साल 2013 में केदारनाथ में आई त्रासदी से पूरी दुनिया हील गई थी। कुदरत के इस कहर ने बहुत कुछ तबाह कर दिया था। कई परिवार आज भी उस हादसे का नाम सुनकर रो पड़ते हैं। हादसे के शिकार हुए लोगों के जख्म हरे हो जाते हैं। हजारों लोगों के घर तबाह हो गए थे तो सैकड़ों परिवार बिछड़ गए थे। इस प्रलय ने ट्रैवल एजेंसी में काम करने वाले विजेंद्र सिंह की जिंदगी भी बदल के रख दी।
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- फोटो : amar ujala
2013 में ट्रैवल एजेंट विजेंद्र सिंह अपनी पत्नी के साथ चार धाम यात्रा पर निकले थे। इन दोनों के साथ 30 अन्य दंपत्ति भी उस बस में सवार थे जो उत्तराखंड में दर्शन के लिए पहुंची थी। सबको उम्मीद थी कि भगवान के दर्शन होंगे लेकिन जो हुआ। उसकी किसी को उम्मीद नहीं थी।
16 जून को जब प्रलय ने दस्तक दी तो विजेंद्र अपनी पत्नी के साथ थे। भयानक बाढ़ की वजह से लीला और विजेंद्र भी अलग हो गए थे। दोनों के पास एक दूसरे से संपर्क साधने का कोई जरिया नहीं था। विजेंद्र तो किसी तरह अपने घर पहुंच गए लेकिन लीला लापता हो गईं। विजेंद्र ने अपनी पत्नी को ढूंढने की कोशिश शुरू की।
कई महीनों तक तलाश करने के बाद सबने स्वीकार कर लिया कि लीला परलोक सिधार चुकी हैं। लेकिन विजेंद्र इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं थे कि उनकी पत्नी ने दुनिया को छोड़ दिया है। वह अपनी कोशिश में जुटे रहे। कई दिनों तक लीला के लापता रहने पर सरकार ने भी उन्हें मृत घोषित कर दिया लेकिन विजेंद्र अपनी जिद पर डटे रहे।
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Keadarnath Leela Vijendra
विजेंद्र हर रोज अपनी पत्नी की तस्वीर लेकर उत्तराखंड में घूमते थे और लोगों से पूछते थे कि क्या आपने मेरी पत्नी को देखा है। लोगों ने उनको पागल कहना शुरू कर दिया था। एक दिन विजेंद्र की यह कोशिश रंग लाई।