कार कंपनियां अपनी कारों की सेल बढ़ाने के लिए कार लीज को बढ़ावा देने की कोशिशों में जुटी हुई हैं। देश में पहले से मौजूद रेव और जूम कार सर्विसेज लीज पर कारें उपलब्ध करा रही हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या कार खरीदना बेहतर है या फिर मंथली सबस्क्रिप्शन यानी लीज पर कार लेना बेहतर है। आइए जानतें हैं कि लीज पर कार लेना सही है या फिर कार खरीदना...
आखिर क्यों लें कार लीज पर या क्यों खरीदें अपनी कार, पढ़ें क्या हैं फायदे और नुकसान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जल्द बोर होने वालों के लिए लीज बेस्ट
अगर आप उन लोगों में से हैं जो कुछ ही महीनों में कारों से बोर हो जाते हैं, तो उन्हें कार लीज या मंथली सबस्क्रिप्शन पर कार लेनी चाहिए। लीज पर कारें 12 महीने से लेकर 48 महीने के लिए मिलती हैं। जिसके लिए पहले महीने में पूरे साल का इंश्योरेंस देना पड़ता है। वहीं लीज खत्म होने के बाद आप दूसरा व्हीकल चुन सकते हैं, या फिर लीज प्लान को आगे बढ़ा सकते हैं। वहीं कार खऱीदने के बाद कुछ ही महीनों में कार बेचना ज्यादा मुश्किल भरा साबित हो सकता है, वो भी तब जब आपने कार ईएमआई पर ली हो।
मिलेगी कमर्शियल नंबर प्लेट
कार लीज पर लेने से पहले एक बात जरूर जान लें कि मंथली सबस्क्रिप्शन पर मिलने वाली कारों पर कमर्शियल नंबरप्लेट मिलती है। यानी कि इन पर आपको सफेद बैकग्राउंड पर काले अक्षरों से लिखी नंबर प्लेट नहीं मिलेगी, जो प्राइवेट कारों पर मिलती है। अगर आप रोज दिल्ली से गुड़गांव जाते हैं, तो आपको स्टेट टैक्स चुकाना पड़ेगा। अगर आप ड्राइविंग के शौकीन हैं और अकसर लंबी ट्रिप्स पर जाने का शौक रखते हैं, तो आपको हर बार अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ेगा।
नहीं करवा पाएंगे कस्टमाइजेशन
वहीं अगर आपको कार कस्टमाइजेशन का शौक है, जिसे आप अपनी जरूरतों के मुताबिक मॉडिफाई कराते हैं, तो लीज व्हीकल को भूल जाएं। इसकी वजह है कि ज्यादातर लीज कॉन्ट्रैक्ट्स में स्टीरियो सिस्टम या अपनी मर्जी के स्पीकर्स तक नहीं लगवा पाएंगे। ऐसे में कार खरीदना ही बेहतर ऑप्शन है। यहां तक कि आप अपनी मर्जी की लाइट्स, सीट फैब्रिक, अलॉय व्हील्स भी लगवा पाएंगे।
नहीं हैं डाउनपेमेंट के पैसे तो लीज है बेहतर
कार लीज पर लेना उनके लिए बेस्ट है, जिनके पास कार खरीदने के लिए डाउनपेमेंट नहीं होती या फिर वे लोग जिनकी ट्रांसफरेबल जॉब होती है और सालभर बाद किसी दूसरे शहर में ट्रांसफर हो जाता है। वहीं कार खरीदने के लिए आपको डाउनपेमेंट के साथ टैक्स और इंश्योरेंस जैसे दूसरे चार्जेज भी चुकाने पड़ते हैं। इसके मुकाबले लीज पर व्हीकल लेने के लिए आपको केवल एक साल का इंश्योरेंस और मंथली सबस्क्रिप्शन देने पड़ता है, जो हर कार का अलग-अलग होता है। वहीं लीज में कार मैंटिनेंस का भी जंझट नहीं होता, क्योंकि कई कार कंपनियां कार मैंटिनेंस का खर्च खुद वहन करती हैं।