ओडिशा के जंगलों में घूम रहे एक शौकिया फोटोग्राफर ने बेदह ही दूर्लभ प्रजाति के बाघ की तस्वीरों को कैमरे में कैद कर पाया। इस बाघ का रंग काला था, जो सामान्य बाघों से बिल्कुल अलग है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बाघ की ये प्रजाति मेलानिस्टिक टाइगर कहलाती है, जो विलुप्त होने के कगार पर है। पूरे राज्य में इस तरह के बाघों की संख्या केवल 7 से 8 ही बची है। बता दें कि दुनियाभर के काले रंग की बाघों की 70 फीसदी आबादी ओडिशा में रहती है।
ओडिशा के जंगलों में नजर आया काले रंग का दूर्लभ बाघ, कैमरे में कैद हुई तस्वीरें
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जेनेटिक डिफेक्ट के कारण बनती हैं काले रंग की धारियां
मेलेनिस्टिक टाइगर के शरीर पर काले रंग की धारियां जेनेटिक डिफेक्ट के कारण आती हैं। इस दूर्लभ प्रजाति के बाघ भारत में केवल ओडिशा में ही पाए जाते हैं। हालांकि, इन बाघों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। 2018 की टाइगर सेंसस रिपोर्ट बताती है कि काली धारी वाले बाघों की संख्या काफी तेजी से कम हुई है।
गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी में ओडिशा के नंदनकानन में पश्चिम बंगाल के रहने वाले सौमेन बाजपेयी बर्ड वॉचिंग कर रहे थे। जंगल में पेड़ों पर सौमेन कई तरह की पक्षियों और बंदरों को देख रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक बाघ को देखा, जो सामान्य बाघ की तरह नहीं था। सौमेन को इससे पहले मेलेनिस्टिक टाइगर के बारे में कुछ नहीं पता था।
सौमेन ने तुरंत अपने डिजिटल कैमरे में इस दूर्लभ बाघ की तस्वीरों को कैद कर लिया। फिलहाल इस ब्लैक टाइगर की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही हैं।
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बता दें कि पहली बार साल 1993 में ओडिशा के सिमलिपाल टाइगर रिजर्व में मेलिस्टिक बाघों की उपस्थिति की सूचना मिली। कैमरा ट्रैप से एकत्र किए गए डेटा के मुताबिक आज भारत में केवल सात से आठ मेलेनिस्टिक टाइगर मौजूद हैं।