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वास्तु के अनुसार कोई दिशा नहीं होती है अशुभ, हर दिशा का होता है अपना महत्व
Fri, 30 Apr 2021 04:20 PM IST
Shashi Shashi
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Fri, 30 Apr 2021 04:20 PM IST
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(प्रतीकात्मक तस्वीर)
वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व माना जाता है इसलिए हर दिशा के लिए वास्तु निर्देश दिए गए हैं। मुख्य चार दिशाएं पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर होती है लेकिन इन चारों दिशाओं के मध्य स्थान को कोण कहा जाता है। इस तरह से चार कोण दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व को होते हैं। इस तरह से कुछ मिलाकर आठ दिशाएं हो जाती हैं। इसके अलावा आकाश और पाताल दो दिशाएं मानी गई हैं। इस तरह से सभी दस दिशाएं मानी गई हैं। वास्तु में हर दिशा का अलग महत्व बताया गया है। कोई भी दिशा अशुभ नहीं होती है। तो चलिए जानते हैं कि किस दिशा का क्या महत्व होता है और कौन सी दिशा में किस चीज का निर्माण करने से फायदा प्राप्त किया जा सकता है।
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वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व माना जाता है इसलिए हर दिशा के लिए वास्तु निर्देश दिए गए हैं। मुख्य चार दिशाएं पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और उत्तर होती है लेकिन इन चारों दिशाओं के मध्य स्थान को कोण कहा जाता है। इस तरह से चार कोण दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम, उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व को होते हैं। इस तरह से कुछ मिलाकर आठ दिशाएं हो जाती हैं। इसके अलावा आकाश और पाताल दो दिशाएं मानी गई हैं। इस तरह से सभी दस दिशाएं मानी गई हैं। वास्तु में हर दिशा का अलग महत्व बताया गया है। कोई भी दिशा अशुभ नहीं होती है। तो चलिए जानते हैं कि किस दिशा का क्या महत्व होता है और कौन सी दिशा में किस चीज का निर्माण करने से फायदा प्राप्त किया जा सकता है।
यदि किसी को सुपर मार्केट, रसायनिक सामान आदि से संबंधित भवन का निर्माण करवाना हो तो पश्चिम मुखी स्थान पर करवाया जा सकता है। यह दिशा उत्तम रहती है।
यदि आपको भारी कारखाना, बिजली और आग से संबंधित कोई कार्य शुरू करने के लिए उद्योग भवन का निर्माण करवाना है तो इसके लिए दक्षिण दिशा शुभ रहती है। घर में दक्षिण दिशा में भारी सामान आदि रखना सही रहता है।
यदि किसी को सुपर मार्केट, रसायनिक सामान आदि से संबंधित भवन का निर्माण करवाना हो तो पश्चिम मुखी स्थान पर करवाया जा सकता है। यह दिशा उत्तम रहती है।
पूर्व दिशा शिक्षा को देव दिशा माना गया है इस दिशा को सकारात्मक ऊर्जा का भंडार माना जाता है। पूर्व दिशा और ईशान कोण ईश्वर की आराधना करने और शिक्षा से संबंधित कार्यों के लिए यह दिशा शुभ मानी जाती हैं। घर में इस दिशा में मंदिर का निर्माण करवाना चाहिए। इसके अलावा हल्के निर्माण के लिए यह दिशा सही मानी गई है।
उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता हैै। इस दिशा में कोई भी खरीद और बिक्री से संबंधित प्रतिष्ठान और दुकान इस दिशा में खोलना श्रेयस्कर रहता है। घर या प्रतिष्ठान में इस दिशा में तिजोरी का दरवाजा खुलना बहुत शुभफलदायी रहता है।
उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता हैै। इस दिशा में कोई भी खरीद और बिक्री से संबंधित प्रतिष्ठान और दुकान इस दिशा में खोलना श्रेयस्कर रहता है। घर या प्रतिष्ठान में इस दिशा में तिजोरी का दरवाजा खुलना बहुत शुभफलदायी रहता है।