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हीरों के टुकड़ों से भरा पड़ा है ये गांव, घर की दीवार से लेकर छत तक हीरों की चमक
बिजार डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 06 Jan 2018 09:55 AM IST
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This village full of Diamond
ये जानकर शायद आपको यकीन नहीं होगा कि धरती पर एक ऐसे गांव का अस्तित्व कायम है जहां हर घर में हिरे जड़े हैं। वो भी इक्के-दुक्के नहीं बल्कि बहुत सारे। यकीन मानिए रात को यहां का नजारा बेहद खूबसूरत नजर आता है क्योंकि यहां वाकयी ऐसा लगता है कि तारे जमीन पर उतर आए हैं।
village full of Diamond
जी हां जर्मनी में ऐसा शहर हैं, जहां हर घर की दीवार से लेकर उसकी छत हीरे की छोटे-छोटे टुकड़ों से बनी हुई है। जर्मनी का नोर्डलिंडेन शहर एक ऐसा विशेष स्थल है जहां हर घर की दीवारें हीरे के अत्यंत छोटे-छोटे टुकड़ों से भरी पड़ी हैं।
जानकारी के अनुसार नौवीं शताब्दी में निर्माण के समय नोर्डलिंडेन के लोगों को पता ही नहीं था कि जिन पत्थरों से वह अपना घर बना रहे हैं वह हीरे से भरा पड़ा है। ये हीरे इतने छोटे हैं कि इन्हें नग्न आखों से देख पाना संभव नहीं है। लेकिन हीरे से बने घरों पर सूर्य की रोशनी पड़ते ही यह तेजी से चमकने लगते हैं। इसी वजह से यहां के लोगों को पत्थरों में हीरा होने का रहस्य ज्ञात हुआ।
आगे जानिए आखिर कहां से आए ये पत्थर...
जानकारी के अनुसार नौवीं शताब्दी में निर्माण के समय नोर्डलिंडेन के लोगों को पता ही नहीं था कि जिन पत्थरों से वह अपना घर बना रहे हैं वह हीरे से भरा पड़ा है। ये हीरे इतने छोटे हैं कि इन्हें नग्न आखों से देख पाना संभव नहीं है। लेकिन हीरे से बने घरों पर सूर्य की रोशनी पड़ते ही यह तेजी से चमकने लगते हैं। इसी वजह से यहां के लोगों को पत्थरों में हीरा होने का रहस्य ज्ञात हुआ।
आगे जानिए आखिर कहां से आए ये पत्थर...
village full of Diamond
करीब दस लाख साल पहले नोर्डलिंडेन क्षेत्र में एक क्षुद्रग्रह (एस्ट्रॉयड) की हलचल हुई थी। जिसके सामान्य दबाव और गर्मी से तपे किसी उल्कापिंड के टकराने की वजह से यह क्षुद्रग्रह अपने साथ हीरों के बहुत छोटे-छोटे कण ले आया था। शोएमेकर और चाओ नाम के भूवैज्ञानिकों के मुताबिक, इस शहर में 72 हजार टन हीरे हैं। हालांकि दुनिया के कई हिस्सों में इस किस्म के पत्थरों में हीरे के कण होने की संभावनाएं पहले भी देखी गई हैं लेकिन उनमें इस किस्म के हीरे नहीं मिले हैं।
और भी जानिए...
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village full of Diamond
नेबुला
नेबुला अंतरिक्ष में एक विशाल क्षेत्र में धूल और गैस का एक बादल है। यह आकार में बहुत बड़ा हो सकता है लेकिन घना नहीं होता। जैसे ही एक तारा अपना जीवन समाप्त करता है उसी समय उसके कोर गिरने लगते हैं और चारों ओर गर्म गैस निकलने लगती है। जिसके बाद यह छोटे-छोटे कणों में अपनी चमक बिखेरता हुआ लुप्त हो जाता है। इसकी समाप्ति के समय इसकी छवियां बेहद ही प्रभावशाली प्रतीत होती हैं जिसे दूरबीन की मदद से देखा जा सकता है।
नेबुला अंतरिक्ष में एक विशाल क्षेत्र में धूल और गैस का एक बादल है। यह आकार में बहुत बड़ा हो सकता है लेकिन घना नहीं होता। जैसे ही एक तारा अपना जीवन समाप्त करता है उसी समय उसके कोर गिरने लगते हैं और चारों ओर गर्म गैस निकलने लगती है। जिसके बाद यह छोटे-छोटे कणों में अपनी चमक बिखेरता हुआ लुप्त हो जाता है। इसकी समाप्ति के समय इसकी छवियां बेहद ही प्रभावशाली प्रतीत होती हैं जिसे दूरबीन की मदद से देखा जा सकता है।
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ब्लैकहोल
इसे ब्लैक यानि काला इसलिए कहा जाता है क्योंकि ह अपने पर पड़ने वाले प्रकाश को अवशोषित कर लेता है। प्रत्येक बड़ा आकाशगंगा के केंद्र में एक बहुत ही बड़ा ब्लैक होल होता है, जो दिखने में सूर्य के आकार से भी विशाल होता है। इतना ही नहीं आसमान में टिमटिमाने वाले तारों के निर्माण की प्रक्त्रिस्या बंद करना ब्लैकहोल पर ही निर्भर करता है। यह एक ऐसी खगोलीय वस्तु होती है जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि इसके खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता। इसमें वस्तुएं गिर तो सकती हैं लेकिन कभी बाहर नहीं आ सकतीं।
इसे ब्लैक यानि काला इसलिए कहा जाता है क्योंकि ह अपने पर पड़ने वाले प्रकाश को अवशोषित कर लेता है। प्रत्येक बड़ा आकाशगंगा के केंद्र में एक बहुत ही बड़ा ब्लैक होल होता है, जो दिखने में सूर्य के आकार से भी विशाल होता है। इतना ही नहीं आसमान में टिमटिमाने वाले तारों के निर्माण की प्रक्त्रिस्या बंद करना ब्लैकहोल पर ही निर्भर करता है। यह एक ऐसी खगोलीय वस्तु होती है जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि इसके खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता। इसमें वस्तुएं गिर तो सकती हैं लेकिन कभी बाहर नहीं आ सकतीं।