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वो 5 घटनाएं, जिनमें स्पेलिंग और ग्रामर की गलती से हुआ करोड़ों का नुकसान...
बीबीसी
Updated Mon, 18 Sep 2017 11:27 AM IST
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Writing
- फोटो : Pexels
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'सिर्फ एक नुख्त के हेर-फेर से खुदा जुदा हो जाता है'
Plane
गलती से बिक गए सस्ते टिकट
क्या आप टोरंटो, कनाडा और साइप्रस की यात्रा बिजनेस क्लास से करना चाहते हैं और वह भी महज 39 डॉलर में? जी हां, सपने जैसा दिखने वाला टिकट का यह रेट साल 2006 में इटली की एयरलाइन एलिटालिया ने रख दिया था। दरअसल, इस एयरलाइन कंपनी ने टिकट का दाम 3,900 डॉलर लिखने की जगह सिर्फ 39 डॉलर लिख दिया। जब तक कंपनी अपनी इस भूल को सुधारती तब तक करीब 2000 यात्रियों ने अपने टिकट बुक कर लिए। कंपनी ने जब ये टिकट कैंसिल करने की बात कही तो उसे यात्रियों के गुस्से का सामना करना पड़ा। बाद में कंपनी ने अपनी प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए इसी कीमत पर जितने भी टिकट बुक हुए उन्हें यात्रा करवाने का फैसला लिया। इस गलती की वजह से एलिटालिया कंपनी को 70 लाख डॉलर से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा।
पढ़ें: समंदर किनारे टहल रही थी महिला, तभी इस डरावनी चीज पर पड़ गई नजर
क्या आप टोरंटो, कनाडा और साइप्रस की यात्रा बिजनेस क्लास से करना चाहते हैं और वह भी महज 39 डॉलर में? जी हां, सपने जैसा दिखने वाला टिकट का यह रेट साल 2006 में इटली की एयरलाइन एलिटालिया ने रख दिया था। दरअसल, इस एयरलाइन कंपनी ने टिकट का दाम 3,900 डॉलर लिखने की जगह सिर्फ 39 डॉलर लिख दिया। जब तक कंपनी अपनी इस भूल को सुधारती तब तक करीब 2000 यात्रियों ने अपने टिकट बुक कर लिए। कंपनी ने जब ये टिकट कैंसिल करने की बात कही तो उसे यात्रियों के गुस्से का सामना करना पड़ा। बाद में कंपनी ने अपनी प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए इसी कीमत पर जितने भी टिकट बुक हुए उन्हें यात्रा करवाने का फैसला लिया। इस गलती की वजह से एलिटालिया कंपनी को 70 लाख डॉलर से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा।
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Air Force
गलत जगह लगाया कौमा
अमेरीका की बड़ी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने वायु सेना के लिए हर्क्यूलिस विमान बनाने का एक समझौता हस्ताक्षर किया। इस योजना में कई साल लगने थे। इसलिए साल 1999 में जब यह समझौता हुआ तो उसमें लिखा गया कि समय के साथ एयरप्लेनों की कीमत में इजाफा हो सकता है। गलती से उस समय एयरोप्लेन की जो कीमत लिखी गई उसमें एक दशमलव की जगह कौमा लगा दिया गया। उस समय कॉन्ट्रैक्ट की पूरी लागत नहीं लिखी गई। बाद में लॉकहीड कंपनी के एग्जिक्यूटिव ने बताया कि इस एक कौमा के गलत जगह लगने की वजह से कंपनी को 7 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।
पढ़ें: खुद सूप पी गया डिलीवरी ब्वॉय, कस्टमर के डब्बे में डाल दी ये गंदी चीज
अमेरीका की बड़ी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने वायु सेना के लिए हर्क्यूलिस विमान बनाने का एक समझौता हस्ताक्षर किया। इस योजना में कई साल लगने थे। इसलिए साल 1999 में जब यह समझौता हुआ तो उसमें लिखा गया कि समय के साथ एयरप्लेनों की कीमत में इजाफा हो सकता है। गलती से उस समय एयरोप्लेन की जो कीमत लिखी गई उसमें एक दशमलव की जगह कौमा लगा दिया गया। उस समय कॉन्ट्रैक्ट की पूरी लागत नहीं लिखी गई। बाद में लॉकहीड कंपनी के एग्जिक्यूटिव ने बताया कि इस एक कौमा के गलत जगह लगने की वजह से कंपनी को 7 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।
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Stock
- फोटो : REUTERS
शब्दों की हेरा-फेरी
दिसंबर 2005 में जापान की एक स्टॉक मार्केट कंपनी को टाइपिंग गलती की वजह से बहुत बड़ा नुकसान सहना पड़ा। जे-कॉम नामक कंपनी के शेयर उस वक्त अचानक गिर गए जब मिजुहो सिक्योरिटी के एक ब्रोकर ने प्रति येन के हिसाब से 6 लाख 10 हजार शेयर बेचने शुरू कर दिए। दरअसल, उस ब्रोकर को एक शेयर 6 लाख 10 हजार येन में बेचना था। शब्दों के इस हेर-फेर की वजह से मिजुहो को लगभग 33 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।
पढ़ें: बेड के पीछे दिखी मरी हुई छिपकली, बाद में पता चला ये तो कुछ और ही था
दिसंबर 2005 में जापान की एक स्टॉक मार्केट कंपनी को टाइपिंग गलती की वजह से बहुत बड़ा नुकसान सहना पड़ा। जे-कॉम नामक कंपनी के शेयर उस वक्त अचानक गिर गए जब मिजुहो सिक्योरिटी के एक ब्रोकर ने प्रति येन के हिसाब से 6 लाख 10 हजार शेयर बेचने शुरू कर दिए। दरअसल, उस ब्रोकर को एक शेयर 6 लाख 10 हजार येन में बेचना था। शब्दों के इस हेर-फेर की वजह से मिजुहो को लगभग 33 करोड़ डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।
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S
- फोटो : Boldsky
'S' ने छुड़वाई ढेरों नौकरियां
ब्रिटेन में जो भी कंपनी शुरू होती है उसे पहले डिपार्टमेंट ऑफ एंटरप्राइस, एनर्जी और इंडस्ट्रियल स्ट्रेटर्जी (BEIS) में अपना नाम दर्ज करवाना होता है। इसी तरह यदि कोई कंपनी बंद होना चाहती है तो पहले उसे BEIS को सूचित करना होता है। साल 2009 में एक कंपनी 'टेलर एंड सन्स' ने अपना काम बंद करने की सूचना इस विभाग को मिली। लेकिन असल में जो कंपनी काम बंद कर रही थी वह थी 'टेलर एंड सन'। 1875 से चली आ रही टेलर एंड सन्स कंपनी में एक अक्षर की छोटी सी गलती की वजह से 250 कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इस कंपनी के पूर्व सह-मालिक फिलिप डेविसन सर्बी ने अपने नुकसान की भरपाई के लिए 80 लाख पाउंड का हर्जाना मांगा।
पढ़ें: टीचर को गलत साबित करने चले थे मंत्री जी, खुद का उड़वा लिया मजाक
ब्रिटेन में जो भी कंपनी शुरू होती है उसे पहले डिपार्टमेंट ऑफ एंटरप्राइस, एनर्जी और इंडस्ट्रियल स्ट्रेटर्जी (BEIS) में अपना नाम दर्ज करवाना होता है। इसी तरह यदि कोई कंपनी बंद होना चाहती है तो पहले उसे BEIS को सूचित करना होता है। साल 2009 में एक कंपनी 'टेलर एंड सन्स' ने अपना काम बंद करने की सूचना इस विभाग को मिली। लेकिन असल में जो कंपनी काम बंद कर रही थी वह थी 'टेलर एंड सन'। 1875 से चली आ रही टेलर एंड सन्स कंपनी में एक अक्षर की छोटी सी गलती की वजह से 250 कर्मचारियों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा। इस कंपनी के पूर्व सह-मालिक फिलिप डेविसन सर्बी ने अपने नुकसान की भरपाई के लिए 80 लाख पाउंड का हर्जाना मांगा।
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