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क्या अब चंद्रमा पर रह पाएंगे इंसान? ये काम करना हो सकता है आसान

Thu, 29 Oct 2020 12:31 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Thu, 29 Oct 2020 12:31 PM IST
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NASA discovers water on the moon Will humans be able to live on the moon now
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हाल ही में यह घोषणा की है कि उसे चंद्रमा पर पानी होने के सबूत मिले हैं। नासा ने अपनी एक नई और अचंभित करने वाली खोज के बारे में घोषणा की है कि उन्हें कुछ दिनों पहले चांद की सतह पर पानी होने के निर्णायक सबूत मिले हैं। चंद्रमा की सतह पर पानी के अणुओं के मिलने की पुष्टि से नासा के वहां बेस बनाने की योजना को लेकर भी उम्मीदें बढ़ी हैं। इस बेस को चंद्रमा पर मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल से ही संचालित करने का लक्ष्य है। इस खोज को साइंस जर्नल नेचर एस्ट्रोनॉमी में दो अलग-अलग शोधपत्रों में प्रकाशित किया गया है। 

NASA discovers water on the moon Will humans be able to live on the moon now
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

हालांकि इससे पहले भी चंद्रमा की सतह पर पानी होने के संकेत मिले थे, लेकिन इससे पहले जो खोज हुई थीं उनमें चांद के हमेशा छाया में रहने वाले भाग में पानी के होने के संकेत मिले थे, लेकिन इस बार वैज्ञानिकों को चांद के उस हिस्से में पानी के होने के साक्ष्य मिले हैं जहां सूर्य का सीधा प्रकाश पड़ता है। 

NASA discovers water on the moon Will humans be able to live on the moon now
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

एक वर्चुअल टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बोलते शोध-पत्र की सह-लेखिका केसी होनिबल ने कहा, 'वहां जो पानी है वो चांद पर लगभग एक क्यूबिक मीटर मिट्टी में 12 औंस की एक बोतल के बराबर पानी है।' यानी चांद के लगभग एक क्यूबिक मीटर आयतन या क्षेत्र में आधे लीटर से भी कम (0.325 लीटर) पानी है। होनिबल मैरीलैंड स्थित नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में पोस्टडॉक्टरल फेलो हैं। 

होनिबल के नासा सहयोगी जैकब ब्लीचर का कहना है कि शोधकर्ताओं को जल-जमाव की प्रकृति समझने की जरूरत है। उनका मानना है कि इससे उन्हें यह तय करने मे मदद मिलेगी कि अगर भविष्य में चांद पर किसी तरह की खोज की जाती है तो यह प्राकृतिक संसाधन कितनी मात्रा में सुलभ होंगे। 

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NASA discovers water on the moon Will humans be able to live on the moon now
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

चंद्रमा पर पानी होने के संकेत और तथ्य पहले भी मिले हैं, लेकिन इस नई खोज से यह पता चलता है कि यह पहले की खोज के अनुमान से कहीं अधिक मात्रा में मौजूद है। मिल्टन केन्स स्थित ओपन यूनिवर्सिटी की ग्रह वैज्ञानिक हनाह सर्जेंट के मुताबिक, 'इस खोज ने हमें चांद पर पानी के संभावित स्रोतों के और अधिक विकल्प दे दिए हैं। चंद्रमा पर बेस कहां हो यह बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि पानी कहां है।' 

स्पेस एजेंसी का कहना है कि उनकी योजना के मुताबिक, वे साल 2024 तक पहली महिला और अगले पुरुष को चांद की सतह पर भेजेंगे। यह योजना साल 2030 में नासा के मंगल पर मानव के 'अगले बड़े कदम' की तैयारी की एक कड़ी है।

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NASA discovers water on the moon Will humans be able to live on the moon now
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

वैज्ञानिकों को चंद्रमा पर कैसे मिला पानी?

इस खोज के लिए सबसे पहले एक एयरबोर्न-इंफ्रारेड टेलीस्कोप बनाया गया, जिसे सोफिया नाम दिया गया है। यह एक ऐसी वेधशाला है जो वायुमंडल के काफी ऊपर उड़ती है और एक बड़े पैमाने पर सौरमंडल का काफी स्पष्ट दृश्य उपलब्ध कराती है। इंफ्रारेड टेलीस्कोप की मदद से शोधकर्ताओं ने पानी के अणुओं के 'सिग्नेचर कलर' की पहचान की। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यह लूनर ग्लास के बुलबुलों में या फिर सतह पर मौजूद कणों के बीच जम गया और यही कारण है कि यह कठोर वातावरण होने के बावजूद भी मौजूद है। 

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