{"_id":"5b8d133242c79246553379fe","slug":"do-not-check-email-after-office-know-the-reason","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"ऑफिस के बाद ईमेल चेक मत कीजिए, वजह जान लेंगे तो कभी हाथ नहीं लगाएंगे","category":{"title":"Weird Stories","title_hn":"अजब गजब","slug":"weird-stories"}}
ऑफिस के बाद ईमेल चेक मत कीजिए, वजह जान लेंगे तो कभी हाथ नहीं लगाएंगे
फीचर टीम, अमर उजाला
Updated Mon, 03 Sep 2018 04:43 PM IST
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छुट्टी के दिन आप ऑफिस के कोई काम करें या ना करें, लेकिन अगर आप वहां के ईमेल देखते रहते हैं तो काम से अलग नहीं हो पाते। किसी नौकरीपेशा आदमी के लिए वीकेंड की छुट्टी से पहले ऑफिस का कंप्यूटर लॉग-ऑफ करने से बेहतर पल दूसरा नहीं होता। कंप्यूटर बंद तो समझिए काम बंद। ईमेल बंद और उसके साथ आने वाला तनाव भी बंद, लेकिन ऐसा हो नहीं पाता।
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छुट्टी के दिन ईमेल क्यों?
रोमेन गोनॉर्ड फ्रांस की एक आईटी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी 'स्माइल' में टेक्निकल एक्सपर्ट हैं। गोनॉर्ड शुरुआत में ऑफिस के ईमेल इसलिए देखते थे ताकि कोई महत्वपूर्ण सूचना छूट ना जाए, लेकिन अब उन्हें इसकी आदत हो गई है। गोनॉर्ड अब फेसबुक या ट्विटर टाइमलाइन की तरह ऑफिस के ईमेल भी चेक करते रहते हैं। फ्रांस की सरकार ने सप्ताहांत की छुट्टियों को बचाने के लिए पिछले साल एक बड़ा फैसला किया था।
फ्रांस ने एक कानून बनाया जिसके तहत 50 या ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी के लोग ऑफिस में काम के घंटे पूरे कर लेने के बाद ईमेल चेक करने के लिए मजबूर नहीं हैं। सितंबर 2015 में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि सूचनाओं की अधिकता फ्रांस के कामकाजी वर्ग की सेहत बिगाड़ रही है। इसी के बाद फ्रांस सरकार 'राइट टू डिसकनेक्ट' कानून बनाया।
फ्रेंच मैनेजमेंट कंसल्टेंसी कंपनी 'एलियस' के चेयरमैन ज़ेवियर लुकेटस बड़े आशान्वित हैं। वे कहते हैं, "काम के घंटे खत्म हो जाने के बाद ऑफिस के मेल चेक करने या जवाब देने के लिए मजबूर ना होने का अधिकार फ्रांस के लोगों को पसंद आ रहा है और यह व्यवहारिक भी है।" साइंस कंसल्टेंसी कंपनी 'कॉग्स' में काम करने वाले गैटन डि लेवियॉन ने नया तरीका निकाला है। वे क्रोम की एक सर्विस बूमरैंग (Boomerang) का सहारा लेते हैं। यह उनके ईमेल को इनबॉक्स तक पहुंचने में देर करा देता है।
लेवियॉन कोशिश करते हैं कि ऑफिस से निकलने के बाद वे ईमेल चेक ना करें। दिन में 15 मिनट से लेकर 2 घंटे तक वे ईमेल की तरफ देखते भी नहीं। फ्रांस में 'राइट टू डिसकनेक्ट' कानून बनने के बाद जर्मनी में भी बदलाव की मांग उठी। कर्मचारी संगठन ऐसी मांग करने लगे।
रोमेन गोनॉर्ड फ्रांस की एक आईटी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी 'स्माइल' में टेक्निकल एक्सपर्ट हैं। गोनॉर्ड शुरुआत में ऑफिस के ईमेल इसलिए देखते थे ताकि कोई महत्वपूर्ण सूचना छूट ना जाए, लेकिन अब उन्हें इसकी आदत हो गई है। गोनॉर्ड अब फेसबुक या ट्विटर टाइमलाइन की तरह ऑफिस के ईमेल भी चेक करते रहते हैं। फ्रांस की सरकार ने सप्ताहांत की छुट्टियों को बचाने के लिए पिछले साल एक बड़ा फैसला किया था।
फ्रांस ने एक कानून बनाया जिसके तहत 50 या ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी के लोग ऑफिस में काम के घंटे पूरे कर लेने के बाद ईमेल चेक करने के लिए मजबूर नहीं हैं। सितंबर 2015 में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि सूचनाओं की अधिकता फ्रांस के कामकाजी वर्ग की सेहत बिगाड़ रही है। इसी के बाद फ्रांस सरकार 'राइट टू डिसकनेक्ट' कानून बनाया।
फ्रेंच मैनेजमेंट कंसल्टेंसी कंपनी 'एलियस' के चेयरमैन ज़ेवियर लुकेटस बड़े आशान्वित हैं। वे कहते हैं, "काम के घंटे खत्म हो जाने के बाद ऑफिस के मेल चेक करने या जवाब देने के लिए मजबूर ना होने का अधिकार फ्रांस के लोगों को पसंद आ रहा है और यह व्यवहारिक भी है।" साइंस कंसल्टेंसी कंपनी 'कॉग्स' में काम करने वाले गैटन डि लेवियॉन ने नया तरीका निकाला है। वे क्रोम की एक सर्विस बूमरैंग (Boomerang) का सहारा लेते हैं। यह उनके ईमेल को इनबॉक्स तक पहुंचने में देर करा देता है।
लेवियॉन कोशिश करते हैं कि ऑफिस से निकलने के बाद वे ईमेल चेक ना करें। दिन में 15 मिनट से लेकर 2 घंटे तक वे ईमेल की तरफ देखते भी नहीं। फ्रांस में 'राइट टू डिसकनेक्ट' कानून बनने के बाद जर्मनी में भी बदलाव की मांग उठी। कर्मचारी संगठन ऐसी मांग करने लगे।
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छुट्टी है तो थकान मिटाइए
जर्मन ऑटो कंपनी फॉक्सवैगन उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है, जिन्होंने शुरुआत में ही यह बात मान ली। फॉक्सवैगन कंपनी ने नियम बनाया है कि किसी कर्मचारी के काम के घंटे शुरू होने से आधे घंटे पहले और काम खत्म होने के आधे घंटे बाद उसे कोई ईमेल नहीं भेजा जाएगा। वीकेंड पर भी कोई ईमेल नहीं भेजा जाएगा। ऑटो कंपनी डेमलर के कर्मचारी छुट्टी के दिन अपनी ईमेल नहीं खोल सकते।
सामंता रूपेल जर्मनी में दो पार्ट-टाइम जॉब करती हैं- एक यूनिवर्सिटी में और दूसरी चैरिटी में। रूपेल को ऑफिस की तरफ से एक लैपटॉप दिया गया है। यह उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन उनको यह भी लगता है कि लैपटॉप ने उनको ऑफिस डेस्क से बांध दिया है। वह काम से अलग हो ही नहीं पातीं। "वीकेंड पर भी ईमेल चेक करने की सुविधा अच्छी है, लेकिन कई बार लोग सिर्फ इसलिए काम लाद देते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि आप हर समय जुड़े हुए हैं।"
रूपेल के बॉस यह सुनिश्चित करते हैं कि यदि वे वीकेंड पर काम करें तो उसके बदले उनको छुट्टी दी जाए। फिर भी रूपेल को लगता है कि तनाव से भरी नौकरियों में हर वक्त ईमेल पर उपलब्ध रहने का मतलब है कि आप हर वक्त तनाव के साथ हैं। रूपेल के कई दोस्त जर्मनी की बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में काम करते हैं। वीकेंड पर जब कभी वे मिलते हैं तो काम के बारे में बातें होती हैं।
"वे लोग छुट्टी के दिनों में ईमेल चेक नहीं कर सकते। इससे वे निराश रहते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह ठीक है, वरना उन्हें दिन में 24 घंटे काम करने पड़ते।" अपने दोस्तों के बारे में रूपेल कहती हैं, "कामकाजी दिनों में वे घर आकर डिनर करने के बाद भी ईमेल चेक करते हैं। अगर उनके पास वीकेंड पर ईमेल देखने का मौका होता तो वे यह भी करते। आगे बढ़ने की होड़ में भला कौन पीछे रहना चाहता है।" ब्रिटेन में चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ़ पर्सनेल एंड डेवलपमेंट (CIPD) ने 2000 कर्मचारियों का सर्वे किया। सर्वे में दो तिहाई लोगों ने कहा कि काम के घंटे खत्म होने के बाद भी वे दिन में कम से कम 5 बार ऑफिस के ईमेल देखते हैं। एक तिहाई लोगों ने कहा कि घर पर रहते हुए भी वे मानसिक रूप से काम से अलग नहीं हो पाते।
जर्मन ऑटो कंपनी फॉक्सवैगन उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल है, जिन्होंने शुरुआत में ही यह बात मान ली। फॉक्सवैगन कंपनी ने नियम बनाया है कि किसी कर्मचारी के काम के घंटे शुरू होने से आधे घंटे पहले और काम खत्म होने के आधे घंटे बाद उसे कोई ईमेल नहीं भेजा जाएगा। वीकेंड पर भी कोई ईमेल नहीं भेजा जाएगा। ऑटो कंपनी डेमलर के कर्मचारी छुट्टी के दिन अपनी ईमेल नहीं खोल सकते।
सामंता रूपेल जर्मनी में दो पार्ट-टाइम जॉब करती हैं- एक यूनिवर्सिटी में और दूसरी चैरिटी में। रूपेल को ऑफिस की तरफ से एक लैपटॉप दिया गया है। यह उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन उनको यह भी लगता है कि लैपटॉप ने उनको ऑफिस डेस्क से बांध दिया है। वह काम से अलग हो ही नहीं पातीं। "वीकेंड पर भी ईमेल चेक करने की सुविधा अच्छी है, लेकिन कई बार लोग सिर्फ इसलिए काम लाद देते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि आप हर समय जुड़े हुए हैं।"
रूपेल के बॉस यह सुनिश्चित करते हैं कि यदि वे वीकेंड पर काम करें तो उसके बदले उनको छुट्टी दी जाए। फिर भी रूपेल को लगता है कि तनाव से भरी नौकरियों में हर वक्त ईमेल पर उपलब्ध रहने का मतलब है कि आप हर वक्त तनाव के साथ हैं। रूपेल के कई दोस्त जर्मनी की बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में काम करते हैं। वीकेंड पर जब कभी वे मिलते हैं तो काम के बारे में बातें होती हैं।
"वे लोग छुट्टी के दिनों में ईमेल चेक नहीं कर सकते। इससे वे निराश रहते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि यह ठीक है, वरना उन्हें दिन में 24 घंटे काम करने पड़ते।" अपने दोस्तों के बारे में रूपेल कहती हैं, "कामकाजी दिनों में वे घर आकर डिनर करने के बाद भी ईमेल चेक करते हैं। अगर उनके पास वीकेंड पर ईमेल देखने का मौका होता तो वे यह भी करते। आगे बढ़ने की होड़ में भला कौन पीछे रहना चाहता है।" ब्रिटेन में चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ़ पर्सनेल एंड डेवलपमेंट (CIPD) ने 2000 कर्मचारियों का सर्वे किया। सर्वे में दो तिहाई लोगों ने कहा कि काम के घंटे खत्म होने के बाद भी वे दिन में कम से कम 5 बार ऑफिस के ईमेल देखते हैं। एक तिहाई लोगों ने कहा कि घर पर रहते हुए भी वे मानसिक रूप से काम से अलग नहीं हो पाते।
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स्मार्टफोन ने बिगाड़ा बैलेंस
मैनचेस्टर बिजनेस स्कूल में मनोविज्ञान के प्रोफेसर और सीआईपीडी के प्रेसिडेंट कैरी कूपर इसके लिए स्मार्टफोन को जिम्मेदार बताते हैं। "आप डिनर के लिए बाहर जाते हैं तो अपना लैपटॉप नहीं ले जाते, लेकिन मोबाइल फोन हमेशा अपने साथ रखते हैं। इस स्मार्टफोन ने ही सब कुछ बदल दिया है।" लेहाई यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर ल्यूबा बेल्किन कहती हैं, "दफ्तर के ईमेल देखते रहने की अपेक्षा जितनी ज्यादा होगी, उस पर खर्च होने वाला समय भी उतना ही ज्यादा होगा और भावनात्मक थकान भी ज्यादा होगी।"
ईमेल बार-बार ना देखें तब भी असर पड़ता है। बेल्किन कहती हैं, "आप इस पर कितना समय खर्च करते हैं इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता। आप इसे देखते भर हैं तो भी नकारात्मक असर होता है।" बेल्किन और सहयोगियों ने दो रिसर्च पेपर से दिखाया है अगर आपसे कभी-कभी भी ऑफिस के ईमेल देखने की उम्मीद की जाती है तो इससे बेचैनी बढ़ती है- आपके लिए और आपके परिवार के लिए भी। वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी के रिसर्च में पाया गया जो लोग छुट्टियों में ऑफिस के ईमेल नहीं देखते, लेकिन अगर उनसे ऐसा करने की अपेक्षा की जाती है तो भी उनमें घबराहट रहती है।
परिवार और दोस्तों पर असर के अलावा सेहत के लिए भी गंभीर समस्याएं खड़ी होती हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की प्रोफेसर अन्ना कॉक्स कहती हैं, "यदि आप ऑफिस के काम से अलग नहीं हो पाते तो थकान से उबर नहीं पाते।" "शुरुआत में इसका असर आपकी उत्पादकता पर पड़ता है। जब आप काम करते हैं तो थके हुए होते हैं। अगर आप इस थकान से बाहर नहीं निकलते तो तमाम तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं होने लगती हैं।"
यूरोपियन वर्किंग कंडीशंस सर्वे से मिले आंकड़े ये दिखाते हैं कि जो लोग काम के घंटे खत्म होने के बाद भी काम करते रहते हैं, वे हृदय रोगों और मांसपेशियों के दर्द से ज्यादा परेशान होते हैं। लेकिन दुनिया को छुट्टियों में ऑफ़िस के ईमेल पर पूरी तरह पाबंदी लगाना भी मंजूर नहीं है।
मैनचेस्टर बिजनेस स्कूल में मनोविज्ञान के प्रोफेसर और सीआईपीडी के प्रेसिडेंट कैरी कूपर इसके लिए स्मार्टफोन को जिम्मेदार बताते हैं। "आप डिनर के लिए बाहर जाते हैं तो अपना लैपटॉप नहीं ले जाते, लेकिन मोबाइल फोन हमेशा अपने साथ रखते हैं। इस स्मार्टफोन ने ही सब कुछ बदल दिया है।" लेहाई यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर ल्यूबा बेल्किन कहती हैं, "दफ्तर के ईमेल देखते रहने की अपेक्षा जितनी ज्यादा होगी, उस पर खर्च होने वाला समय भी उतना ही ज्यादा होगा और भावनात्मक थकान भी ज्यादा होगी।"
ईमेल बार-बार ना देखें तब भी असर पड़ता है। बेल्किन कहती हैं, "आप इस पर कितना समय खर्च करते हैं इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता। आप इसे देखते भर हैं तो भी नकारात्मक असर होता है।" बेल्किन और सहयोगियों ने दो रिसर्च पेपर से दिखाया है अगर आपसे कभी-कभी भी ऑफिस के ईमेल देखने की उम्मीद की जाती है तो इससे बेचैनी बढ़ती है- आपके लिए और आपके परिवार के लिए भी। वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी के रिसर्च में पाया गया जो लोग छुट्टियों में ऑफिस के ईमेल नहीं देखते, लेकिन अगर उनसे ऐसा करने की अपेक्षा की जाती है तो भी उनमें घबराहट रहती है।
परिवार और दोस्तों पर असर के अलावा सेहत के लिए भी गंभीर समस्याएं खड़ी होती हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की प्रोफेसर अन्ना कॉक्स कहती हैं, "यदि आप ऑफिस के काम से अलग नहीं हो पाते तो थकान से उबर नहीं पाते।" "शुरुआत में इसका असर आपकी उत्पादकता पर पड़ता है। जब आप काम करते हैं तो थके हुए होते हैं। अगर आप इस थकान से बाहर नहीं निकलते तो तमाम तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं होने लगती हैं।"
यूरोपियन वर्किंग कंडीशंस सर्वे से मिले आंकड़े ये दिखाते हैं कि जो लोग काम के घंटे खत्म होने के बाद भी काम करते रहते हैं, वे हृदय रोगों और मांसपेशियों के दर्द से ज्यादा परेशान होते हैं। लेकिन दुनिया को छुट्टियों में ऑफ़िस के ईमेल पर पूरी तरह पाबंदी लगाना भी मंजूर नहीं है।
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पाबंदी उपाय नहीं है
फ्रांस में ही गोनॉर्ड इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि कानून अपने मकसद में कामयाब है या नहीं। गोनॉर्ड के बॉस कानून बनने से पहले भी उनको ईमेल चेक करने के लिए मजबूर नहीं करते थे, लेकिन अपने प्रोजेक्ट पर पूरी तरह नजर रखने के लिए वे खुद ईमेल से जुड़े रहते थे। "यदि आपकी कंपनी राइट टू डिसकनेक्ट कानून को लागू करती है और छुट्टी में कर्मचारियों के ईमेल बंद कर देती है तो आपके पास इसे मानने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं बचेगा। तब मैं वही तनाव महसूस करूंगा जिसे खत्म करने के लिए कानून बनाया गया था।"
दूसरे लोग भी महसूस करते हैं कि वीकेंड की छुट्टियों को कानून में बांध देने से कोई असर नहीं पड़ रहा। ना ही इस बात की संभावना है कि दूसरे देश भी ऐसा करेंगे। कॉक्स कहती हैं कि हम सिर्फ कामकाजी घंटों के दौरान काम करने से इतना आगे बढ़ चुके हैं कि ईमेल देखने का टाइम टेबल बनाना ब्रिटेन या अमरीका को मंजूर नहीं होगा।
कूपर कहते हैं, "इसे जबरन लागू नहीं किया जा सकता। यदि आपको नौकरी पर खतरा दिखता है और अगर फ्रांस की तरह देश में ज्यादा बेरोजगारी है तो आप कोर्ट जाकर इसे चुनौती दे सकते हैं।" कूपर को लगता है कि यहां कंपनी मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है, ताकि लोग छुट्टी के मजे ले सकें और ईमेल के बोझ से दूर रहें।
फ्रांस में ही गोनॉर्ड इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि कानून अपने मकसद में कामयाब है या नहीं। गोनॉर्ड के बॉस कानून बनने से पहले भी उनको ईमेल चेक करने के लिए मजबूर नहीं करते थे, लेकिन अपने प्रोजेक्ट पर पूरी तरह नजर रखने के लिए वे खुद ईमेल से जुड़े रहते थे। "यदि आपकी कंपनी राइट टू डिसकनेक्ट कानून को लागू करती है और छुट्टी में कर्मचारियों के ईमेल बंद कर देती है तो आपके पास इसे मानने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं बचेगा। तब मैं वही तनाव महसूस करूंगा जिसे खत्म करने के लिए कानून बनाया गया था।"
दूसरे लोग भी महसूस करते हैं कि वीकेंड की छुट्टियों को कानून में बांध देने से कोई असर नहीं पड़ रहा। ना ही इस बात की संभावना है कि दूसरे देश भी ऐसा करेंगे। कॉक्स कहती हैं कि हम सिर्फ कामकाजी घंटों के दौरान काम करने से इतना आगे बढ़ चुके हैं कि ईमेल देखने का टाइम टेबल बनाना ब्रिटेन या अमरीका को मंजूर नहीं होगा।
कूपर कहते हैं, "इसे जबरन लागू नहीं किया जा सकता। यदि आपको नौकरी पर खतरा दिखता है और अगर फ्रांस की तरह देश में ज्यादा बेरोजगारी है तो आप कोर्ट जाकर इसे चुनौती दे सकते हैं।" कूपर को लगता है कि यहां कंपनी मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है, ताकि लोग छुट्टी के मजे ले सकें और ईमेल के बोझ से दूर रहें।