दुनियाभर में कोरोना महामारी की वजह से हाहाकार मचा हुआ है। अब इस बीच अमेरिका में खतरनाक वायरस पाया गया है जिसका नाम रैबिट हेमोरेजिक डिजीस वायरस 2 (RHDV2) है। ओरेगॉन वेटरिनरी डॉयग्नोस्टिक लेबोरेटरी की तरफ से भी इस जानलेवा वायरस की पुष्टि की गई है। काली पूंछ वाला जैकरैबिट (Jackrabbit) इस वायरस से संक्रमित मिला था। क्रूक काउंटी के पावेल बुटे में मिले संक्रमित खरगोश के अलावा कई जगंली खरगोश इस वायरस की चेपट में आ गए हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में सर्दियों के दौरान लोग खरगोशों का शिकार ज्यादा करते हैं। प्रशासन ने शिकारियों को सावधान रहने की सलाह दी है। कहा गया है कि अगर वे वायरस से संक्रमित खरगोश को घर ले आते हैं, तो उनके पालतू खरगोश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं और उनकी मौत हो सकती है। इसकी वजह से मुसीबत बढ़ सकती है। आईए जानते हैं कि आखिर यह कितना खतरनाक है और कौन इसकी चपेट में आ सकता है।
2 of 7
अमेरिका में मिला खतरनाक वायरस
- फोटो : Pixabay
रैबिट हेमोरेजिक डिजीस वायरस 2 (RHDV2) बेहद खतरनाक है जिसकी वजह से खरगोश अचानक मर सकता है। इस वायरस की चपेट में सिर्फ खरगोश आते हैं। पालतू खरगोशों के लिए यह खतरनाक साबित हो सकता है। यह वायरस खरगोशों के अलावा बिल्लियों को भी शिकार बना सकता है।
3 of 7
अमेरिका में मिला खतरनाक वायरस
- फोटो : Pixabay
ओरेगॉन का कृषि विभाग और ODFW इस खतरनाक वायरस को रोकने के लिए मिलकर काम कर रहा है। बीते साल मार्च में घरेलू खरगोशों में यह वायरस पाया गया था, लेकिन उस समय इसके मामले बेहद कम यानी न के बराबर थे। इस वायरस की वजह से पहली बार ओरेगॉन के मालह्यूर काउंटी में एक काली पूंछ वाला जैकरैबिट को मारा गया था। इसके बाद मई 2021 में इस वायरस का दूसरा केस सामने आया था जो क्रिसमस वैली के लेक काउंटी में पाया गया था।
4 of 7
अमेरिका में मिला खतरनाक वायरस
- फोटो : Pixabay
इस वायरस का नया मामला क्रूक काउंटी से लगभग 100 किलोमीटर दूर पाया गया है। रैबिट हेमोरेजिक डिजीस वायरस 2 के खतरनाक होने का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि यह कम और ज्यादा तापमान दोनों में फैलता है। मर गए खरगोश के शरीर में लंबे समय तक वायरस रह सकता है। संक्रमित खरगोश के संपर्क में आने वाले दूसरे खरगोश और बिल्ली के संक्रमित होने का खतरा रहता है।
5 of 7
अमेरिका में मिला खतरनाक वायरस
- फोटो : Pixabay
इस खतरनाक वायरस की चपेट में आने से संक्रमित खरगोस को सांस लेने में पेरशानी होती है या उसका नर्वस सिस्टम काम नहीं करता है। खरगोश के नाक से खून आने लगता है और वह मर जाता है। इसके अलावा खरगोश में संक्रमण के और कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। संक्रमित खरगोश के मल या संक्रमित खाना-पानी से भी यह वायरस फैलता है।