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इस जगह की हवा में भी बह रही है मौत, कभी नहीं सुनी होगी ऐसी भयानक दास्तां

Sat, 07 Jul 2018 03:27 PM IST
बुशरा शेख/बीबीसी हिंदी
बुशरा शेख/बीबीसी हिंदी Updated Sat, 07 Jul 2018 03:27 PM IST
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The horrific story of cancer colony in Delhi
Pinki Sharma
"मेरा ऑपरेशन पहले हुआ था, मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं पहले जाऊंगी। हम आपस में बस यही बात करते थे कि पता नहीं भगवान का बुलावा हम दोनो में से पहले किसको आए।" 51 साल की पिंकी शर्मा की आंखों में आंसू हैं। वो बताती हैं कि उनके पति कांति स्वरूप को कैंसर था। एक साल पहले पति को खो चुकीं पिंकी खुद भी स्तन कैंसर से लड़ रही हैं।

 
The horrific story of cancer colony in Delhi
delhi
फिलहाल वो पीने के पानी की सप्लाई का काम करती हैं। उनके दो विवाहित बच्चे हैं लेकिन वो अपना इलाज नहीं करा रही हैं और अपना पैसा बच्चों के लिए बचा रही हैं। इसकी वजह वो बताती हैं, "अगर अपने ऊपर खर्चा करती हूं तो घर पर बच्चों के लिए कुछ भी नहीं रहता, और अगर नहीं करती हूं तो जीने की उम्मीद हर किसी को मरते टाइम तक ये रहती है कि हमें जिंदगी और मिले चाहे जिस भी कंडीशन में हो…" पिंकी शर्मा कहती हैं, "कभी-कभी दर्द होता है, चुभन होती है पर मैं उसे इग्नोर करती हूं..."
The horrific story of cancer colony in Delhi
Dyeing clothes
जींस डाइ करने की अवैध फैक्ट्रियां
यह कहानी अकेले पिंकी की नहीं है। पूर्वी दिल्ली के शिव विहार इलाके में पिंकी जैसे और भी लोग हैं जो कैंसर से जूझ रहे हैं। कुछ लोग तो इस इलाके को कैंसर कॉलोनी के नाम से बुलाने लगे हैं। यहां रहने वाले लोगों का मनना है कि अवैध जींस डाइंग फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल इसके लिए जिम्मेदार हैं।
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The horrific story of cancer colony in Delhi
alok
शिव विहार के इस इलाके में आपको पिंकी जैसे कैंसर पीड़ित हर दूसरी-तीसरी गली में मिल जाएंगे। हालांकि, प्रशासन के पास इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। ऐसे ही एक कैंसर पीड़ित 17 साल के आलोक हैं।

वे बताते हैं, "मेरा ऑपरेशन हुआ था लेकिन उसके बाद भी एक के बाद एक कई फुंसियां निकल आईं। फिर दूसरे अस्पताल में दिखाया जहां कैंसर के मर्ज की पहचान हुई और हाथ काटने को बोल दिया।" आलोक कहते हैं, "उस वक्त का दुःख तो बहुत होता है लेकिन पापा ने बोला कि मजबूरी है, हाथ कटवा लो, मर जाओगे।"
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The horrific story of cancer colony in Delhi
Doctor Pradeep Jain
कपड़े रंगने वाले केमिकल
दिल्ली स्थित फॉर्टिस अस्तपाल के डॉक्टर प्रदीप जैन बताते हैं, "एक ही इलाके में इतने सारे कैंसर के मामले सामने आने की वजह कपड़ों को रंगने वाले केमिकल हो सकते हैं।" उनका कहना है कि हमारे देश में इसे लेकर कोई खास रिसर्च नहीं हुई है।

वे कहते हैं, "कोई भी केमिकल किसी भी तरह से अगर शरीर में दाखिल होता है, चाहे वो सांस के रास्ते ही क्यों न हो, फेफड़े या फिर त्वचा के जरिए या खाने की नली से अंदर जाए... और अगर ये भारी मात्रा में हो तो नुकसान होना तय है।
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