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लड़की ने चेहरे पर ब्लड पोतकर फेसबुक पर डाली पोस्ट, वजह जानकर चौंक जाएंगे
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 16 Jan 2018 06:44 PM IST
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Yazmina Jade
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भारतीय समाज में महिलाओं की माहवारी को लेकर कई तरह की अवधारणाएं हैं, लेकिन अब समाज में इसे लेकर कई सारी प्रगतिशील चर्चाएं होने लगी है। इसे अंग्रेजी में हम 'Menstrual Periods' भी कहते हैं।
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दरअसल, इस लड़की ने अपने पीरियड्स के ब्लड को चेहरे पर लगाया ताकि लोग इसे हेय दृष्टि से न देखें। महिला ने फिर इसे अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट कर दिया फिर क्या था तमाम तरह के कमेंट भी आने लगे, जिसमें कई यूजर्स ने इस पोस्ट के लिए लिखा की ये लड़की मानसिक तौर पर बीमार है।
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लेकिन याजमीना का कहना है कि वो ये काम अपनी बॉडी को रिकनेक्ट करने के लिए करती है, जिसे हम सामाजिक शर्मिंदगी के चलते नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि मैं ऐसा करके लोगों को दिखाना चाहती थी कि ये कोई शर्मिंदा होने वाली चीज नहीं है, बल्कि ये हमारी बॉडी का ही एक हिस्सा है। याजमीना का कहना है कि आज की मार्डन लाइफ में इसे लेकर शर्मिंदगी नहीं महसूस की जा सकती। फिर भी इससे जुड़े कई तरह के भ्रम को तवज्जो दी जाती है।
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वह ये भी कहती हैं कि महिलाएं इसे सीक्रेट रखती हैं ऐसे में वो इसका ब्लड अपने चेहरे पर लगाकर महिलाओं को ये बताना चाहती हैं कि इसे चोरी-छिपे मैनेज करने की जरूरत नहीं है। इस वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया जाने लगा। इतना ही नहीं इसके साथ ही यूजर्स ने उन्हें मानसिक रूप से बीमार बताया और मेन्टल इंस्टीट्यूशन जाने की सलाह दे डाली।
लेकिन ये भी हकीकत है कि इस संबंध में सोशल मीडिया पर तमाम लोग अब खुलकर लिखने लगे हैं। चाहे वह महिला हो या पुरुष सभी इस मसले पर अब खुलकर बोल रहे हैं। ऐसी ही एक पोस्ट वीनित बिश्नोई नामक शख्स ने शेयर की है। इस पोस्ट में याजमीना के बारे में लिखा गया है।
लेकिन ये भी हकीकत है कि इस संबंध में सोशल मीडिया पर तमाम लोग अब खुलकर लिखने लगे हैं। चाहे वह महिला हो या पुरुष सभी इस मसले पर अब खुलकर बोल रहे हैं। ऐसी ही एक पोस्ट वीनित बिश्नोई नामक शख्स ने शेयर की है। इस पोस्ट में याजमीना के बारे में लिखा गया है।
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यह कोई श्राप नहीं
बिश्नोई लिखते हैं यह कोई श्राप नहीं बल्कि महिलाओं की शारीरिक संरचना में प्राकृतिक परिवर्तन का हिस्सा है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये काफी सुलझी हुई प्रक्रिया है लेकिन वहीं जब इसे धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाता है तो ये एक तरह से कर्मकांड से जुड़ा एक बड़ा ही अजीबों गरीब मान्यताएं लेकर जन्म लेता है। हालांकि आज का आधुनिक समाज पुरुष तथा महिला में कोई फर्क नहीं करता। इस आधुनिक दौर में महिलाएं, पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं।
बिश्नोई लिखते हैं यह कोई श्राप नहीं बल्कि महिलाओं की शारीरिक संरचना में प्राकृतिक परिवर्तन का हिस्सा है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये काफी सुलझी हुई प्रक्रिया है लेकिन वहीं जब इसे धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाता है तो ये एक तरह से कर्मकांड से जुड़ा एक बड़ा ही अजीबों गरीब मान्यताएं लेकर जन्म लेता है। हालांकि आज का आधुनिक समाज पुरुष तथा महिला में कोई फर्क नहीं करता। इस आधुनिक दौर में महिलाएं, पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं।