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OMG! नींबू से लेकर कोक तक,एबॉर्शन के ये उपाय जानकर ठोक लेंगे माथा
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Sun, 27 May 2018 09:10 AM IST
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डेमो इमेज
मॉडर्न जमाने में गर्भधारण रोकने या एबॉर्शन के लिए कई सुरक्षित उपाय मौजूद हैं। मगर पुराने जमाने में ऐसे-ऐसे उपाय किए जाते थे, जिन्हें जानने के बाद आप माथा पीट लेंगे।
चंबल सेंक्च्युरी में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
मगरमच्छ का मल
गर्भधारण रोकने के लिए महिला की योनि में मगरमच्छ का मल, शहद और सोडियम बाइकारबोनेट का घोल बनाकर डाला जाता था। ऐसा माना जाता था कि इस घोल की वजह से शुक्राणु अंदर नहीं जा सकते और अगर चले गए तो नष्ट हो जाते हैं।
गर्भधारण रोकने के लिए महिला की योनि में मगरमच्छ का मल, शहद और सोडियम बाइकारबोनेट का घोल बनाकर डाला जाता था। ऐसा माना जाता था कि इस घोल की वजह से शुक्राणु अंदर नहीं जा सकते और अगर चले गए तो नष्ट हो जाते हैं।
Beaver
जानवरों की मदद
महिला की जांघों पर वीजल नाम के जानवर का अंडाशय और एक हड्डी बांध दी जाती थी। ऐसा करने से वह गर्भवती नहीं होती थी। हालांकि, इसका सक्सेस रेट क्या था इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। यही नहीं, 16वीं शताब्दी में कनाडा में बीवर नाम के जानवर के अंडाशय को शराब में डुबोकर खिलाया जाता था। इससे भ्रूण नष्ट हो जाता था।
महिला की जांघों पर वीजल नाम के जानवर का अंडाशय और एक हड्डी बांध दी जाती थी। ऐसा करने से वह गर्भवती नहीं होती थी। हालांकि, इसका सक्सेस रेट क्या था इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। यही नहीं, 16वीं शताब्दी में कनाडा में बीवर नाम के जानवर के अंडाशय को शराब में डुबोकर खिलाया जाता था। इससे भ्रूण नष्ट हो जाता था।
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Water
लोहे का पानी
ग्रीस में महिलाओं को वह पानी पिलाया जाता था जिसमें लोहार अपने औजार ठंडे करता था। इससे शुक्राणु योनि में ही नष्ट हो जाते थे। यही नहीं, चीन में तो महिला को लेड और मर्करी का घोल पिलाया जाता था। यह घोल इतना खतरनाक होता है कि उससे गर्भाशय क्या, किडनी और दिमाग भी खराब हो जाते थे। महिला की जान पर बन आती थी।
ग्रीस में महिलाओं को वह पानी पिलाया जाता था जिसमें लोहार अपने औजार ठंडे करता था। इससे शुक्राणु योनि में ही नष्ट हो जाते थे। यही नहीं, चीन में तो महिला को लेड और मर्करी का घोल पिलाया जाता था। यह घोल इतना खतरनाक होता है कि उससे गर्भाशय क्या, किडनी और दिमाग भी खराब हो जाते थे। महिला की जान पर बन आती थी।
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Coke
कोक
क्या कोक पीने से शुक्राणुओं को मारा जा सकता है?
सन् 1950 से 1960 के बीच हार्वड मेडिकल स्कूल ने बर्थ कंट्रोल लैब में कई तरह के शोध किए। एंडरसन, हिल और अंपीयर नाम के वैज्ञानिकों ने चार तरह की कोक को शुक्राणुओं के साथ मिलाया। उन्होंने देखा कि डायट कोक ने सभी शुक्राणुओं को एक मिनट के भीतर मार दिया। वहीं बाकी 41 प्रतिशत दूसरी तरह की कोक में तैरते ही रहे। एंडरसन ने बताया कि कोक में कारबोनिक एसिड ने शुक्राणुओं को मारा।
क्या कोक पीने से शुक्राणुओं को मारा जा सकता है?
सन् 1950 से 1960 के बीच हार्वड मेडिकल स्कूल ने बर्थ कंट्रोल लैब में कई तरह के शोध किए। एंडरसन, हिल और अंपीयर नाम के वैज्ञानिकों ने चार तरह की कोक को शुक्राणुओं के साथ मिलाया। उन्होंने देखा कि डायट कोक ने सभी शुक्राणुओं को एक मिनट के भीतर मार दिया। वहीं बाकी 41 प्रतिशत दूसरी तरह की कोक में तैरते ही रहे। एंडरसन ने बताया कि कोक में कारबोनिक एसिड ने शुक्राणुओं को मारा।