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ये है 'ड्रैकुला अस्पताल' का भयानक सच, चूस रहा था लोगों के खून-पसीने की कमाई

Tue, 19 Dec 2017 02:40 PM IST
amarujala.com, Presented by: राजेश सैनी
amarujala.com, Presented by: राजेश सैनी Updated Tue, 19 Dec 2017 02:40 PM IST
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Black truth of the Fortis hospital at Gurugram
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आपको याद होगा गुरुग्राम के 'फोर्टिस अस्पताल' ने डेंगू बुखार से पीड़ित एक बच्चे का 18 लाख का बिल बनाया था और उस बच्चे की मौत हो गई थी। आपको ये भी आपको जरूर याद होगा। 


लेकिन ये 18 लाख का बिल बना कैसे..? अब ये नहीं जानेंगे तो कैसे पता चल पाएगा कि ये अस्पताल कैसे पैसे चूसने वाले ड्रैकुला बन गए हैं। पढ़िए इस रिपोर्ट काला सच में...  

 
Black truth of the Fortis hospital at Gurugram
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अपना मसीहा मानकर पूरे भरोसे के साथ जिनके पास हम अपने इलाज के लिए जाते है क्या आप जानते हैं वे 'ड्रैकुला' बनकर हमारा खून चूस रहे हैं। जी हां... ये मानवता के नाम पर लूटते हैं। ये जान बचाने के नाम पर लूटते हैं। 

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सितंबर माह में गुरूग्राम के फोर्टिस अस्पताल में डेंगी से पीड़ित सात साल की बच्ची आबिया की मौत हो गई थी। जबकि इलाज के लिए अस्पताल ने 1700 फीसदी मुनाफा वसूला था। 

 
Black truth of the Fortis hospital at Gurugram
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15 रुपये की सीरिंज के 200 रुपए तक वसूले गए हैं। बता दें इस मामले से साफ हो गया कि प्राइवेट अस्पताल अब लूट के अड्डे बन चुके हैं। राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण यानी एनपीपीए की इस पर मुहर भी लग चुकी है।

एनपीपीए के चलते ही ये काला सच सामने आ सका। नियामक ने कहा है कि फोर्टिस मैमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरूग्राम ने एक थ्रीवे स्टाप कॉक जो मरीज के हाथ पर ग्लूकोज आदी चढ़ाने के लिए सीरिंज के साथ लगाया जाता है।

 
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इस पर अस्पताल ने क्रय मूल्य पर 1737 प्रतिशत तक का मार्जिन वसूला। इसी तरह उपभोज्य सामग्री का क्रय मूल्य जहां 5.77 रुपये था, अस्पताल ने उसके लिए 106 रुपये प्रति इकाई वसूले। यहां उपभोज्य सामग्री में सीरिंज, दस्ताने व तौलिया आदि शामिल है।अस्पताल ने बच्ची के पिता को बिल थमाते हुए कहा था कि भुगतान करने पर ही लाश मिलेगी। 

बाद में जब इस मामले ने तूल पकड़ी तो एनपीपीए ने फोर्टिस हेल्थकेयर से कहा था कि वह इस मामले में बिलों की प्रति उपलब्ध करवाए। तब जाकर ड्रैकुला बने इस अस्पताल का काला सच सामने आ सका।
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