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दुनिया की 5 सबसे डरावनी और वीरान जगह, आज भी यहां कदम रखने से कांप उठते हैं लोग
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 28 Jul 2018 11:14 AM IST
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iceland
वैसे तो दुनिया बेहद खूबसूरत जगहों से भरी पड़ी है। लेकिन दुनिया में कुछ स्थान ऐसे भी हैं जो बेहद खूबसूरत होने के बवाजूद आज तक वीरान पड़े हैं। जी हां, प्रकृति ने इन जगहों को इतना सुंदर बनाया है उसके बावजूद यहां कोई आता जाता नहीं। आज हम आपको दुनिया की कुछ ऐसी ही पांच जगहों से रूबरू कराएंगे।
haunted place
1. डरावनी गुड़ियों का आइलैंड
मैक्सिको सिटी के बाहरी इलाके में मौजूद आइलैंड ऑफ दी डॉल्स हजारों टूटी फूटी और डरावनी गुड़ियों का घर है जो वहां पेड़ों और दीवारों पर टंगी हुई है। इन गुड़ियों के यूं टंगे होने के पीछे एक बेहद रहस्यमयी कहानी है। कहा जाता है कि आइलैंड की देखभाल करने वाले एक आदमी ने इन गुड़ियों को यहां टांगा था।
मैक्सिको सिटी के बाहरी इलाके में मौजूद आइलैंड ऑफ दी डॉल्स हजारों टूटी फूटी और डरावनी गुड़ियों का घर है जो वहां पेड़ों और दीवारों पर टंगी हुई है। इन गुड़ियों के यूं टंगे होने के पीछे एक बेहद रहस्यमयी कहानी है। कहा जाता है कि आइलैंड की देखभाल करने वाले एक आदमी ने इन गुड़ियों को यहां टांगा था।
iceland
उसे इस आइलैंड की लहर पर एक छोटी लड़की अजीब सी हालत में मरी हुई मिली थी। साथ ही उसे लड़की की लाश के पास एक गुड़िया भी मिली थी। उसने उस लड़की को दफना कर सम्मान देने के लिए उस गुड़िया को एक पेड़ पर टांग दिया। थोड़े समय बाद उस आदमी को मरी हुई लड़की की आवाज और डरावने सपने आने लगे।
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man with doll
और इसके बाद उसने अपनी जिंदगी के अगले 50 साल उस आइलैंड पर इस तरह की हजारों गुड़ियों को टांगने में लगा दिए। अगर आपको ये बात अजीब नहीं लगती तो इससे भी रहस्यमयी घटना उस आदमी की मौत होने पर हुई। जी हां , उस शख्स का शव उसी स्थान पर मिला जहां उसने उस लड़की को दफनाया था।
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House of the Bulgarian Communist Party
2. हाउस ऑफ द बल्गेरियन कम्यूनिस्ट पार्टी
1981 में बनी ये जगह सोवियत युग के दौरान कभी बल्गेरियन कम्यूनिस्ट पार्टी का केंद्र हुआ करती थी। लेकिन एक दशक से भी कम समय में सोवियत संघ के सदस्य देश और गैर सदस्य देशों के बीच की सीमा आयरन करटेन टूट जाने की वजह से ये बिल्डिंग सोवियत युग के अंत का प्रतीक बन गई।
1981 में बनी ये जगह सोवियत युग के दौरान कभी बल्गेरियन कम्यूनिस्ट पार्टी का केंद्र हुआ करती थी। लेकिन एक दशक से भी कम समय में सोवियत संघ के सदस्य देश और गैर सदस्य देशों के बीच की सीमा आयरन करटेन टूट जाने की वजह से ये बिल्डिंग सोवियत युग के अंत का प्रतीक बन गई।