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खराब है आपका ये ग्रह तो होगी आपको खांसी-जुकाम की बीमारी, करें ये उपाय

Wed, 21 Oct 2020 03:12 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Wed, 21 Oct 2020 03:12 PM IST
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Significance of moon planet in Astrology
सौरमंडल के ग्रह - फोटो : Pixabay

वैदिक ज्योतिष में चंद्र देव का महत्वपूर्ण स्थान है। चंद्र देव मन का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं। ये माता, मन, मस्तिष्क, बुद्धिमता, स्वभाव, जननेद्रियों, खांसी जुकाम संबंधी रोगों के कारक हैं। इसके अलावा चंद्र देव व्यक्ति की भावनाओं पर नियंत्रण रखते हैं। चंद्र जल तत्व का ग्रह है। इसलिए सभी तरल पदार्थ चंद्र के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं। चंद्रमा के मित्र ग्रह सूर्य और बुध हैं। इनका किसी भी ग्रह से शत्रुता का भाव नहीं है। चंद्रमा कर्क राशि के स्वामी हैं। वहीं चंद्र वृषभ राशि में उच्च स्थान प्राप्त करते हैं। चंद्र वृश्चिक राशि में होने पर नीच अवस्था में होते हैं। चंद्र का भाग्य रत्न मोती है। चंद्रमा मंगल, गुरु, शुक्र व शनि से सम संबंध रखते हैं।

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चंद्र देव - फोटो : अमर उजाला

ज्योतिषीय गणना में चंद्र ग्रह का महत्व
व्यक्ति के जीवन से लेकर विवाह और फिर मृत्यु तक बहुत से क्षेत्रों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को बहुत अधिक ध्यान से पढ़ा जाता है। भारतीय ज्योतिष पर आधारित दैनिक, साप्ताहिक तथा मासिक भविष्य फल भी व्यक्ति की जन्म के समय की चंद्र राशि के आधार पर बताए जाते हैं। चंद्रमा की गति से सर्वदा परिवर्तन होता रहता है। चंद्रमा दिल का स्वामी है।

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ज्योतिष में चंद्रमा - फोटो : social media

यदि कुंडली में चंद्रमा हो मजबूत
चंद्र राशि लग्न भाव में हो या चंद्र जन्म राशि में हो या फिर चंद्र लग्न भाव में बली अवस्था में हो तो व्यक्ति को कफ रोग शीघ्र प्रभावित करता है। शरीर की गोलाकार प्रकृति का होता है। मन प्रसन्न कर देने वाली आंखें, विनोदी, अतिकामुक, अस्थिर विचारधारा होता है। अगर जन्म कुण्डली में चंद्रमा मजबूत हो तो व्यक्ति सभी कामों में सफलता प्राप्त करता है और हमेशा उसका मन प्रसन्न रहता है। पद प्राप्ति व पदोन्नति, जलोत्पन्न, तरल व श्वेत पदार्थों के कारोबार से लाभ मिलता है। 

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वैदिक ज्योतिष में चंद्र ग्रह का महत्वपूर्ण स्थान है। - फोटो : Pixabay

चंद्रमा से प्रभावित
चंद्रमा शरीर के बाईं आंख, गाल, मांस, रक्त, बलगम, वायु, स्त्री में दाईं आंख, पेट, भोजन नली, गर्भाश्य, अण्डाशय, मूत्राशय, चंद्र कुण्डली में कमजोर हो तो व्यक्ति को ह्रदय रोग, फेफड़े, दमा, आतिसार, दस्त गुर्दा, बहुमूत्र, पीलिया, गर्भाशय के रोग, महावारी में अनियमितता, कफ से जुड़े रोग होते हैं। अगर चंद्रमा कृष्ण पक्ष का नीच या शत्रु राशि में हो तथा अशुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो चंद्रमा निर्बल हो जाता है। ऐसी अवस्था में निद्रा व आलस्य घेरे रहता है। व्यक्ति मानसिक तौर पर बेचैन, मन चंचलता से भरा रहता है मन में भय व्याप्त रहता है। 

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चंद्र ग्रह की कृपा दृष्टि पाने के लिए सोमवार को उपवास रखें। - फोटो : Pixabay

चंद्रमा को मजबूत कैसे करें
ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा की शांति के उपाय बताए गए हैं। चंद्रमा के लिए विधिनुसार, चंद्र बीज मंत्र का जाप करें। चंद्र यंत्र की विधिवत् स्थापना कर उसकी आराधना करें। चंद्रमा के लिए मोती रत्न, दो मुखी रुद्राक्ष और खिरनी की जड़ को धारण करें। चंद्र ग्रह की कृपा दृष्टि पाने के लिए सोमवार को उपवास रखें। चंद्र ग्रह की शांति के लिए दूध, चावल, चांदी, मोती, सफेद कपड़े, सफेद पुष्प एवं शंख का दान सोमवार को चंद्र की होरा और चंद्र के नक्षत्रों (रोहिणी, हस्त, श्रवण) में किया जाना चाहिए।

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