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Banyan Tree is under arrest in pakistan Peshawar AND CHAINED for more than 100 year see pictures
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पाकिस्तान में 121 सालों से जंजीरों में जकड़ा है ये पेड़, दिलचस्प है गिरफ्तारी की वजह
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव शुक्ला
Updated Sun, 24 Mar 2019 12:42 PM IST
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- फोटो : You Tube
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आपने ब्रिटिश राज के कई क्रूर किस्से सुने होंगे। अंग्रेजों का शासन भले ही खत्म हो गया हो लेकिन भारत और पाकिस्तान में आज भी ऐसे कई नियम और कानून हैं जिनका पालन किया जाता है। अभी तक आप ने सिर्फ इंसानों और जानवरों को ही कैद होते हुए देखा होगा पर हम आज आप को कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं जिसे सुन कर आप चौंक जाएंगे।
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- फोटो : Social Media
क्या आपने कभी किसी पेड़ की गिरफ्तारी के बारे में सुना है, वो भी पिछले 121 सालों से? शायद नहीं सुना होगा, लेकिन एक कानून के कारण पाकिस्तान के खैबर पखतूनख्वा प्रांत में एक बरगद के पेड़ को जंजीरों मे जकड़ कर रखा गया है। जी हां, प्रांत के लंडी कोतल में यह जंजीरों से जकड़ा हुआ है और उस पर एक तख्ती भी लगी है जिस पर 'I am under arrest' लिखा है।
डर गया था ब्रिटिश अफसर, इसलिए हुई थी गिरफ्तारी
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- फोटो : news.parhlo.com
यह पेड़ पाकिस्तान के लांडी कोटल आर्मी में लगा है। इसकी गिरफ्तारी के पीछे बड़ी ही दिलचस्प कहानी है। पाकिस्तानी अखबार डॉन के अनुसार, ये कहानी साल 1898 की है जब नशे में धुत्त ब्रिटिश अफसर जेम्स स्क्वायड लांडी कोटल आर्मी कैंटोनमेंट में टहल रहा था। इसी दौरान उसे महसूस हुआ कि सामने मौजूद बरगद का पेड़ उसकी तरफ आ रहा है। वो इससे बुरी तरह घबरा दिया और आस-पास मौजूद सैनिकों को आदेश देकर उसने पेड़ को गिरफ्तार कर लिया। सैनिकों ने भी आदेश का पालन करते हुए पेड़ कहीं भाग न जाए इसलिए उसे जंजीरों से बांध दिया। 121 साल बाद आज भी ये पेड़ ऐसे ही जंजीरों से बंधा हुआ खड़ा है।
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- फोटो : Social Media
इस गिरफ्तार पेड़ पर आज भी भारी-भारी जंजीरें लटकी हुई हैं यही नहीं गिरफ्तार पे़ड़ पर एक तख्ती भी लटकी हुई है जिस पर पेड़ के हवाले से लिखा हुआ है 'मैं गिरफ्तार हूं।' आज तक जंजीरें इसलिए नहीं हटाई गईं, ताकि अंग्रेजी शासन की क्रूरता को दर्शाया जा सके।
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- फोटो : Korea Bizwire
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बंदी पेड़ ब्रिटिश राज के काले कानूनों में से एक British Raj Frontier Crimes Regulation (FCR) ड्रेकोनियन फ्रंटियर क्राइम रेगुलेशन कानून की क्रूरता को दुनिया के सामने लाता है। यह कानून ब्रिटिश शासन के दौरान पश्तून विरोध का मुकाबला करने के लिए लागू किया गया था। इसके तहत तब ब्रिटिश सरकार को यह अधिकार था कि वह पश्तून जनजाति में किसी व्यक्ति या परिवार के द्वारा अपराध करने पर उसे सीधे दंडित कर सकते हैं।
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