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ये है दुनिया का सबसे बेकार हवाई अड्डा, 'सफेद हाथी' के नाम से हो चुका है बदनाम
amarujala.com- Presented by: राजेश सैनी
Updated Tue, 17 Oct 2017 11:19 AM IST
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हवाई अड्डे से उड़ान भरता प्लेन
- फोटो : AFP
आपने दुनिया के सबसे बड़े, सबसे भव्य, सबसे बिजी, हवाई अड्डों के बारे में तो सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी दुनिया के सबसे यूजलैस (बेकार) हवाईअड्डे के बारे में सुना है। अगर नहीं तो ये खबर पढ़ कर इसके बारे में भी ज्ञान अर्जित कर लें...
हवाई अड्डे से पहली उड़ान का दृश्य
- फोटो : AFP
ये हवाई अड्डा है साउथ अटलांटिक महासागर में ब्रिटिश आइसलैंड सेंट हेलेना पर... यह इलाका घनी आबादी वाले क्षेत्र से कोसों दूर है। यह अफ्रीका के दक्षिण-पश्चिमी तट से 1950 किमी की दूरी पर स्थित है। एसेंशन आईलैंड इसके सबके निकट है, जिसका उपयोग अमेरिकी एयरफोर्स करती है।
इस आईलैंड पर चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत वातावरण हैं। सेंट हेलेना का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। इसकी खोज सबसे पहले पुर्तगालियों द्वारा 1502 में की गई थी। जिस पर 17वीं सदी के दौरान ब्रिटेन ने कब्जा जमा लिया। इस आइलैंड पर अंग्रेजों ने फ्रांस के शासक रहे नेपोलियन बोनापार्ट को भी बंधक बना कर रखा था।
इस आईलैंड पर चारों ओर हरियाली, पहाड़ और शांत वातावरण हैं। सेंट हेलेना का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। इसकी खोज सबसे पहले पुर्तगालियों द्वारा 1502 में की गई थी। जिस पर 17वीं सदी के दौरान ब्रिटेन ने कब्जा जमा लिया। इस आइलैंड पर अंग्रेजों ने फ्रांस के शासक रहे नेपोलियन बोनापार्ट को भी बंधक बना कर रखा था।
सेंट हेलेना एयरपोर्ट
- फोटो : REUTERS
बता दें कि वर्तमान में सेंट हेलेना 4500 से ज़्यादा लोगों का निवास स्थल है। यह एक ज्वालामुखी द्वीप है, जो कि काफी हद तक बीहड़ इलाके और 500 से 700 मीटर लंबी चट्टानों के बीच बना है। यहां एक एयरपोर्ट है, लेकिन अभी तक यूज में नहीं था। इस एयरपोर्ट से शनिवार को पहली वाणिज्यिक उड़ान की शुरुआत हुई है।
डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी) द्वारा 285 मिलियन पाउंड फंड दिए जाने के बाद सेंट हेलेना एयरपोर्ट का निर्माण किया गया। इसकी शुरूआत पिछले साल की गई थी, लेकिन खतरनाक हवा की स्थिति की वजह से व्यावसायिक उड़ानों की शुरुआत में देरी हुई।
डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (डीएफआईडी) द्वारा 285 मिलियन पाउंड फंड दिए जाने के बाद सेंट हेलेना एयरपोर्ट का निर्माण किया गया। इसकी शुरूआत पिछले साल की गई थी, लेकिन खतरनाक हवा की स्थिति की वजह से व्यावसायिक उड़ानों की शुरुआत में देरी हुई।
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सेंट हेलेना में सिर्फ 4,500 लोगों की बसावट
- फोटो : AFP
हालांकि परीक्षण किए जाने के बाद ही दक्षिण अफ्रीकी विमानन अधिकारियों ने यहां हवाईअड्डे बनाने के लिए अनुमति दी थी। बता दें यहां जीवन बहुत ही कठिन है। संसाधनों की कमी के कारण जहां स्थानीय दुकानें 4 बजे के बाद बंद हो जाती हैं। वहीं, मोबाइल के नेटवर्क भी काफी कम रहते हैं जिस कारण इंटरनेट का कनेक्शन भी बमुश्किल मिलता है।
एयरलिंक एम्ब्रर ई -190-100 आईजीडब्ल्यू विमान शनिवार को अपने स्थानीय समय दोपहर 1.15 बजे यहां से उड़ान भरने में कामयाब रहा। इस घड़ी परॉ एक ब्रिटिश ट्रैवल ऑपरेटर, लिब्बी वीर-बरीन भावुक होकर बोलीं, "मैंने कभी अपने सभी जीवन में इतना भावनात्मक महसूस नहीं किया है।" उन्होंने बताया कि वे पिछले बारह साल से यहां अफ्रीका के अंगोला से पर्यटकों को अपने साथ लेकर आ रही हैं।
एयरलिंक एम्ब्रर ई -190-100 आईजीडब्ल्यू विमान शनिवार को अपने स्थानीय समय दोपहर 1.15 बजे यहां से उड़ान भरने में कामयाब रहा। इस घड़ी परॉ एक ब्रिटिश ट्रैवल ऑपरेटर, लिब्बी वीर-बरीन भावुक होकर बोलीं, "मैंने कभी अपने सभी जीवन में इतना भावनात्मक महसूस नहीं किया है।" उन्होंने बताया कि वे पिछले बारह साल से यहां अफ्रीका के अंगोला से पर्यटकों को अपने साथ लेकर आ रही हैं।
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ज्यादातर लोग समुद्र यात्रा से पहुंचते हैं यहां
- फोटो : AFP
उन्होंने बताया कि उनका विशेष प्लेन स्कॉटलैंड उड़ान भर कर यहां पहुंचा था। जब उनके प्लेन ने सेंट हेलेना हवाई अड्डे के रनवे पर लैंड किया तो उनकी आंखों से खुद-ब-खुद आंसू फूट पड़े। उन्होंने कहा "मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस दिन को कभी देख पाउंगी"।
सेंट हेलेना का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। इसकी खोज सबसे पहले पुर्तगालियों द्वारा की गई थी। जिस पर 1658 से ब्रिटेन का कब्जा है। इस आइलैंड पर अंग्रेजों ने फ्रांस के शासक रहे नेपोलियन बोनापार्ट को भी बंधक बना कर रखा था। अंग्रेजों ने नेपोलियन को 1815 ई. में बंधक बनाया था। लगभग छह साल बाद 1821 ई. में इसी द्वीप पर उनकी मौत हो गई। आज भी वहां बोनापार्ट की फूलों से लदी कब्र स्थल पर लोग घूमने जाते हैं।
सेंट हेलेना का अपना ऐतिहासिक महत्व भी है। इसकी खोज सबसे पहले पुर्तगालियों द्वारा की गई थी। जिस पर 1658 से ब्रिटेन का कब्जा है। इस आइलैंड पर अंग्रेजों ने फ्रांस के शासक रहे नेपोलियन बोनापार्ट को भी बंधक बना कर रखा था। अंग्रेजों ने नेपोलियन को 1815 ई. में बंधक बनाया था। लगभग छह साल बाद 1821 ई. में इसी द्वीप पर उनकी मौत हो गई। आज भी वहां बोनापार्ट की फूलों से लदी कब्र स्थल पर लोग घूमने जाते हैं।