फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

भविष्य में कुछ इस तरह होगी खेती, धरती की गर्मी से बनाई जाएगी बिजली

Fri, 14 Sep 2018 12:51 PM IST
डालियाह सिंगर, बीबीसी फ्यूचर
डालियाह सिंगर, बीबीसी फ्यूचर Updated Fri, 14 Sep 2018 12:51 PM IST
विज्ञापन
Farming Will be something like this in the future
aa
अगस्त की बेहद गर्म दोपहर में पाउलिन बेनेटी और डायेन केलसी अंगूर और टमाटर की बेलों को ऊपर की ओर फैलना सिखा रही हैं। टमाटरों के इस सीजन में पाउलिन और डायेन की चुनौती केवल टमाटर नहीं हैं। हालांकि, फिलहाल उनका पूरा जोर टमाटरों को ऊपर की तरफ फैलाते हुए पूरे साल फसल के उत्पादन से है। डायेन और पाउलिन जियोथर्मल ग्रीनहाउस पार्टनरशिप यानी जीजीपी के पंचवर्षीय अभियान का हिस्सा हैं, जो अमरीका के कोलोराडो राज्य के पगोसा स्प्रिंग्स इलाके में चलाया जा रहा है। 


ये गैर-लाभकारी संस्था, शहर के प्रशासन के साथ मिलकर बेहद गर्म पानी के स्त्रोतों की ऊर्जा की मदद से स्थानीय लोगों की साल भर की जरूरत का खाद्य सामग्री उगा रही है। पश्चिमी अमरीका में पगोसा स्प्रिंग्स अपने गर्म सोतों के लिए चर्चित है। अमरीका जाने वाले सैलानी इन सोतों को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं। यहां पर धरती की गर्मी से बिजली बनाई जाती है और अब इसकी मदद से खेती करने का ये नया धंधा भी शुरू हुआ है।
Farming Will be something like this in the future
aa
गर्म पानी से कैसे होगी खेती?
पगोसा स्प्रिंग्स के पास ही तीन ग्रीनहाउस गुंबद बनाए गए हैं। हर एक गुंबद की चौड़ाई 42 फुट है। शहर की पुरानी इमारतों से देखें तो ये दूर से ही एकदम अलग नजर आते हैं। भले ही तीनों गुंबद देखने में एक जैसे लगते हों लेकिन इनमें तीनों का काम अलग-अलग होता है। पहले गुंबद का नाम है एजुकेशन डोम। ये 2016 में बनाया गया था। तीनों गुंबदों में ये इकलौता है जिसमें काम हो रहा है। यहां पर रोजाना स्वयंसेवक आकर पौधों की देख-भाल करते हैं। उनकी कटाई-छटाई करते हैं। यहां पर अब तक तीन सौ से ज्यादा छात्र इंजीनियरिंग, गणित और पौधों के बारे में पढ़ाई करने के लिए आ चुके हैं।

हर मंगलवार और शनिवार को दोपहर 11 बजे से 2 बजे तक आम लोग भी यहां आ सकते हैं। जीजीपी की कोषाध्यक्ष सैली हाई कहती हैं, 'हम यहां पर अगली पीढ़ी को पूरे साल बिना क़ुदरत को नुकसान पहुंचाए, खेती करना सिखाते हैं। सात हजार फुट से ज्यादा की ऊंचाई पर ये करना बहुत बड़ी उपलब्धि है।'
Farming Will be something like this in the future
aa
कैसे काम करती है ये तकनीक?
इस परियोजना के तहत कस्बों के कुओं से निकला हुआ पानी ग्रीन हाउस तक आता है। इसके बाद एक हीट एक्सचेंजर की मदद से इस गर्म पानी से सामान्य पानी को गर्म किया जाता है जिसे सर्दियों के महीनों में ग्रीन हाउस में पहुंचाया जाता है। इसके बाद गर्म पानी आगे बह जाता है।

यानी गर्म सोतों से निकला पानी पाइप से इस जगह को गर्म करता है और बाहर निकल जाता है। इस पानी का और कोई इस्तेमाल ग्रीनहाउस के भीतर नहीं होता है। गर्म पानी की मदद से ग्रीनहाउस का तापमान ठंड में 14 डिग्री सेल्सियस और गर्मियों में 32 डिग्री सेल्सियस बना रहता है। ग्रीनहाउस के भीतर एक तालाब, पंखे, खिड़कियां और धुंध के सिस्टम की मदद भी तापमान को स्थायी बनाया जाता है। नतीजा ये कि ग्रीनहाउस के भीतर चुकंदर, टमाटर और दूसरी कई फ़सलें उगाई जाती हैं। ऊंचाई पर स्थित इस कस्बे में फसलों के लिए महज 80 दिन होते हैं, लेकिन ग्रीनहाउस गुंबद के भीतर पूरे साल खेती होती रहती है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन
Farming Will be something like this in the future
aa
तकनीक से बेहतर हुए खेती के अवसर
बाकी के गुंबदों में से एक और कम्युनिटी गार्डेन्स ग्रीनहाउस भी इस साल के आखिर तक काम करने लगेगा। यहां पर फूड बैंक और दूसरे स्वयंसेवी संगठन भी अपने-अपने हिस्से में खेती कर सकेंगे, ताकि स्थानीय लोगों की मदद कर सकें। यहां के तीसरे गुंबद का नाम है इनोवेशन ग्रीनहाउस। ये 2019 में काम करने लगेगा। इसका मकद अक्वापोनिक माहौल में खेती की सुविधा देना है। जहां पर मछलियों को भी पाला जाएगा और साथ-साथ खेती भी की जाएगी। इस गुंबद को जनता के लिए बेहद कम वक्त के लिए ही खोला जाएगा, खास तौर से नुमाइशों वग़ैरह के वक्त।

कोलोराडो में किसानों के बाजार सीजन के हिसाब से लगते हैं, लेकिन ग्रीनहाउस गुंबदों की मदद से साल भर बाजार लगाने की कोशिश कोलोराडो की सरकार कर रही है। सैली हाई कहती हैं कि 'हमारे जियोथर्मल ग्रीनहाउस गुंबदों को अभी कम करके आंका जा रहा है।' कोलोराडो के इस इलाके में क़ुदरत के कमाल यानी गर्म सोतों की खोज उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में हुई थी। करीब एक सदी से भी ज्यादा वक्त के बाद 1982 में अमरीकी सरकार के ऊर्जा मंत्रालय की मदद से जियोथर्मल हीटिंग सिस्टम की शुरुआत हुई। इसमें गर्म पानी की मदद से 60 स्थानीय कारोबारों और रिहाइशों को बिजली की सप्लाई की जाने लगी। सर्दियों में गर्म पानी की मदद से बर्फ पिघलाने का काम भी लिया जाने लगा।
विज्ञापन
Farming Will be something like this in the future
aa
बिजली की पूर्ती के लिए शानदार हैं हीट स्रिंग
पूरे अमरीका में कुदरती तौर पर गर्म पानी के ऐसे इस्तेमाल की बीस मिसालें मिलती हैं। ऐसे ठिकाने बोइस, इदाहो और सैन बर्नार्डिनो में देखे जा सकते हैं। सैली हाई कहती हैं कि गर्म पानी के ये सोते पूरे साल चौबीसों घंटे बिजली सप्लाई के स्रोत हैं। इस पानी से ऊर्जा हासिल करने का काम एक मिसाल है, जो कहीं भी दोहराई जा सकती है।

अमरीका में जियोथर्मल एनर्जी यानी क़ुदरती गर्मी की मदद से खेती करने की ये इकलौती मिसाल नहीं। हालांकि तकनीकी रूप से तरक्की करने के बावजूद अमरीका इस मामले में पिछड़ा है। देश भर में ऐसे केवल 29 ग्रीनहाउस प्रोजेक्ट चल रहे हैं। ऊर्जा के इस कुदरती स्रोत का इस्तेमाल स्थानीय समुदाय दूसरों पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भी कर रहे हैं। उनकी बिजली की और दूसरी जरूरतें कुदरत ही पूरी कर रही है।

जियोथर्मल एनर्जी का सबसे ज्यादा इस्तेमाल आइसलैंड में होता है। यहां के कुल बिजली उत्पादन का 25 प्रतिशत क़ुदरती स्रोतों यानी जियोथर्मल स्रोतों से आता है। 13 यूरोपीय देश जियोथर्मल एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं। अमरीका में इस क़ुदरती स्रोत का अच्छे तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। वहां के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक इस तरीके से आज 3.7 गीगावाट बिजली पैदा हो रही है। लेकिन एक मोटे अनुमान के मुताबिक, अमरीका चाहे तो इस कुदरती गर्मी से 100 गीगावाट बिजली बना सकता है। अगले पांच दशक में अमरीका अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का दस फीसद बिजली ऐसे उत्पादन करना चाहता है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed