कोई खोई हुई चीज दोबारा मिले, तो खुशी होती है। मगर कोई ऐसी चीज मिले, जिसकी उम्मीद भी ना बची हो, तो कैसा लगता है?
अमेरिका के ज्योर्जिया में रहने वाले रॉय रोट्स के साथ ऐसा ही कुछ हुआ है। जो बटुआ उन्होंने करीब सात दशक पहले खो दिया था, उन्हें अब जाकर मिला है। यही नहीं, उसमें वे तमाम जरूरी कागजात भी थे, जो उस वक्त वॉलेट में थे जब वह गुम हुआ था।
रॉय रोट्स अब 100 साल के हो चुके हैं। मगर जिस दिन उनका वॉलेट खोया, उस दिन से जुड़ी हर बात उनके मन में इतनी ताजा है, मानो कल की ही बात हो। रोट्स ने बताया, 'मैं इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर था और मेरा काम हवाई जहाज की जांच करना था। उस दिन मैं कैलिफोर्निया में था। दूसरा विश्व युद्ध छिड़ा था। हम सब एक हवाई जहाज पर सवार थे। तभी मुझे ख्याल आया कि मेरे पास मेरा बटुआ नहीं है। मैंने प्लेन पर सवार हर एक शख्स की तलाशी ली, मगर वह कही नहीं मिली।'
'फॉक्स 5' की रिपोर्ट के मुताबिक, रॉय रोट्स की जेब से फिसला वॉलेट एडगर वॉरेन बर्ड्स को मिला। दिलचस्प बात यह है कि एक अमेरिकी नागरिक की वॉलेट यूरोपीय शख्स के हाथ लगी थी। यह करिश्मा कैसे हुआ, पता नहीं। जिस वक्त बर्ड्स को रोट्स का बटुआ मिला, वह इंग्लैंड के डर्बीशायर स्थित रॉयल एयरफोर्स में कार्यरत थे।
रोट्स के वॉलेट में उनकी ड्राइवर्स लाइसेंस थी। यानी उन्हें बटुआ लौटाना वॉरेन बर्ड्स के लिए मुश्किल नहीं था। वह लाइसेंस में लिखे नाम और पते पर उस वॉलेट को भेज सकते थे। मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया। ऐसा भी नहीं था कि उन्होंने किसी गलत इरादे से रोट्स का बटुआ अपने पास रख लिया हो। क्योंकि अगर ऐसा होता तो वह बरसों तक उस बटुए को संभाल कर नहीं रखते, पैसे निकालकर उसे फेंक देते।
एडगर वॉरेन बर्ड्स ने ना सिर्फ उस वॉलेट को हिफाजत से रखा बल्कि अपनी अगली दो पीढ़ियों तक उसे आगे भी बढ़ाया। वॉरेन ने वह बटुआ अपने बेटे को दिया और उनके बेटे ने वह बटुआ उनकी पोती हो। वॉरेन अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी पोती ने ही रोट्स को उनका बटुआ लौटाया। हालांकि, बर्ड्स ने वह बटुआ खुद क्यों नहीं लौटाया और उसे सहेजकर रखने के पीछे उनका इरादा क्या था यह बस अब राज़ बनकर रह गया है...