ज्योतिष में शनि को दशम और लाभ स्थान का स्वामित्व प्राप्त है। मनुष्य के जीवन में कर्म और उसके लाभ की स्थिति शनि से ही देखी जाती है। इसके अलावा ये ग्रह गूढ़ विद्या और रहस्य का भी कारक है। शनि को आठवें भाव का कारकत्व भी प्राप्त है। इसे नौ ग्रहों के मंत्रिमंडल में नौकर का दर्जा प्राप्त है। इसलिए शनि प्रधान व्यक्ति को कर्म बहुत करना पड़ता है। यह मजदूर और शोषित वर्ग का भी कारक है और न्यायपालिका पर भी इसका अधिकार है। शनि मनुष्य के कर्मों का फल उसे प्रदान करते है और जातक को न्याय देते है। यह एक पाप ग्रह है और इसकी दृष्टि जिस भी भाव पर जाती है उस भाव संबंधी फलों में कमी करती है ऐसा विद्वानों का कथन है। शनि मेष से लेकर मीन लग्न तक की कुंडली में अलग अलग भाव के स्वामी होकर विभिन्न फल प्रदान करते है। आज इस लेख में हम समझते है कि शनि का 12 लग्नों में जातक को क्या फल मिलेगा।
Shani Grah: मेष से मीन लग्न तक की कुंडली में कैसा फल देते है शनि, किसके लिए होते हैं अकारक
आनंद पाराशर, नई दिल्ली
Published by: रुस्तम राणा
Updated Mon, 05 Jul 2021 03:57 PM IST
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