Nuclear Reactor on Moon: अतंरिक्ष में वर्चस्व कायम करने के लिए दुनिया के कई देशों के बीच होड़ मची हुई है। इनमें अमेरिका, चीन और रूस जैसे देशों का नाम प्रमुख रूप से शामिल है। अब इस बीच अतंरिक्ष को लेकर अमेरिका बड़ी तैयारी कर रहा है। अंतरिक्ष में इंसानों को भेज चुका अमेरिका अब न्यूक्लियर पावर को भेजने की तैयारी में जुटा है। व्हाइट हाउस ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसनी दुनिया की अंतरिक्ष एजेंसियों का हैरान कर दिया है। इसके साथ ही दुनिया की धड़कने बढ़ गई हैं।
व्हाइट हाउस ने नासा और रक्षा विभाग को चंद्रमा पर न्यूक्लियर रिएक्टर लगाने का आदेश दिया है, जिसकी डेडलाइन 2030 तक तय की गई है। अब लोगों के मन में कई तरह के सवाल है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर अमेरिका चंद्रमा पर क्यों न्यूक्लियर रिएक्टर लगाना चाहता है। आइए जानता हैं कि आखिर पूरा मामला क्या है?
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अमेरिका के इस फैसले ने बढ़ाई दुनिया की धड़कनें
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व्हाइट हाउस ने एक नया आदेश जारी किया है। अब अमेरिका परमाणु शक्ति को अंतरिक्ष में अपना हथियार बनाने की तैयारी में लगा है। अमेरिका की सरकार ने साल 2028 तक अंतरिक्ष आर्बिट में और 2030 तक चंद्रमा की सतह पर परमाणु रिएक्टर स्थापित करने की समयसीमा तय की है।
सकता है।
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ऑफिस ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी के निदेशक माइकल क्रैट्सियोस ने नासा के ऊर्जा विभाग और रक्षा विभाग को नया निर्देश दिया है। इसमें कहा गया है कि न्यूक्लियर रिएक्टर को लेकर तेजी से काम किया जाए।
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क्यों परमाणु रिएक्टर लगाना चाहता है अमेरिका?
अंतरिक्ष में अमेरिका का परमाणु रिएक्टर लगाने का मकसद बिजली पैदा करना है। यह एक मशीन की तरह है, जिससे निकली ऊर्जा से चंद्रमा पर बने बेस, रोवर्स और मशीनों को चलाया जा सके। अभी तक अंतरिक्ष यान को मुख्य तौर पर सोलर एनर्जी या केमिकल फ्यूल से चलाया जाता है। लेकिन चंद्रमा के चंद्रमा के अंधेरे इलाकों या मंगल जैसे सुदूर ग्रहों पर सूर्य की रोशनी से ठीक से नहीं पहुंचती है। इसलिए वहां पर ऊर्जा संकट है।
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अमेरिका मानता है कि चंद्रमा और मंगल पर स्थायी इंसानी बस्तियां बसाने के लिए सिर्फ परमाणु ऊर्जा ही विकल्प है, जो बिना रुके बिजली, गर्मी प्रदान कर सकता है। अब अमेरिका के इस फैसले से अंतरिक्ष में दबदबे को लेकर दुनिया के बीच होड़ मचना तय है।