कुदरत यूं तो मां की तरह इंसानियत को सहेज कर रखती है लेकिन जब नाराज होती है तो सब कुछ खत्म कर डालती है। इंसानों की नासमझी के चलते 21वीं सदी ने कुदरत ने बहुत कहर बरपाया है। कई आपदाओं ने लाखों जिंदगियां छीन ली और बहुत कुछ नष्ट कर डाला।
21 वीं सदी की प्राकृतिक आपदाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया
2010 का हाइती भूकंप 12 जनवरी 2010 को आया था। रिएक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.3 मापी गई थी। यह भूकंप स्थानीय समयानुसार 16:53 पर आया था। इससे 30 लाख लोग प्रभावित हुए थे। हाइती के सरकारी आंकड़ों के अनुसार एक लाख से लेकर एक लाख साठ हजार लोगों की मौत इस घटना से हुई थी। 2 लाख पचास हजार घर और तीस हजार प्रतिष्ठान इससे तबाह हुए थे। यह भूकंप दुनिया के इतिहास में सबसे खतरनाक भूकंपों में से एक माना जाता है।
21 वीं सदी की प्राकृतिक आपदाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया
2004 की सुनामी को भारतीय इतिहास में शायद ही कोई भुला सकता है। यह 26 दिसंबर 2004 को हिन्द महासागर में आयी था। इसने भारत, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और श्रीलंका में जमकर तबाही मचाई थी। इससे अकेले भारत में दो लाख तीस हजार लोग मारे गए थे।
21 वीं सदी की प्राकृतिक आपदाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया
नरगिस नाम का चक्रवात म्यांमार के इतिहास में भयानक चक्रवातों में से एक था। ये प्राकृतिक आपदा मई 2008 में हुई थी। इस घटना से अकेले लाबुटा शहर में अस्सी हजार लोगों की मौत हुई थी। लगभग पचपन हजार लोग इसमें लापता हुए थे।
21 वीं सदी की प्राकृतिक आपदाएं जिन्होंने बदल दी दुनिया
कश्मीर भूकंप 8 अप्रैल 2005 को सुबह 8:50 पर आया था। इसने पाकिस्तान अधिग्रहित आजाद कश्मीर पर कहर भरपाया था। इसने आसपास के क्षेत्रों अफगानिस्तान, तजाकिस्तान और चीन के क्षेत्रों को भी तबाह किया था। इसमें एक लाख लोग मारे गए थे, सत्तर हजार लोग घायल हुए थे। लगभग 70 लाख लोग बेघर हो गए थे।