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पीने के बाद कुछ लोग गिर क्यों जाते हैं, जानकर भन्ना जाएगा आपका सिर

Tue, 25 Sep 2018 02:25 PM IST
मेलिसा हॉगेनबूम संवाददाता, बीबीसी फ्यूचर
मेलिसा हॉगेनबूम संवाददाता, बीबीसी फ्यूचर Updated Tue, 25 Sep 2018 02:25 PM IST
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Why do some people black out when drinking
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सारा हेपोला ये बिल्कुल भूल चुकी थीं कि पिछली रात उनके साथ क्या हुआ था। उन्हें बस इतना याद था कि पिछली रात एक पार्टी में वो कुछ लोगों से बात कर रही थीं। पर, इसके बाद क्या हुआ था, वो ये बिल्कुल भूल चुकी थीं।


एक रात पहले क्या हुआ?
सारा उस पार्टी में कैसे पहुंची? उनके हाथ में वो मुहर कैसे लगी? पिज्जा किसने खरीदा? उनके बगल में कौन आदमी था? इनमें से किसी भी सवाल का जवाब उनके पास नहीं था। सारा उस सुबह को याद करके कहती हैं, "मेरे लिए ये सब बेहद अजीब था। मुझे कुछ नहीं पता कि क्या हुआ था। मैंने बात को हंसी में उड़ा दिया। मुझे लगा कि ये तो बहुत आम बात है।"

सारा के साथ याददाश्त गुम हो जाने की ऐसी घटनाएं कई बार हो चुकी हैं और ये उनके साथ उम्र के शुरुआती दौर से हो रहा है। सारा कहती हैं, "अक्सर मेरे साथ ऐसा होता था कि रात में किसी तहखाने का दरवाजा खुलता था और सुबह मैं कहीं और ही नींद से जागती थी।" असल में सारा हेपोला शराब पीने के बाद बेहोश हो जा रही थीं। जिस मामले को वो हंसी में उड़ा रही थीं, वो असल में बहुत गंभीर नतीजे वाली बात हो सकती थी।
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उस वक्त उन्होंने मामले को सीरियसली नहीं लिया था, लेकिन शराब के साथ अपने उस रिश्ते को सारा अब बहुत बड़ा गड़बड़झाला मानती हैं। शराब पीने के बाद लोग अक्सर बहक जाते हैं। कुछ भी बोलने लगते हैं। कुछ भी करने लगते हैं। कोई कहता है वो ऐसा जान-बूझकर करते हैं। नशे में होने का फायदा उठाकर दिल की भड़ास निकालते हैं।

वहीं, कुछ लोग कहते हैं कि नशा चढ़ने के बाद उन्हें कुछ याद ही नहीं रहता। आम लोगों के लिए ये बातें महज मजाक हो सकती हैं, लेकिन, मनोवैज्ञानिकों के लिए ये रिसर्च का विषय है। शराब पीकर बहकना या बेहोश हो जाना आम बात है। हाल में करीब 20 हजार किशोरों पर हुए एक सर्वे के मुताबिक 20 फीसदी किशोर शराब पीने के बाद बेहोश हो जाते हैं। अंग्रेजी में इसे 'ब्लैकआउट' कहते हैं। ज्यादा नशे की सूरत में लोग क्या करते हैं, या उनके साथ क्या होता है, उन्हें कुछ याद नहीं रहता।

सौ में से 60 लोग...
अमरीका में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन अल्कोहल एब्यूज एंड एल्कोहलिज्म के प्रोफेसर आरोन व्हाइट का कहना है कि अब से 15 साल पहले तक इसे आम बात नहीं माना जाता था। लेकिन अब मान लिया गया है कि अक्सर शराब लोगों के दिमाग पर चढ़ जाती है। उन्हें बेहोश भी कर देती है।

इसीलिए अब वैज्ञानिक इसकी वजहें तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही इसका नेगेटिव असर कम करने के तरीके पर भी गौर किया जा रहा है। ब्लैकआउट की स्थिति में याददाश्त पर कितना और कैसा असर होता है, ये जानने के लिए 1960 के दशक में डोनाल्ड गुडविन नाम के एक वैज्ञानिक ने कुछ शराबियों को अस्पताल में और कुछ को जॉब सेंटर में भर्ती किया।
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रिसर्च में पाया गया कि
100 में से 60 से ज्यादा शराब पीने के बाद बेहोश हुए।
इस दौरान कुछ की याददाश्त पूरी तरह चली गई, जबकि कुछ को टुकड़ों में कुछ बातें याद थीं।
कुछ लोगों को तो शराब पीते ही चढ़ गई, जबकि कुछ को पीने के करीब आधे घंटे बाद नशा हुआ।
शराब पीने से लेकर नशा चढ़ने तक जितने सवाल उनसे पूछे गए, उनका जवाब तो उन्होंने सही दिया, लेकिन होश में आने के बाद उन्हें कुछ याद नहीं था।
कुछ को बहुत याद करने पर कुछ बातें याद आ रही थीं। हालांकि नैतिकता के आधार पर आज इस तरह का तजुर्बा करना मुश्किल है।

हिप्पोकैंपस
आधी सदी पहले हुए इस रिसर्च के आधार पर वैज्ञानिक कहते हैं कि शराब के नशे में बेहोश होने के दौरान दिमाग का वो हिस्सा जिसे हिप्पोकैंपस कहते हैं, कुछ वक्त के लिए बिगड़ जाता है। हिप्पोकैंपस दिमाग का वो हिस्सा होता है, जो तमाम तरह की जानकारियों को याददाश्त के लिए एक फाइल के तौर पर स्टोर करता है। जिन लोगों के दिमाग के इस हिस्से पर असर ज्यादा होता है, वो नई चीजें याद नहीं रख पाते।

शराब पीने पर हिप्पोकैंपस को जानकारी पहुंचाने वाले दिमाग के दो अन्य हिस्से फ्रंटल लोब और अमेगडाला भी प्रभावित होते हैं। फ्रंटल लोब दिमाग का विचार बुद्धि वाला हिस्सा है। जबकि, अमेगडाला हमें खतरे के बारे में सतर्क करता है। खाली पेट या सोने से पहले शराब पीना ज्यादा घातक होता है। अल्कोहल का खतरा इस बात पर भी निर्भर करता है कि कितनी जल्दबाजी में उसका सेवन किया जा रहा है।
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मर्दों और महिलाओं का मुकाबला
अगर 0.20 से 0.30 फीसद अल्कोहल खून में शामिल है, तो याददाश्त पूरी तरह काम करना बंद कर देती है। लेकिन इसमें शरीर का वजन और लिंग दोनों अहम होते हैं। इसीलिए जिन लोगों का वजन कम होता है उनके दिमाग पर अल्कोहल का असर तेजी से होता है। शराब पीने के बाद महिलाएं भी खूब टल्ली होती हैं। हालांकि अल्कोहल लेने के मामले में मर्दों के मुकाबले उनकी संख्या कम है। लेकिन उनके शरीर में चर्बी ज्यादा होती है, जिसका मतलब है अल्कोहल को पतला करने के लिए उनके शरीर में पानी की मात्रा कम होती है। इसीलिए उनके खून में शराब का असर ज्यादा और तेजी से होता है।

2017 की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक मर्दों के मुकाबले तीन पैग कम लेने पर भी महिलाएं शराब पीकर बेहोश हो जाती हैं। जबकि 2015 की एक रिसर्च के मुताबिक मर्दों के मुकाबले एक भी पैग ज्यादा लेने वाली महिलाओं में मर्दों के मुकाबले बेहोश होने संभावना 13 फीसद तक बढ़ जाती है।

किशोरावास्था में असर
दिलचस्प बात है कि इस मामले में खानदान या मां-बाप के रोल भी अहम हो जाते हैं। रिसर्च के मुताबिक जिनकी मांओं को शराब पीने के बाद दिक्कत होती थी, उनके लिए खतरा ज्यादा है। दिमाग पर होने वाले असर के मामले में आनुवांशिक अंतर भी अहम रोल निभाता है। चूहों पर की गई रिसर्च के मुताबिक बहुत ज्यादा शराब का सेवन दिमाग में कई अन्य बदलावों को जन्म दे सकता है।

किशोरावस्था में दिमाग और शरीर दोनों खुद को मजबूत करने का प्रयास कर रहे होते हैं। ऐसे में अल्कोहल का नकारात्मक असर उनके दिमाग और शरीर दोनों पर पड़ता है। दिमाग का फ्रंटल लोब वाला हिस्सा 25 साल की उम्र तक विकसित होता है। लिहाजा किशोरावास्था में उस पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है।
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खतरे का अहसास
जिन महिलाओं को शराब पीने के बाद सब कुछ भूल जाने की आदत होती है, नशे में उनका सेक्शुअल बिहेवियर भी बदल जाता है और अगले दिन उन्हें अपने किए पर पछतावा होता है। आंकड़े बताते हैं कि जो महिलाएं शारीरिक हिंसा का शिकार हुई होती हैं, वो शराब के नशे में दोबारा आसानी से इसकी शिकार बन जाती हैं। नशे की हालत में उनका दिमाग उन्हें खतरे का अहसास ही नहीं करा पाता। फैसला लेने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है।

खतरा नशा उतरने के बाद भी बना रहता है, क्योंकि उन्हें याद ही नहीं रहता कि नशे के वक्त उनके साथ क्या हुआ था। भले ही नशे की हालत में कोई रजामंदी दे दे, लेकिन हो सकता है कि वो इसके लिए तैयार ना हो। लेकिन जब कोर्ट में केस पहुंचेगा तो वहां इसे रजामंदी ही माना जाएगा।

 
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