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इस होटल से डरना जरूरी है, यहां 5वी मंजिल पर भूल कर भी मत जाना, वरना मौत होना तय है
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 23 Jun 2018 08:39 AM IST
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यंगाकडो अंतरराष्ट्रीय होटल
उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग के यंगाकडो होटल जाने का नतीजा था कि अमरीकी छात्र ऑटो वार्मबियर को वहां हिरासत में लिया गया। हालांकि बाद में उत्तर कोरिया ने वार्मबियर को अमरीका जाने दिया। मगर हिरासत के दौरान हुए टॉर्चर की वजह से उसकी मौत हो गई। वैसे, ऑटो वार्मबियर वो पहला अमरीकी नागरिक नहीं था, जो उत्तर कोरिया के सबसे बड़े होटल यंगाकडो में ठहरा था। ऐसे ही एक अमरीकी नागरिक थे कैल्विन सन, जो उत्तर कोरिया घूमने गए थे और यंगाकडो होटल में ठहरे थे।
student
बस स्टार्ट हुई ही थी कि उत्तर कोरिया के कुछ सुरक्षा गार्ड आए और कहा कि एक मसला खड़ा हो गया है। तो, जब तक वो हल नहीं होता, ये बस नहीं जाएगी। ड्राइवर ने बस का इंजन बंद कर दिया। बस में बैठे-बैठे कैल्विन सन ने उत्तर कोरिया में गुजारे अपने पिछले छह दिनों के बारे में सोचना शुरू कर दिया। उत्तर कोरिया, जो दुनिया का सबसे अलग-थलग देश है, जिसे हरमिट किंगडम यानी जोगियों का देश कहते हैं। उत्तर कोरिया आना कैल्विन के सबसे यादगार सफरों में से एक था। कैल्विन कहते हैं कि उन छह दिनों में वो बहुत-सी जगहों पर गए। खूब सारी मस्तियां कीं।
मगर उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि यंगाकडो होटल की पांचवीं मंजिल पर जाना उनके लिए इतनी बड़ी मुसीबत बन जाएगा। जब गार्ड ने उन्हें बस से उतरने के लिए कहा, तब भी उनके जहन में ये ख्याल नहीं आया कि उन्होंने यंगाकडो होटल की पांचवीं मंजिल पर जाने की बहुत बड़ी भूल की थी।
मगर उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि यंगाकडो होटल की पांचवीं मंजिल पर जाना उनके लिए इतनी बड़ी मुसीबत बन जाएगा। जब गार्ड ने उन्हें बस से उतरने के लिए कहा, तब भी उनके जहन में ये ख्याल नहीं आया कि उन्होंने यंगाकडो होटल की पांचवीं मंजिल पर जाने की बहुत बड़ी भूल की थी।
Pyongyang International Airport
कैल्विन का सफर
कैल्विन, न्यूयॉर्क शहर में पैदा हुए और पले-बढ़े। उनके माता-पिता चीनी मूल के हैं। उम्र के बीसवें साल तक, वो न्यूयॉर्क राज्य से बाहर तक नहीं गए थे। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए जाने का उनका सफर घर से महज 20 मिनट की दूरी पर था। कैल्विन के जहन में तब तक कहीं और घूमने जाने का ख्याल आया ही नहीं था।
लेकिन, 2010 में अचानक वो मिस्र के सफर पर क्या गए, उन्हें पूरी दुनिया घूमने का शौक हो गया। कैल्विन ने एक ट्रैवेल ब्लॉग http://monsoondiaries.com/ शुरू किया। बहुत जल्द उनके चाहने वालों की तादाद तेजी से बढ़ने लगी। हर छुट्टी और वीकेंड पर कैल्विन एक नए देश की सैर पर निकल जाते। उनका मकसद था कि जिस देश में एक बार वो घूम आएं, वहां दोबारा न जाएं।
मेडिकल स्कूल में दूसरे साल की पढ़ाई के दौरान, गर्मी की छुट्टियों में कैल्विन ने एक साथ कई देशों के सफर पर जाने का फैसला किया। उन्होंने मध्य-पूर्व के देशों से शुरुआत करके किसी एशियाई देश मे अपनी ट्रिप खत्म करने का फैसला किया।
कैल्विन ने तय किया कि वो पहले से तयशुदा कार्यक्रम के हिसाब से नहीं चलेंगे। जब जहां जी चाहेगा, वहां चले जाएंगे। शुरुआत में उनका उत्तर कोरिया जाने का कोई प्लान नहीं था और प्योंगयांग के यंगाकडो होटल का नाम तो उनके ख्वाब में भी नहीं आया।
कैल्विन, न्यूयॉर्क शहर में पैदा हुए और पले-बढ़े। उनके माता-पिता चीनी मूल के हैं। उम्र के बीसवें साल तक, वो न्यूयॉर्क राज्य से बाहर तक नहीं गए थे। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए जाने का उनका सफर घर से महज 20 मिनट की दूरी पर था। कैल्विन के जहन में तब तक कहीं और घूमने जाने का ख्याल आया ही नहीं था।
लेकिन, 2010 में अचानक वो मिस्र के सफर पर क्या गए, उन्हें पूरी दुनिया घूमने का शौक हो गया। कैल्विन ने एक ट्रैवेल ब्लॉग http://monsoondiaries.com/ शुरू किया। बहुत जल्द उनके चाहने वालों की तादाद तेजी से बढ़ने लगी। हर छुट्टी और वीकेंड पर कैल्विन एक नए देश की सैर पर निकल जाते। उनका मकसद था कि जिस देश में एक बार वो घूम आएं, वहां दोबारा न जाएं।
मेडिकल स्कूल में दूसरे साल की पढ़ाई के दौरान, गर्मी की छुट्टियों में कैल्विन ने एक साथ कई देशों के सफर पर जाने का फैसला किया। उन्होंने मध्य-पूर्व के देशों से शुरुआत करके किसी एशियाई देश मे अपनी ट्रिप खत्म करने का फैसला किया।
कैल्विन ने तय किया कि वो पहले से तयशुदा कार्यक्रम के हिसाब से नहीं चलेंगे। जब जहां जी चाहेगा, वहां चले जाएंगे। शुरुआत में उनका उत्तर कोरिया जाने का कोई प्लान नहीं था और प्योंगयांग के यंगाकडो होटल का नाम तो उनके ख्वाब में भी नहीं आया।
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उत्तर कोरिया
पर्यटकों के लिए सख्त नियम
2011 में अगर किसी पश्चिमी देश के नागरिक को उत्तर कोरिया जाना होता था, तो उसके लिए निजी टूर ऑपरेटर्स की मदद लेना जरूरी था। करीब आधा दर्जन टूर ऑपरेटर्स, चीन के रास्ते उत्तर कोरिया आने वालों के लिए गाइडेड टूर आयोजित करते थे। इन दौरों के नियम 2017 में और सख्त कर दिए गए।
इसकी एक वजह शायद एक पश्चिमी देश के छात्र का प्योंगयांग के यंगाकडो होटल की पांचवीं मंजिल पर जाना भी थी। बीजिंग में कुछ वक्त गुजारने के बाद भी कैल्विन के पास करीब एक हफ्ते की छुट्टियां बची थीं।
तो, उन्होंने इस वक्त को उत्तर कोरिया घूमने में खर्च करने का फैसला किया। वो उत्तर कोरिया के एक टूर ऑपरेटर के पास गए। बात बन गई और कैल्विन ने दुनिया के सबसे रहस्यमयी देश को देखने का फैसला कर लिया।
कैल्विन बताते हैं कि उत्तर कोरिया का वीजा फॉर्म भरना उनके लिए दुनिया का सबसे सरल वीजा फॉर्म भरने का तजुर्बा था। उत्तर कोरिया जाने के लिए पासपोर्ट देने की भी जरूरत नहीं थी। न्यूयॉर्क लौटने से पहले कैल्विन सन के लिए उत्तर कोरिया आखिरी पड़ाव था।
2011 में अगर किसी पश्चिमी देश के नागरिक को उत्तर कोरिया जाना होता था, तो उसके लिए निजी टूर ऑपरेटर्स की मदद लेना जरूरी था। करीब आधा दर्जन टूर ऑपरेटर्स, चीन के रास्ते उत्तर कोरिया आने वालों के लिए गाइडेड टूर आयोजित करते थे। इन दौरों के नियम 2017 में और सख्त कर दिए गए।
इसकी एक वजह शायद एक पश्चिमी देश के छात्र का प्योंगयांग के यंगाकडो होटल की पांचवीं मंजिल पर जाना भी थी। बीजिंग में कुछ वक्त गुजारने के बाद भी कैल्विन के पास करीब एक हफ्ते की छुट्टियां बची थीं।
तो, उन्होंने इस वक्त को उत्तर कोरिया घूमने में खर्च करने का फैसला किया। वो उत्तर कोरिया के एक टूर ऑपरेटर के पास गए। बात बन गई और कैल्विन ने दुनिया के सबसे रहस्यमयी देश को देखने का फैसला कर लिया।
कैल्विन बताते हैं कि उत्तर कोरिया का वीजा फॉर्म भरना उनके लिए दुनिया का सबसे सरल वीजा फॉर्म भरने का तजुर्बा था। उत्तर कोरिया जाने के लिए पासपोर्ट देने की भी जरूरत नहीं थी। न्यूयॉर्क लौटने से पहले कैल्विन सन के लिए उत्तर कोरिया आखिरी पड़ाव था।
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अमरीका में बनी हर चीज हमारी दुश्मन है
जैसे अलग ही दुनिया में आ गए
कैल्विन के साथ करीब 20 अमरीकी, यूरोपीय और चीनी यात्री भी उस प्राइवेट टूर ऑपरेटर के साथ उत्तर कोरिया की सैर पर जा रहे थे। ज्यादातर युवा थे। जब उन लोगों को उत्तर कोरिया में वक्त बिताने के तौर तरीके बताए जा रहे थे, तो टूर ऑपरेटर्स ने उन्हें समझाया कि हमेशा गाइड की बात मानें। उत्तर कोरिया की संस्कृति के प्रति सम्मान दिखाएं।
उन्हें उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में यंगाकडो होटल में ठहरना था। इस दौरान कभी भी ये नहीं बताया गया कि उन्हें होटल की पांचवीं मंजिल पर नहीं जाना है। कैल्विन बताते हैं कि उत्तर कोरिया पहुंचते ही उन्हें एहसास हुआ कि जैसे एकदम अलग ही दुनिया में आ गए हैं। जहां चीन चटख रंगों से लबरेज था, वहीं उत्तर कोरिया में सारे रंग उदासी वाले थे। मानो, खुदा ने उत्तर कोरिया पर दुखों का साया डाल दिया हो।
उत्तर कोरिया की इमारतें, पोस्टर, रास्ता बताने वाले निशान और यहां तक कि लोगों के कपड़े भी सफेद, भूरे या काले थे। कुछ-कुछ लाल रंग भी दिख जाता था, जो कि सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का रंग था। कैल्विन कहते हैं कि उन्हें ऐसा लगा कि वो टाइम मशीन पर सवार होकर 70 के दशक के सोवियत संघ पहुंच गए हों। ज्यादातर गाइड उम्र के चालीसवें दशक मे थे। दो मर्द थे और दो महिलाएं। उन्होंने बताया कि वो पहले उत्तर कोरिया की सेना में थे।
कैल्विन के साथ करीब 20 अमरीकी, यूरोपीय और चीनी यात्री भी उस प्राइवेट टूर ऑपरेटर के साथ उत्तर कोरिया की सैर पर जा रहे थे। ज्यादातर युवा थे। जब उन लोगों को उत्तर कोरिया में वक्त बिताने के तौर तरीके बताए जा रहे थे, तो टूर ऑपरेटर्स ने उन्हें समझाया कि हमेशा गाइड की बात मानें। उत्तर कोरिया की संस्कृति के प्रति सम्मान दिखाएं।
उन्हें उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में यंगाकडो होटल में ठहरना था। इस दौरान कभी भी ये नहीं बताया गया कि उन्हें होटल की पांचवीं मंजिल पर नहीं जाना है। कैल्विन बताते हैं कि उत्तर कोरिया पहुंचते ही उन्हें एहसास हुआ कि जैसे एकदम अलग ही दुनिया में आ गए हैं। जहां चीन चटख रंगों से लबरेज था, वहीं उत्तर कोरिया में सारे रंग उदासी वाले थे। मानो, खुदा ने उत्तर कोरिया पर दुखों का साया डाल दिया हो।
उत्तर कोरिया की इमारतें, पोस्टर, रास्ता बताने वाले निशान और यहां तक कि लोगों के कपड़े भी सफेद, भूरे या काले थे। कुछ-कुछ लाल रंग भी दिख जाता था, जो कि सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का रंग था। कैल्विन कहते हैं कि उन्हें ऐसा लगा कि वो टाइम मशीन पर सवार होकर 70 के दशक के सोवियत संघ पहुंच गए हों। ज्यादातर गाइड उम्र के चालीसवें दशक मे थे। दो मर्द थे और दो महिलाएं। उन्होंने बताया कि वो पहले उत्तर कोरिया की सेना में थे।