{"_id":"5bc1980abdec225d4c0a82c6","slug":"know-the-five-secrets-which-is-connected-with-the-human-bones","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"हड्डियों से जुड़े ये पांच राज नहीं जानते होंगे आप, कई गलतफहमियों को चुटकियों में कर देंगे दूर","category":{"title":"Science Wonders","title_hn":"विज्ञान के चमत्कार","slug":"science-wonders"}}
हड्डियों से जुड़े ये पांच राज नहीं जानते होंगे आप, कई गलतफहमियों को चुटकियों में कर देंगे दूर
क्लाउडिया हैमंड, बीबीसी फ्यूचर
Updated Sat, 13 Oct 2018 04:30 PM IST
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कोई चोट लगने के बाद अक्सर हम अपनी हड्डियों के टूटने को लेकर आशंकित हो जाते हैं। इसे लेकर कई गलतफहमियां हैं। आज हम आपकोे इन्ही गलतफहमियों के बारे में बताने जा रहे हैं। यकीनन इनके बारे में जानकर आपकी आंखें हैरानी से खुली की खुली रह जाएंगी।
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1. अगर आप अपनी हड्डी हिला नहीं सकते, तो इसका मतलब वो टूट गई है
किसी भी चोट के बाद जो पहला खयाल आता है, वो यही आता है कि आप की हड्डी टूट गई है। दर्द से कराहते हुए आप लगातार यही सोचते रहते हैं कि अगर आप हाथ या पैर नहीं हिला पा रहे हैं, तो कहीं आप की हड्डी टूट तो नहीं गई है। सच्चाई ये है कि कई बार आप टूटी हुई हड्डी को भी हिला सकते हैं। यानी अगर आप चोटिल हाथ या पैर नहीं हिला पा रहे हैं, तो इसका ये मतलब नहीं कि हड्डी टूट गई है।
हड्डी टूटने के तीन बड़े संकेत होते हैं-दर्द, चोट की जगह का फूलना और शरीर का कोई अंग टेढ़ा-मेढ़ा होना। अगर कोई हड्डी चमड़ी से उभरी हुई मालूम होती है, तो ये शुभ संकेत नहीं। हादसे के वक्त चटखने की आवाज आप ने अगर सुनी है, तो उसका मतलब भी होता है कि आप की हड्डी टूट गई है।
किसी भी चोट के बाद जो पहला खयाल आता है, वो यही आता है कि आप की हड्डी टूट गई है। दर्द से कराहते हुए आप लगातार यही सोचते रहते हैं कि अगर आप हाथ या पैर नहीं हिला पा रहे हैं, तो कहीं आप की हड्डी टूट तो नहीं गई है। सच्चाई ये है कि कई बार आप टूटी हुई हड्डी को भी हिला सकते हैं। यानी अगर आप चोटिल हाथ या पैर नहीं हिला पा रहे हैं, तो इसका ये मतलब नहीं कि हड्डी टूट गई है।
हड्डी टूटने के तीन बड़े संकेत होते हैं-दर्द, चोट की जगह का फूलना और शरीर का कोई अंग टेढ़ा-मेढ़ा होना। अगर कोई हड्डी चमड़ी से उभरी हुई मालूम होती है, तो ये शुभ संकेत नहीं। हादसे के वक्त चटखने की आवाज आप ने अगर सुनी है, तो उसका मतलब भी होता है कि आप की हड्डी टूट गई है।
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2. हड्डी टूटी तो यकीनन आप को दर्द होगा
ये भी बड़ी गलतफहमी है। ऐसा हर बार मुमकिन नहीं कि हड्डी टूट गई है, तो आप को दर्द होगा ही। ऐसा नहीं है। बहुत से लोगों को तो बिल्कुल एहसास भी नहीं होता कि उनकी कोई हड्डी टूट गई है। टूटी हुई हड्डियां तकलीफ देती हैं, लेकिन, छोटी-मोटी टूट-फूट का पता भी नहीं चलता। जब आप को पता चले कि कोई हड्डी टूट गई है, तो तुरंत किसी जानकार की मदद लेनी चाहिए। ताकि, वो आप की हड्डियों को सही मौके पर लाकर उन्हें जोड़ सके। वरना, उनमें इन्फेक्शन हो सकता है। हो सकता है कि हड्डी जुड़े ही नहीं। 2015 में ब्रिटेन के बायोबैंक में दर्ज डेटा की बुनियाद पर हुई रिसर्च से दिलचस्प बात सामने आई थी। वो ये कि कई लोगों को बीसियों बरस पहले कोई चोट लगी थी। उनकी हड्डी टूट गई थी। इसका दर्द उन्हें दुर्घटना के कई दशक बाद हुआ। हालांकि ऐसी मिसालें आम नहीं हैं।
ये भी बड़ी गलतफहमी है। ऐसा हर बार मुमकिन नहीं कि हड्डी टूट गई है, तो आप को दर्द होगा ही। ऐसा नहीं है। बहुत से लोगों को तो बिल्कुल एहसास भी नहीं होता कि उनकी कोई हड्डी टूट गई है। टूटी हुई हड्डियां तकलीफ देती हैं, लेकिन, छोटी-मोटी टूट-फूट का पता भी नहीं चलता। जब आप को पता चले कि कोई हड्डी टूट गई है, तो तुरंत किसी जानकार की मदद लेनी चाहिए। ताकि, वो आप की हड्डियों को सही मौके पर लाकर उन्हें जोड़ सके। वरना, उनमें इन्फेक्शन हो सकता है। हो सकता है कि हड्डी जुड़े ही नहीं। 2015 में ब्रिटेन के बायोबैंक में दर्ज डेटा की बुनियाद पर हुई रिसर्च से दिलचस्प बात सामने आई थी। वो ये कि कई लोगों को बीसियों बरस पहले कोई चोट लगी थी। उनकी हड्डी टूट गई थी। इसका दर्द उन्हें दुर्घटना के कई दशक बाद हुआ। हालांकि ऐसी मिसालें आम नहीं हैं।
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3. बुजुर्ग गोरी महिलाओं को हड्डी टूटने की ज्यादा फिक्र करनी चाहिए
इसमें कोई दो राय नहीं कि बुजुर्गों की हड्डी टूटने-चटखने का जोखिम ज्यादा रहता है। मीनोपॉज की वजह से आए बदलाव के चलते महिलाओं की हड्डी टूटने का खतरा और बढ़ जाता है। इससे हड्डियों का क्षरण होता है। ओस्टियोपोरोसिस की बीमारी महिलाओं को ज्यादा होती है।
अगर हम किसी खास नस्ल या समु3. बुजुर्ग गोरी महिलाओं को हड्डी टूटने की ज्यादा फिक्र करनी चाहिएदाय की बात करें, तो अमरीका में गोरी महिलाएं, अश्वेत महिलाओं के मुकाबले ज्यादा हिप फ्रैक्चर की शिकार होती हैं। अश्वेत महिलाओं की बोन डेन्सिटी बचपन से ही ज्यादा होती है। फिर भी अश्वेत महिलाएं ओस्टियोपोरोसिस की शिकार हो सकती हैं। हां, गोरी महिलाओं के मुकाबले उन पर ये खतरा कम होता है। पचास से ज्यादा उम्र की केवल 5 प्रतिशत अश्वेत महिलाओं को ओस्टियोपोरोसिस का खतरा होता है।
इसमें कोई दो राय नहीं कि बुजुर्गों की हड्डी टूटने-चटखने का जोखिम ज्यादा रहता है। मीनोपॉज की वजह से आए बदलाव के चलते महिलाओं की हड्डी टूटने का खतरा और बढ़ जाता है। इससे हड्डियों का क्षरण होता है। ओस्टियोपोरोसिस की बीमारी महिलाओं को ज्यादा होती है।
अगर हम किसी खास नस्ल या समु3. बुजुर्ग गोरी महिलाओं को हड्डी टूटने की ज्यादा फिक्र करनी चाहिएदाय की बात करें, तो अमरीका में गोरी महिलाएं, अश्वेत महिलाओं के मुकाबले ज्यादा हिप फ्रैक्चर की शिकार होती हैं। अश्वेत महिलाओं की बोन डेन्सिटी बचपन से ही ज्यादा होती है। फिर भी अश्वेत महिलाएं ओस्टियोपोरोसिस की शिकार हो सकती हैं। हां, गोरी महिलाओं के मुकाबले उन पर ये खतरा कम होता है। पचास से ज्यादा उम्र की केवल 5 प्रतिशत अश्वेत महिलाओं को ओस्टियोपोरोसिस का खतरा होता है।
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4. अंगूठा टूटने पर डॉक्टर को दिखाना बेकार है
भले ही टूटे अंगूठे का डॉक्टर कुछ न कर सकें। भले ही अंगूठे पर प्लास्टर चढ़ाना मुश्किल है। फिर भी, अगर, अंगूठा चोट का शिकार होता है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इससे आगे चल कर होने वाली मुश्किलें दूर होती हैं। कई बार तो आलम ये होता है कि जूते पहनना मुश्किल हो जाता है। बेहतर है कि अंगूठे में लगी हर चोट को गंभीरता से लें। ज्यादा तकलीफ होने पर डॉक्टर को दिखाएं। ताकि, सही इलाज से चोट ठीक की जा सके।
ज्यादातर चोटिल अंगूठों को पट्टी बांध कर सीधा रखा जा सकता है। इस दौरान चोट के ठीक होने के लिए खास जूते भी बाजार में आते हैं। अंगूठे की चोट कई लोगों के लिए बड़ी मुश्किल हो सकती है। हो सकता है कि उन्हें घुटनों तक प्लास्टर चढ़ाना पड़े। अच्छी बात ये है कि अंगूठों में चोट कम लगती है।
अंगूठे के बगल वाली हड्डी यानी मेटाटार्सल के टूटने पर हालात और भी जल्दी बेहतर हो जाते हैं। कई बार तो उसे ठीक करने या जोड़ने के लिए प्लास्टर की भी जरूरत नहीं होती। सिर्फ पैरों को लंबा आराम देना पड़ता है। असल में पैरों की हड्डियां जुड़ी हुई होती हैं। तो, टूटने के बाद भी वो सीधी रहती हैं। इसलिए उन्हें प्लास्टर चढ़ाकर जोड़ने की जरूरत नहीं होती। लेकिन, प्लास्टर भले न चढ़ाना हो, आप को उसका सही इलाज जरूर कराना चाहिए। अगर गंभीर फ्रैक्चर नहीं है, तो भी उन पर कसी हुई ड्रेसिंग करानी होती है। एक-दो हफ्ते का आराम हड्डियों का हाल दुरुस्त कर देता है।
भले ही टूटे अंगूठे का डॉक्टर कुछ न कर सकें। भले ही अंगूठे पर प्लास्टर चढ़ाना मुश्किल है। फिर भी, अगर, अंगूठा चोट का शिकार होता है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इससे आगे चल कर होने वाली मुश्किलें दूर होती हैं। कई बार तो आलम ये होता है कि जूते पहनना मुश्किल हो जाता है। बेहतर है कि अंगूठे में लगी हर चोट को गंभीरता से लें। ज्यादा तकलीफ होने पर डॉक्टर को दिखाएं। ताकि, सही इलाज से चोट ठीक की जा सके।
ज्यादातर चोटिल अंगूठों को पट्टी बांध कर सीधा रखा जा सकता है। इस दौरान चोट के ठीक होने के लिए खास जूते भी बाजार में आते हैं। अंगूठे की चोट कई लोगों के लिए बड़ी मुश्किल हो सकती है। हो सकता है कि उन्हें घुटनों तक प्लास्टर चढ़ाना पड़े। अच्छी बात ये है कि अंगूठों में चोट कम लगती है।
अंगूठे के बगल वाली हड्डी यानी मेटाटार्सल के टूटने पर हालात और भी जल्दी बेहतर हो जाते हैं। कई बार तो उसे ठीक करने या जोड़ने के लिए प्लास्टर की भी जरूरत नहीं होती। सिर्फ पैरों को लंबा आराम देना पड़ता है। असल में पैरों की हड्डियां जुड़ी हुई होती हैं। तो, टूटने के बाद भी वो सीधी रहती हैं। इसलिए उन्हें प्लास्टर चढ़ाकर जोड़ने की जरूरत नहीं होती। लेकिन, प्लास्टर भले न चढ़ाना हो, आप को उसका सही इलाज जरूर कराना चाहिए। अगर गंभीर फ्रैक्चर नहीं है, तो भी उन पर कसी हुई ड्रेसिंग करानी होती है। एक-दो हफ्ते का आराम हड्डियों का हाल दुरुस्त कर देता है।