Shani Sade Sati: ज्योतिष शास्त्र में शनि की साढ़ेसाती को जीवन का एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली चरण माना जाता है। यह अवधि तब आरंभ होती है जब शनि ग्रह किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्र राशि से 12वें, 1वें और 2वें भाव में भ्रमण करते हैं। इसकी कुल अवधि लगभग साढ़े सात वर्ष होती है, इसलिए इसे “साढ़ेसाती” कहा जाता है।
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अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि साढ़ेसाती केवल कठिनाइयाँ और नुकसान देती है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। शनि देव न्याय के देवता हैं और यह समय व्यक्ति को उसके कर्मों का उचित फल देता है। जो लोग सत्य, ईमानदारी और अच्छे कर्मों के मार्ग पर चलते हैं, उनके लिए यह काल प्रगति, सफलता और सम्मान लेकर आ सकता है। वहीं, जो लोग गलत कार्यों में संलग्न रहते हैं, उनके लिए यह अवधि चुनौतियों, संघर्ष और कष्ट का कारण बन सकती है।
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