साफ पानी मिलना अब मुश्किल होता जा रहा है। पीने का पानी साफ न हो, तो इंसान को कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में वॉटर प्यूरिफायर्स की डिमांड बढ़ती जा रही है। आजकल बाजार में कई प्रकार के और विभिन्न कंपनियों के प्यूरिफायर्स मौजूद हैं। एक तरफ जहां नल से पीने लायक पानी नहीं मिल रहा, वहीं जरूरत से ज्यादा फिल्टर व प्यूरिफायर का इस्तेमाल शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को कमजोर कर रहा है। फिर भी शुद्ध पानी की चाहत में वॉटर प्यूरिफायर्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
वाटर प्यूरिफायर भी कर सकता है बीमार, वजह चौंकाने वाली
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क्या है टीडीएस
बीआईएस (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) ने ड्रिकिंग वॉटर और पैकेज्ड ड्रिकिंग वॉटर के कुछ मानक तय किए हैं। ड्रिकिंग वॉटर को मापने के लिए टीडीएस (टोटल डिजाल्वड सॉलिड्स), पीएच और हार्डनेस लेवल देखा जाता है। बीआईएस के मुताबिक, मानव शरीर अधिकतम 500 पीपीएम (पार्ट्स प्रति मिलियन) टीडीएस सहन कर सकता है। यदि यह स्तर 1000 पीपीएम हो जाता है, तो शरीर के लिए नुकसानदेह हैं। लेकिन फिलहाल आरओ से फिल्टर्ड पानी में 18 से 25 पार्ट्स पीपीएम टीडीएस मिल रहा है जो काफी कम है। इसे सेहतमंद नहीं माना जा सकता है। इस संबंध में डब्ल्यूएचओ ने भी कुछ मानक निर्धारित किए हैं, जिनके अनुसार 100 से 150 मिलीग्राम/लीटर लेवल के टीडीएस को पीने के लिए सही बताया गया है। ध्यान रखें कि 300 मिलीग्राम/लीटर टीडीएस से कम लेवल वाला पानी स्वाद में सबसे अच्छा होता है और टीडीएस लेवल 900 मिलीग्राम/लीटर से ज्यादा वाला पानी स्वाद में खराब होता है।
आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस)
आरओ एक ऐसी वॉटर प्यूरिफिकेशन तकनीक है, जिसमें प्रेशर के जरिए पानी को साफ किया जाता है। इससे पानी में घुली अशुद्धियां, पार्टिकल्स और मेटल्स खत्म हो जाते हैं। आरओ प्यूरिफायर्स का इस्तेमाल उन इलाकों में करना चाहिए, जहां पानी में टीडीएस ज्याद हो यानी पानी खारा हो। जैसे- बोरवेल के पानी के लिए या तटीय इलाकों के लिए आरओ प्यूरिफायर सही है। वहीं, जिन इलाकों का पानी मीठा है या जहां प्रदूषण कम है, वहां आरओ की जगह यूवी का इस्तेमाल बेहतर रहता है। आरओ के पानी में कुछ भी अशुद्ध नहीं होता है। यह बैक्टीरिया और वायरस को ब्लॉक कर बाहर करता है। यह पानी से क्लोरीन और आर्सेनिक जैसी अशुद्धियों को भी साफ करता है। इसे उपयोग करने के लिए बिजली की आवश्यकता होती है। औसतन 30-40 फीसदी पानी आरओ के रिजेक्ट सिस्टम से वेस्ट होता है। आरओ हमारे पीने के पानी से जरूरी मिनरल्स को बाहर कर देता है।
यूवी (अल्ट्रावॉयलेट प्यूरिफिकेशन)
यूवी यानी अल्ट्रावॉयलेट तकनीक से पानी में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस खत्म हो जाते हैं। यह पानी में घुले क्लोरीन और आर्सेनिक को साफ नहीं कर सकता है, जिससे इसका प्रयोग उन इलाकों में ही होना चाहिए, जहां ग्राउंड वॉटर पहले से मीठा हो और केवल बैक्टीरिया को खत्म किए जाने की जरूरत हो। यह पहाड़ी और कम प्रदूषण वाले इलाकों के लिए ठीक रहता है। इसे तटीय इलाकों में या प्रदूषित शहरों में प्रयोग करना सही नहीं होगा। केंट अल्ट्रा यूवी वॉटर प्यूरिफायर, यूरेका फोर्ब्स एक्वाश्योर एक्वाफ्लो डीएक्स यूवी वॉटर प्यूरिफायर और प्योरइट यूवी प्यूरिफायर्स के टॉप ब्रैंड्स हैं। इसमें पानी को डालने से घुली हुई अशुद्धियां साफ हो जाती हैं और सभी बैक्टीरिया-वायरस खत्म हो जाते हैं। यूवी को उपयोग करने के लिए भी बिजली की आवश्यता पड़ती है। इसकी अल्ट्रावॉयलेट तकनीक बैक्टीरिया और वायरस को पानी से बाहर नहीं करता है, लेकिन उन्हें मार देती है।
यूएफ (अल्ट्रा फिल्ट्रेशन)
यूएफ प्यूरिफिकेशन सिस्टम एक फिजिकल तकनीक है। इसमें एक मेंब्रेन या लेयर होती है, जिसमें पानी को डालने से घुली हुई अशुद्धियां साफ हो जाती हैं और सभी बैक्टीरिया और वायरस को मारकर पानी से बाहर करता है। इस प्यूरिफिकेशन सिस्टम को चलाने के लिए बिजली की आवश्यकता नहीं होती है। यदि आपके इलाके के पानी में क्लोरीन और आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा हो, तो इसे खरीदने का कोई लाभ नहीं है।