भारत में नवरात्र में कुमारी पूजन के दौरान छोटी बच्चियों को देवी समझ कर भोजन कराया जाता है। लेकिन नेपाल में तो छोटी बच्चियों को ही देवी बना दिया जाता है। इस दौरान उनका बचपन आस्था की भेंट चढ़ जाता है। जानिए देवी बनाने के क्रम में इन बच्चियों के साथ क्या क्या होता है।
खेलने कूदने की उम्र में देवी बना दी जाती हैं ये बच्चियां, व्यथा रुला देगी
नेपाल में रहने वाली बच्चियों को टेक कुमारी नामक इस प्रथा के कारण देवी बना दिया जाता है। पांच साल से आठ साल तक की किसी बच्ची को पहले चुना जाता है औऱ फिर उसे देवी घोषित कर दिया जाता है। उस दिन से ये बच्ची बच्ची नहीं रह जाती देवी बन जाती हैै।
खेलने कूदने की उम्र में देवी बना दी जाती हैं ये बच्चियां, व्यथा रुला देगी
'जीवित देवी' को अत्यधिक चयनात्मक अनुष्ठानों के माध्यम से चुना जाता है। इसके लिए 32 तरह की विशेषताओं का भी ध्यान रखा जाता है। यह उनकी आंखों का रंग, उनकी आवाज की गुणवत्ता, उनके दांत जैसी कई विशेषताओं के बाद किसी लड़की को देवी का रुप माना जाता है।
खेलने कूदने की उम्र में देवी बना दी जाती हैं ये बच्चियां, व्यथा रुला देगी
इस देवी की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ लगती है। कहा जाता है कि जिसे इस देवी के दर्शन हो जाए उसकी किस्मत अच्छी होती है।
ये बच्ची हमउम्र बच्चों के साथ खेल नहीं सकती, उनके साथ खा पी नहीं सकती और तो और घर से बाहर भी नहीं निकल सकती। अपने परिवार से भी ये बच्ची दूर कर दी जाती है।
खेलने कूदने की उम्र में देवी बना दी जाती हैं ये बच्चियां, व्यथा रुला देगी
सिर्फ त्यौहार में इन देवियों को बाहर जाने की इजाजत मिलती है। कितना भी मन हो लेकिन ये बच्ची सामान्य बच्चे की तरह व्यवहार नहीं कर सकती।