थित है। वैसे तो इसकी स्थापना अगसत्य ऋषि ने की थी, मगर पूरे परिसर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के दौरान 15वीं शताब्दी में कराया गया। मंदिर के पास दो गुफाएं है। एक में भगवान वेंकटेश्वर की वह मूर्ति है जो स्थापना के दौरान खंडित हो गई थी। वहीं, दूसरी गुफा अगसत्य ऋषि की है जहां उन्होंने तप किया था।
उमा-पार्वती का यह अनोखा मंदिर आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में यांगती में स्थित है। वैसे तो इसकी स्थापना अगसत्य ऋषि ने की थी, मगर पूरे परिसर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के दौरान 15वीं शताब्दी में कराया गया। मंदिर के पास दो गुफाएं है। एक में भगवान वेंकटेश्वर की वह मूर्ति है जो स्थापना के दौरान खंडित हो गई थी। वहीं, दूसरी गुफा अगसत्य ऋषि की है जहां उन्होंने तप किया था।