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क्या आप जानते हैं कि नींबू-मिर्ची का टोटका क्यों करते हैं लोग, अगर नहीं तो सच्चाई जान लीजिए
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 17 Feb 2018 09:09 AM IST
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हम 21वीं सदी में जी रहे हैं फिर भी भारत में अधंविश्वास से जुड़ी बातों को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है। यह वाकयी हैरान कर देने वाली बात है। भले ही ऐसी बातों से लोगों का कोई सरोकार न रहा हो फिर भी सुनी-सुनाई बातों व अंधविश्वासों को लोग मानने में पीछे नहीं रहते।
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नदी में सिक्के फेंकना
इसे शुभ समझा जाता है। इसके पीछे लोगों का मानना है कि ऐसा करने से भाग्य मजबूत होता है।
जबकि वैज्ञानिक यह लॉजिक लगाते हैं कि पुराने समय के सिक्के ताबें से मिलकर बने होते थे जो पानी के अंदर के बैक्टिरिया को खत्म करने का काम करते थे। यह हमारी सेहत को लिए भी काफी लाभकारी होते है। नदी के पानी को शुद्ध करने के लिए लोग नदी में सिक्के फेंकते थे।
इसे शुभ समझा जाता है। इसके पीछे लोगों का मानना है कि ऐसा करने से भाग्य मजबूत होता है।
जबकि वैज्ञानिक यह लॉजिक लगाते हैं कि पुराने समय के सिक्के ताबें से मिलकर बने होते थे जो पानी के अंदर के बैक्टिरिया को खत्म करने का काम करते थे। यह हमारी सेहत को लिए भी काफी लाभकारी होते है। नदी के पानी को शुद्ध करने के लिए लोग नदी में सिक्के फेंकते थे।
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बाहर जाने से पहले दही खाना
इसे भी भाग्य के साथ जोड़कर देखा जाता हैं और मानते हैं कि ऐसा करना शुभ होता है।
वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के हिसाब से इसके पीछे छिपे तथ्य ये बताते है कि पुराने समय में लोग ज्यादातर एक स्थान से दूसरे स्थान पैदल चलकर ही जाया करते थे और जाने से पहले दही का सेवन किया करते थे ताकि उनके शरीर में ताजगी के साथ ठंडक काफी समय तक बनी रहे। वहीं अगर दही में शक्कर डालकर पीने से ग्लूकोज की मात्रा भी बढ़ जाती है। यह शरीर में ऊर्जा प्रदान करने में मदद करती है।
इसे भी भाग्य के साथ जोड़कर देखा जाता हैं और मानते हैं कि ऐसा करना शुभ होता है।
वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के हिसाब से इसके पीछे छिपे तथ्य ये बताते है कि पुराने समय में लोग ज्यादातर एक स्थान से दूसरे स्थान पैदल चलकर ही जाया करते थे और जाने से पहले दही का सेवन किया करते थे ताकि उनके शरीर में ताजगी के साथ ठंडक काफी समय तक बनी रहे। वहीं अगर दही में शक्कर डालकर पीने से ग्लूकोज की मात्रा भी बढ़ जाती है। यह शरीर में ऊर्जा प्रदान करने में मदद करती है।
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शव यात्रा से लौटने के बाद स्नान करना
किसी भी अंतिम संस्कार से लौटने के बाद लोग नहाते हैं। माना जाता है कि श्मशान जाकर लोग अशुभ हो जाते हैं।
जबाकि असल लॉजिक ये है कि मरने के दौरान मृत शरीर में कई तरह के बैक्टीरिया पनपने लगते है और उसके संपर्क में आने के बाद वो हमारे शरीर में भी प्रवेश कर जाते हैं, इसी से बचने के लिए श्मशान से आकर स्नान करना जरूरी समझा जाता है।
किसी भी अंतिम संस्कार से लौटने के बाद लोग नहाते हैं। माना जाता है कि श्मशान जाकर लोग अशुभ हो जाते हैं।
जबाकि असल लॉजिक ये है कि मरने के दौरान मृत शरीर में कई तरह के बैक्टीरिया पनपने लगते है और उसके संपर्क में आने के बाद वो हमारे शरीर में भी प्रवेश कर जाते हैं, इसी से बचने के लिए श्मशान से आकर स्नान करना जरूरी समझा जाता है।
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मंगलवार और गरूवार को बाल न धोना-
ऐसा माना जाता है कि इन दो दिनों में यदि बाल धोए जाते हैं तो बुरे वक्त आता है। जबकि वैज्ञानिक मानते हैं कि पहले समय के लोग पानी को भरने के लिए दूर दराज नदी तलाब या कुएं में जाया करते थे और पानी की बचत के लिए ये लोग 1-2 दिन न तो बाल धोते थे और न ही कपड़े। धीरे-धीरे इस प्रथा का चलन हो गया और लोग इसे अंधविश्वास से जोड़कर देखने लगे।
ऐसा माना जाता है कि इन दो दिनों में यदि बाल धोए जाते हैं तो बुरे वक्त आता है। जबकि वैज्ञानिक मानते हैं कि पहले समय के लोग पानी को भरने के लिए दूर दराज नदी तलाब या कुएं में जाया करते थे और पानी की बचत के लिए ये लोग 1-2 दिन न तो बाल धोते थे और न ही कपड़े। धीरे-धीरे इस प्रथा का चलन हो गया और लोग इसे अंधविश्वास से जोड़कर देखने लगे।