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इतिहास, धर्म और शांति की जगह, बाजीराव पेशवा की समाधि

Mon, 15 Feb 2021 08:01 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Mon, 15 Feb 2021 08:01 PM IST
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Bajirao Peshwa Samadhi place of history, religion and peace
बाजीराव प्रथम - फोटो : सोशल मीडिया

'चीते की चाल, बाज की नजर और बाजीराव की तलवार पर कभी शक नहीं कर सकते हैं।' डायलॉग से आपने अंदाजा, तो लगा ही लिया होगा कि हम आज बाजीराव पेशवा के बारे में बात करने वाले हैं। अगर आपने बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म बाजीराव-मस्तानी देखी होगी, तो आपको बाजीराव पेशवा की समाधि स्थल के बारे में जानने के लिए जरूर उत्सुकता होगी।

Bajirao Peshwa Samadhi place of history, religion and peace
बाजीराव पेशवा की समाधि - फोटो : सोशल मीडिया

इंदौर से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर नर्मदा के तट पर स्थित रावेरखेड़ी में 'बाजीराव पेशवा की समाधि' है। रावेरखेड़ी पेशवा की वीरता और शौर्य का प्रतीक है। वैसे तो रावेरखेड़ी एक छोटा सा गांव है, लेकिन यहां कि संरचना इतनी सुंदर है, जो में सबसे शक्तिशाली मराठा शासक की याद दिलाती है। बाजीराव पेशवा के इतिहास को जानने के लिए रावेरखेड़ी एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

Bajirao Peshwa Samadhi place of history, religion and peace
बाजीराव पेशवा की समाधि - फोटो : सोशल मीडिया

नर्मदा नदी के किनारे बसा यह छोटा-सा गांव रावेरखेड़ी, इतिहास और धर्म के पन्नों में अपना विशेष स्थान रखता है। 28 अप्रैल 1740 में श्रीमंत बाजीराव पेशवा प्रथम का निधन रावेरखेड़ी में हुआ था। बाजीराव पेशवा मराठा सल्तनत के महान योद्धा थे, जो 1720 से चतुर्थ मराठा छत्रपति शाहूजी के पेशवा रहें। इतिहासकारों के मुताबिक, यह महान योद्धा दिल्ली से एक युद्ध जीतकर लौट रहा था और बीमार पड़ने के कारण के उनका यहां निधन हुआ।

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बाजीराव पेशवा की समाधि - फोटो : सोशल मीडिया

भाट परिवार के नौ पेशवाओं में से बाजीराव प्रथम सबसे प्रभावशाली व्यक्ति थे, जिन्होंने मराठा शासन का विस्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्होंने पुर्तगालियों और अंग्रेजों के साथ सफलतापूर्वक मुकाबला किया। बाजीराव पेशवा ने एक मराठा एसोसिएशन का भी गठन किया, जिसमें गुजरात के गायकवाड़, ग्वालियर के शिंदे (सिंधिया), नागपुर के भोंसले, इंदौर के होलकर शामिल थे।

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बाजीराव पेशवा की समाधि - फोटो : सोशल मीडिया

बाजीराव प्रथम के वफादार ग्वालियर के सिंधिया शासक ने रावेरखेड़ी में समाधि बनवाई थी। यह समाधि स्थान एक किले के रूप में बना हुआ है, जिसमें बड़े-बड़े नायाब पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। किले में सुंदर आकृति की खिड़कियां बनी हुई हैं, जहां से नर्मदा के मनोरम दृश्य को आसानी से देखा जा सकता है।

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