{"_id":"5b5ef7bc4f1c1b51748b7d25","slug":"more-than-hundred-earthworm-eggs-in-the-found-in-eight-year-old-girl","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"8 साल की बच्ची के दिमाग में 100 से ज्यादा इस जीव के अंडे, देखकर डॉक्टरों के उड़े होश","category":{"title":"Weird Stories","title_hn":"अजब गजब","slug":"weird-stories"}}
8 साल की बच्ची के दिमाग में 100 से ज्यादा इस जीव के अंडे, देखकर डॉक्टरों के उड़े होश
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Mon, 30 Jul 2018 06:14 PM IST
विज्ञापन
hospital
एक बच्ची जिसकी कहानी जानकर आप भी कहेंगे कि ये भगवान का चमत्कार ही है जो ऐसा होने के बावजूद वो जिंदा बची है। ये मामला नई दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में सामने आया। इस बच्ची की कहानी जिस किसी को मालूम चली वो सिहर उठा।
Earthworm
दरअसल हुआ यूं कि स्नेहा(बदला हुआ नाम) को पिछले कई दिनों से काफी सूजन थी। इसके साथ-साथ उसे तेज सिर दर्द के सांस लेने में दिक्कत होने लगी। स्नेहा की हालत दिनोंदिन बिगड़ती चली गई और फिर उसे चलने-फिरने में दिक्कत होने लगी।स्नेहा को मिर्गी आने की भी शिकायत थी। इसके बाद स्नेहा को उसके माता-पिता नई दिल्ली स्थित फोर्टिस अस्पताल ले गए। यहां डॉक्टरों को उसकी हालत देखकर मामला गंभीर लगा। उन्होंने फौरन बच्ची का सिटी स्कैन करने की सलाह दी। सिटी स्कैन रिपोर्ट जब आई तो डॉक्टरों के रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने रिपोर्ट में जो देखा उस पर यकीन नहीं हो रहा था।
City scan
दरअसल डॉक्टरों ने स्नेहा के दिमाग में 100 से भी ज्यादा केंचुए के अंडे देखे। आठ साल की मासूम बच्ची के दिमाग में केंचुए के अंडे मिलने से वे हैरान परेशान हो गए। डॉक्टरों को सिटी स्कैन में 100 से ज्यादा उजले धब्बे नजर आए। यह धब्बे केंचुए के अंडे हैं। नेहा के खून से केंचुए के अंडे उसके दिमाग तक जा पहुंचे। लंबे समय तक केंचुए के रहने की वजह से ही नेहा को सिर दर्द की शिकायत और मिर्गी जैसे लक्षण उत्पन्न हुए। इसकी वजह से नेहा का वजन भी 20 किलोग्राम बढ़ गया। लेकिन ये केंचुए उसके दिमाग तक कैसे पहुंचे ये सवाल उठ गया...
विज्ञापन
विज्ञापन
hospital
इस पर डॉक्टरों का कहना है कि दुर्भाग्यवश खाना खाने के दौरान केंचुए के अंडे उसके शरीर में प्रवेश कर गए। नवर्स सिस्टम के जरिए ये अंडे स्नेहा के ब्रेन में पहुंचे। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक जिस वक्त स्नेहा को अस्पताल में भर्ती कराया गया वो उस वक्त सिर में सूजन की वजह से अचेत अवस्था में थी। डॉक्टरों ने इस बच्ची का इलाज कृमिनाशक थेरेपी के जरिए शुरू किया। दिमाग में आई सूजन को कम करने के लिए डॉक्टरों ने जरूरी दवाइयां दी।
विज्ञापन
fortis
तब जाकर बच्ची की हालत में सुधार आया। सबसे पहले उसके दिमाग का वजन कम होना शुरू हो गया। चमत्कारिक ढंग से अब यह बच्ची चलने-फिरने की अवस्था में है। विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार मिर्गी को नजरअंदाज करना इन बीमारियों के फैलने की प्रमुख वजह बन जाती है। एक्सपर्टस के मुताबिक खाने पकाते समय भी सुरक्षा के जरुरी उपाय करना जरूरी है।
इलाज के बाद स्वस्थ होने पर बच्ची के माता-पिता काफी खुश हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी ऐसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो जाएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक न्यूरो सिस्टी सरकोसिस यानी पेट के केंचुए (फीताकृमि) में मौजूद होते हैं। यह मल के रास्ते शरीर से निकलता है। खेत में शौच करने पर यह जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियों पर साग, धनियां, ककड़ी, गाजर आदि में यह चिपक जाते हैं। इन सब्जियों को ठीक से धुलकर या उबालकर न खाने वालों के पेट के रास्ते यह कीड़ा दिमाग में चला जाता है।
इलाज के बाद स्वस्थ होने पर बच्ची के माता-पिता काफी खुश हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी बेटी ऐसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो जाएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक न्यूरो सिस्टी सरकोसिस यानी पेट के केंचुए (फीताकृमि) में मौजूद होते हैं। यह मल के रास्ते शरीर से निकलता है। खेत में शौच करने पर यह जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियों पर साग, धनियां, ककड़ी, गाजर आदि में यह चिपक जाते हैं। इन सब्जियों को ठीक से धुलकर या उबालकर न खाने वालों के पेट के रास्ते यह कीड़ा दिमाग में चला जाता है।