देश में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है और सबसे बुरा हाल दिल्ली एनसीआर में है। इसी को देखते हुए सरकार ने भी कड़ा रवैया अपना लिया है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च 2020 तक सभी BS-4 वाहनों पर रोक लगाए जाने की घोषणा की। जिसके बाद से ही वाहन कंपनियां BS6 वाहनों पर तेजी से काम कर रही हैं।
BS-6 फ्यूल आपकी कार या बाइक में कैसे करेगा काम, क्या होगा इसका असर माइलेज पर
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बीएस उत्सर्जन मानक वे मानक होते हैं जो भारत सरकार द्वारा स्थापित किए गए हैं। इस उत्सर्जन मानक के जरिये मोटर वाहनों के कारण होने वाले वायु प्रदूषण की मात्रा की व्याख्या की जाती है।
फिलहाल देश में बीएस-6 वाहनों की चर्चा जोरो पर है। आपके मन में कई सवाल उठ रहे होंगे कि आखिर बीएस-6 स्तर के फ्यूल को बीएस-4 वाले इंजन में डालने पर क्या होगा? तो आइए आपको बताते हैं कि कैसे ये काम करेगा।
बीएस-6 नॉर्म्स का फ्यूल जाहिर तौर पर प्रदूषण पर थोड़ी रोक लगाएगा, क्योंकि यह ईंधन काफी हद तक कार्बन मोनोऑक्साइड को रोकेगा। हालांकि दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग के लिए सिर्फ गाड़ियां जिम्मेदार नहीं है। आईए जानते हैं दुपहिया वाहनों पर इसका असर-
देश में फिलहाल सबसे ज्यादा संख्या बीएस-3 उत्सजर्न इंजन वाली बाइकों की है। ऐसी बाइकों के लिए बीएस-6 नॉर्म्स का इंजन शानदार काम करेगा। बाइक का मेंटेनेंस कम हो जाएगा और माइलेज थोड़ा बढ़ जाएगा। हालांकि बीएस-2 या बीएस-1 स्तर की बाइकों के लिए नया फ्यूल थोड़ी परेशानी कर सकता है।
कारों पर असर-
दिल्ली-एनसीआर में 2010 के बाद की सभी कारें बीएस-4 मानक वाली हैं। बीएस-3 मानक वाली भी कुछ कारें यहां चलाई जा रही हैं। ऐसे में इन कारों के लिए भी बीएस-6 नॉर्म्स वाला फ्यूल काफी अच्छा रहेगा। इंजन की लाइफ और माइलेज बढ़ जाएगा, मेंटेनेंस कम हो जाएगी।